गड्ढेनुमा घर में रहते थे हड़प्पा सभ्यता के लोग
सुनील मान, नारनौंद : राखी गढ़ी की खुदाई में हर रोज हड़प्पा सभ्यता को लेकर नए राज खुल रहे हैं। पुरा
सुनील मान, नारनौंद :
राखी गढ़ी की खुदाई में हर रोज हड़प्पा सभ्यता को लेकर नए राज खुल रहे हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों ने इस साइट से बहुत कुछ खोज कर ली है। इसी कड़ी में पुरातत्व विशेषज्ञों ने उस समय के मकानों के रहस्य को भी खोज निकाला है कि वो लोग शुरुआत में कैसे घरों में रहते थे और बाद में उनके मकान कैसे विकसित हुए। हालांकि खुदाई में मिले अवशेषों की गहनता से जाच की जा रही है। ऐसे में हड़प्पा संस्कृति के बारे में बहुत से राज सामने आना अभी बाकी है।
राखी गढ़ी गाव हड़प्पा संस्कृति की कई यादें संजोए हुए है। इस साइट पर डेक्कन कॉलेज यूनिवर्सिटी पुणे व हरियाणा पुरातत्व विभाग की तरफ से लगातार खुदाई की जा रही है। डेक्कन कॉलेज यूनिवर्सिटी के वाइस चासलर वसंत सिंधे की मानें तो यह संस्कृति करीब सात हजार वर्ष पुरानी है। उस समय के लोग मिट्टी के नीचे गड्ढेनुमा घर में रहते थे जिसके ाबद उन लोगों ने मिट्टी के ऊपर झोपड़ी टाइप के घर बनाने शुरू किए। इसके बाद तरक्की के दौर में पहले कच्ची ईटों से घर बनाने शुरू किए और बाद में मकानों को पक्का बनाना शुरू कर दिया। वो लोग सिविल इजींनियरिग में काफी तरक्की कर चुके थे। उन लोगों ने शुरू से ही पानी की निकासी के लिए उचित प्रबंध किए हुए थे, जिनका प्रमाण खुदाई के दौरान सामने आ रहा है। वहीं उन लोगों ने शहर के चारों तरफ भी उन्होंने किला बंदी कर अपनी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हुए थे।
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राजा होने के नहीं मिले सबूत
उन लोगों ने झगड़ों से निपटने के लिए अपने ही शहर में कुछ लोगों का चयन करके उनकी जिम्मेवारी तय की हुई थी कि वो झगड़ों का निपटारा करेंगें। क्योंकि अभी तक की खुदाई में ऐसा कुछ सामने नहीं आया कि उस समय कोई राजा यहा पर राज करता हो।
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वर्जन
हड़प्पा सभ्यता के लोगों के घरों के बारे में पूरी जानकारी हासिल हो चुकी है कि वो लोग शुरुआत में जमीन के नीचे गड्ढों में रहते थे और धीरे धीरे तरक्की करके पक्के मकानों में रहना शुरू किया था।
- वसंत सिंधे, वीसी, डेक्कन यूनिवर्सिटी पुणे।
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