सुरेंद्र सोढी, हिसार

अंग्रेजों द्वारा बनवाए गए जहाज कोठी की आठ कनाल भूमि पर लोग काबिज हो गए। एक करोड़ रुपये से अधिक की इस जमीन पर कब्जा होने के कारण अब इसमें प्रवेश करने के लिए एक संकरी गली हो कर गुजरना पड़ता है। कभी गए जमाने में यह कोठी बाहर बने चौराहे से देखी जा सकती थी। हैरत की बात यह कि पुरातत्व विभाग के हाथ आने के बाद इस प्राचीन भवन की जमीन का बड़ा हिस्सा गायब हो गया। प्रदेशभर के प्राचीन धरोहर समेटे जहाज कोठी की प्राचीन इमारत 17 साल पहले साल 2006 में सुपुर्द की गई थी। उस समय इस भवन व चारों ओर की 12 कनाल 8 मरले जमीन सौंपी गई थी। आठ मरले जमीन पर देखते ही देखते कब्जा हो गया।

पिछले डेढ़ साल से पुरातत्व विभाग के जोनल म्यूजियम प्रभारी प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। केंद्र सरकार के इस उपक्रम की खासियत यह कि प्रदेश में इकलौता ऐसा म्यूजियम है जिसे प्राचीन धरोहर के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद अतिक्रमण का शिकार म्यूजियम का कोई खैरगवार नहीं है।

नियम यह कि प्राचीन धरोहर से सौ मीटर की परिधि में निर्माण ही नहीं हो सकता परंतु जोनल म्यूजियम की इमारत की चार दीवारी के एक ओर खिड़की व रोशनदान तक निकाले हुए हैं। म्यूजियम के प्रवेश द्वार के एक छोर से जहाज कोठी तक दिखाई नहीं देते है। आसपास बनी इमारतों के कारण जहाज कोठी मानो पीछे धकेल दी गई हो। म्यूजियम में हजारों साल पुराने स्तंभ, सिंधु घाटी सभ्यता से पूर्व की प्राचीन प्रतिमाएं व शिलालेख तथा अन्य धरोहर रखी हैं। जल्द ही पंचकुला से प्राचीन सभ्यताओं के मिले सिक्के भी यहां लाए जाने की उम्मीद है। जहाज पुल के समीप स्थित अंग्रेजों द्वारा बनाई गई आरामगाह जहाज कोठी में बना संग्रहालय में बेशकीमती प्रतिमाएं व शिलालेख हैं। वर्ष 1994 से पहले यह एतिहासिक इमारत पशु पालन विभाग के अधीन थी जिसमें विभाग के निदेशक रहते थे। लोक निर्माण विभाग द्वारा कंडम घोषित करने के बाद पुरातत्व विभाग के संरक्षण में जहाज कोठी आ गई। भारतीय पुरातत्व विभाग को 55 लाख रुपये की राशि देकर इस इमारत को पुनर्जीवित किया है। वर्ष 2009 में पुरातत्व विभाग को जोनल म्यूजियम बनाने के लिए इमारत सौंप दी गई।

आला अफसरों को जानकारी दी : जोनल म्यूजियम प्रभारी

जोनल म्यूजियम प्रभारी एसपी चालिया का कहना है कि करीब एक करोड़ की जमीन को कुछ लोगों ने दबा लिया है। जिसके कारण म्यूजियम का प्रवेश मार्ग बेहद संकरा हो गया है। चौराहे से म्यूजियम तक रास्ता टेढ़ा-मेढ़ा हो गया है। इस बारे में विभाग के आला अधिकारियों को भी जानकारी दे दी गई है। स्थानीय प्रशासन से भी पत्र व्यवहार किया गया है।

क्या है जहाज कोठी

पुरातत्व विभाग से जुड़े तथ्यों अनुसार अंग्रेजों द्वारा पानी की जहाज का माडल भवन के रूप में तैयार किया गया था। इस भवन के चारों ओर पानी इकट्ठा किया गया। भवन की बालकनी से पानी व नक्शे को देखते हुए जहाज का अहसास होता है। अंग्रेज अधिकारी रेलवे स्टेशन से ठंडी सड़क होते हुए जहाज कोठी पहुंचते थे। कभी ठंडी सड़क से जहाज कोठी और कोठी से गुजरी महल नजर आता था। समय के साथ स्थिति यह कि अब चंद दूरी से भी जहाज कोठी दिखाई नहीं देती।

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