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    मेघनाथ के ब्रह्मास्त्र से लक्ष्मण मूर्छित, राम दल ने की लंका पर चढ़ाई

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 14 Oct 2021 05:39 PM (IST)

    भगवान राम ने रावण को समझाने के लिए कई दूत लंका भेजे। रावण के भाई विभीषण ने भी रावण को सीता माता को लौटाने की सलाह दी। रावण ने हठ नहीं छोड़ी। शहर की विभिन्न रामलीला में अंगद रावण संवाद का मंचन हुआ

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    मेघनाथ के ब्रह्मास्त्र से लक्ष्मण मूर्छित, राम दल ने की लंका पर चढ़ाई

    संवाद सहयोगी, बादशाहपुर: भगवान राम ने रावण को समझाने के लिए कई दूत लंका भेजे। रावण के भाई विभीषण ने भी रावण को सीता माता को लौटाने की सलाह दी। रावण ने हठ नहीं छोड़ी। शहर की विभिन्न रामलीला में अंगद रावण संवाद का मंचन हुआ, लक्ष्मण मूर्छा की लीला दिखाई गई। मंदोदरी ने भी रावण से बार-बार सीता को लौटाने का आग्रह किया। अधिकतर रामलीला में सभी संवाद का समापन कर दिया गया। शुक्रवार को विजयादशमी पर राम रावण युद्ध के बाद केवल रावण वध की लीला का मंचन किया जाएगा। जैकबपुरा की दुर्गा रामलीला समिति

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    लीला रावण के महल से शुरूहोती है। रावण अपनी रानी मंदोदरी के साथ मंत्रणा करता है। मंदोदरी (सुमित नेमका) रावण (आदित्य मीणा) से कहती है कि हे प्राणनाथ-हनुमत जैसे जिनके पायत हैं वे कैसे मारे जाएंगे, तुम लड़के जिन्हें समझते हो वे लड़के तुम्हें हराएंगे। इसलिए मेरी एक बात माने लो और सीता को उन्हें वापस लौटा दो। रावण मंदोदरी से कहता है कि कल की घटना से तुम विचलित हो कर राम को भगवान समझती हो।

    इसके बाद रावण दरबार में पहुंचकर मंत्रियों से मंत्रणा करता है कि आखिर अब आगे क्या किया जाए। दरबार में विभीषण (ओम प्रकाश गौला) अपने भाई रावण को सलाह देते हैं कि श्रीराम से माफी मांग कर सीता माता उन्हें लौटा दो। रावण उनकी बात मानने के बजाय विभीषण को लात मारकर लंका से ही निकाल देता है। विभीषण वहां से निकलकर राम दल की ओर चल देते हैं। उसे दूर से आता देख राम कहते हैं कि यह कौन है जो लंका की ओर से आ रहा है।

    सुग्रीव कहते हैं कि लंका से आ रहा है व्यक्ति तो हमारा शुभचितक नहीं हो सकता। इसलिए इसको सजा देते हैं। इस पर राम कहते हैं कि मेरी शरण में आए हुए को सजा नहीं, प्रेम मिलता है। हनुमान जी विभीषण के पास जाकर यहां आने का कारण पूछते हैं तो बताते हैं कि रावण ने उन्हें लंका से निकाल दिया है। फिर विभीषण श्रीराम से मिलते हैं और राम उन्हें अपनी सेना में शामिल कर लेते हैं।

    नल-नील और वानर सेना के सहयोग से लंका तक पुल बनाकर वानर सेना कूच कर जाती है। समुद्र पार करने के बाद एक बार शांतिदूत अंगद (मनु सिगेलिया) को रावण के दरबार में भेजा जाता है। वहां रावण-अंगद का संवाद होता है। रावण से अंगद कहते हैं कि वे श्रीराम से क्षमा मांगकर सीता जी को लौटा दें। रावण ने क्रोधित होकर कहताहै- मुझसा पंडित, मुझसा योद्धा त्रिभुवन में और न दूजा है, अपने शीशों को काट-काट कर शंकर को मैंने पूजा है।

    श्री सनातन धर्म सभा रामलीला क्लब भीम नगर

    भीम नगर की रामलीला में करीब एक घंटे तक रावण और अंगद के बीच संवाद चला। अंगद रावण पांव को उठाने के लिए रावण के कई योद्धाओं ने प्रयास किया, लेकिन पांव को हिला तक न सके। इसके बाद खुद रावण आता है और अंगद का पांव उठाने की कोशिश करता है। अंगद ने पांव पीछे खींचकर कहा कि मेरे नहीं जाकर श्रीराम के पैर पकड़ो। बात बनती नहीं देख अंगद की ओर से युद्ध का ऐलान कर दिया गया, जवाब में रावण भी युद्ध का ऐलान कर देता है।

    रावण ने दरबार में पुत्र मेघनाथ को बुलाया और राम-लक्ष्मण के साथ युद्ध करने को भेजा। युद्ध में मेघनाथ ब्रह्मास्त्र का प्रयोग लक्ष्मण पर करता है और वे मूर्छित हो जाते हैं। हनुमान जी लक्ष्मण को उठाकर श्रीराम के पास ले जाते हैं। उन्हें सारा हाल बताते हैं। छोटे भाई को इस तरह से जमीन पर पड़ा देख राम विलाप करते हैं। विभीषण ने लक्ष्मण को मूर्छा से वापस लाने के लिए सुषेण वैद्य का नाम सुझाया। हनुमान जी सुषेण वैद्य के बताने पर द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाने जाते हैं। संजीवनी बूटी की पहचान ना होने पर हनुमान जी पूरा द्रोणागिरी पर्वत ही उठा लाए।

    वजीराबाद गांव की रामलीला

    हनुमान जी श्रीराम का आशीर्वाद लेकर बूटी लेने चले जाते हैं। द्रोणगिरी पर्वत पर तो वे समझ नहीं पाए कि संजीवनी बूटी कौन सी है। तब हनुमान जी ने द्रोणगिरी पर्वत ही उठा लिया। हनुमान जी पर्वत लेकर अयोध्या के ऊपर से निकल रहे थे तो उन पर भरत की नजर पड़ी। भरत ने सोचा कि कोई संकट अयोध्या पर आने वाला है। इसी के चलते उन्होंने एक तीर हनुमान जी को मारा और वे पर्वत समेत नीचे गिर गए। नीचे गिरते ही जब हनुमान जी ने जय श्रीराम का नाम पुकारा। भरत उनके पास गए। उनसे पूछा कि वे कौन हैं। इस पर हनुमान जी ने सारा वृतांत सुनाया। दुखी भरत ने कहा कि वे अपने तीर पर बिठाकर उन्हें थोड़े समय में ही वहां पर पहुंचा सकते हैं। हनुमान जी राम दल में संजीवनी बूटी लेकर पहुंच गए। इसके बाद द्रोणगिरी पर्वत से वैद्य ने संजीवनी बूटी लक्ष्मण को सुंघाई और उनकी मूर्छा टूट गई। उठते ही लक्ष्मण ने अपने दुश्मन को ललकारा। राम ने उन्हें गले लगाकर विलाप किया।