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    Yamuna Pollution: यमुना कैसे नहीं होगी प्रदूषित? हरियाणा के मंत्री ने सब कुछ किया क्लियर

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 01:24 PM (IST)

    यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से अब नालों में केवल शोधित जल ही छोड़ा जाएगा। उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को विकास परियोजनाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसटीपी के सुचारू संचालन और सीईआर राशि का सही उपयोग करने पर जोर दिया ताकि जल प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।

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    यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से, अब नालों में केवल शोधित जल ही छोड़ा जाएगा। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए इससे जुड़े नाले यानी ड्रेन में अब केवल शोधित जल ही छोड़ा जाएगा। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक की।

    पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित इस बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए), हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी), नगर निगम गुरुग्राम व मानेसर, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक के दौरान मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुरुग्राम में चल रही सभी विकास परियोजनाएं न केवल वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाई जाएं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम हों।

    उन्होंने कहा कि गुरुग्राम देश की आर्थिक प्रगति की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में यहां की विकास योजनाएं कम से कम अगले 20 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए। कोई भी परियोजना तब तक धरातल पर क्रियान्वित नहीं की जानी चाहिए, जब तक वह भविष्य की आवश्यकताओं को पूरी तरह पूरा न कर ले।

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    एसटीपी केवल अंतिम छोर पर ही स्थापित किए जाएं

    राव नरबीर सिंह ने नगर निगम गुरुग्राम और जीएमडीए को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में स्थापित सभी एसटीपी का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में नए एसटीपी लगाने की योजना बनाई जाए, तो उन्हें संबंधित अंतिम छोर पर ही स्थापित किया जाए, ताकि जल प्रदूषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

    राव नरबीर सिंह ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) की प्रक्रिया में चल रही परियोजनाओं से प्राप्त कॉर्पोरेट पर्यावरण उत्तरदायित्व (सीईआर) राशि को बिना किसी देरी या लापरवाही के निर्धारित मानकों और दिशानिर्देशों के अनुसार खर्च किया जाए।

    उन्होंने कहा कि यह राशि शहर के विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनहित से जुड़े कार्यों जैसे जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने पर प्राथमिकता के आधार पर खर्च की जानी चाहिए।

    बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्यामल मिश्रा, गुरुग्राम नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया, मानेसर नगर निगम आयुक्त आयुष सिन्हा, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण प्रशासक वैशाली सिंह, अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त यश जालुका व रविंद्र यादव सहित जीएमडीए, नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी उपस्थित थे।