प्रिंस हत्याकांड की सुनवाई को मिलेगी रफ्तार, गुरुग्राम कोर्ट को 6 महीने में पूरा करना होगा ट्रायल; HC का आदेश
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रिंस हत्याकांड के ट्रायल को छह महीने में पूरा करने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें

गुरुग्राम कोर्ट को पंजाब एवं हरियाण हाई कोर्ट ने दिया आदेश। फोटो: आर्काइव
आदित्य राज, गुरुग्राम। बहुचर्चित प्रिंस हत्याकांड में नौ साल से न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार को अब छह महीने में ट्रायल पूरा होने की उम्मीद जगी है।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए गुरुग्राम जिला अदालत को छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
पीड़ित पक्ष और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मामले को गुरुग्राम से पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
हाई कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि मामले में काफी गवाहों की गवाही हो चुकी है। ऐसे में इस स्तर पर मुकदमे को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करना उचित नहीं होगा।
इससे सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित होने और मामले के निपटारे में और देरी होने की आशंका है। इसलिए गुरुग्राम जिला अदालत में ही मुकदमे की सुनवाई जारी रखते हुए छह महीने में ट्रायल पूरा किया जाए।
छह महीने में ट्रायल पूरा करने के निर्देश
आठ सितंबर 2017 को भोंडसी स्थित एक निजी स्कूल में दूसरी कक्षा के सात वर्षीय छात्र प्रिंस की हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में गुरुग्राम पुलिस ने स्कूल के बस कंडक्टर को गिरफ्तार किया था।
बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने जांच के बाद स्कूल के ही एक छात्र को हत्या का आरोपी बनाया और बस कंडक्टर को क्लीन चिट दे दी।
मामले में आरोपी को नाबालिग की जगह बालिग मानकर मुकदमा चलाने का कानूनी संघर्ष भी लंबे समय तक चला। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आरोपी पर बालिग के रूप में मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हुआ।
जनवरी 2023 में आरोप तय होने के बाद ट्रायल शुरू हुआ। जल्द ट्रायल पूरा हो, इसे ध्यान में रखकर पीड़ित पक्ष ने जिला अदालत से मामला सीबीआई की विशेष अदालत में स्थानांतरित करने के लिए अर्जी डाली थी।
जिला अदालत पर काम का है काफी दबाव
पीड़ित पक्ष की ओर से मामले को देख रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल का कहना है कि घटना को नौ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाया है।
जिला अदालत में मुकदमों का दबाव अधिक होने के कारण सुनवाई की गति प्रभावित हो रही थी। इसी को देखते हुए पीड़ित पक्ष और सीबीआई ने मुकदमे को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में स्थानांतरित करने की अर्जी लगाई थी।
हालांकि, हाई कोर्ट ने गवाहों की हो चुकी गवाही को देखते हुए स्थानांतरण उचित नहीं माना। अब छह महीने में ट्रायल पूरा करने के निर्देश से उम्मीद है कि मामले में जल्द फैसला आ सकेगा।
बता दें कि आरोपी भोलू फिलहाल जमानत पर बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 अक्टूबर 2022 में उसे जमानत दी थी।
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