विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 21, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gurugram News: कार्डियक अरेस्ट से मौत होने पर बीमा कंपनी ने रोक दिया था क्लेम, अब ब्याज के साथ देने होंगे 36.53 लाख

Published: Thu, 21 Mar 2024 04:00 AM (GMT+05:30)

काेरोना की चपेट में आने के दौरान कार्डियक अरेस्ट से युवक की मौत होने पर बीमा पालिसी द्वारा 36.53 लाख ...और पढ़ें

Gurugram News: कार्डियक अरेस्ट से मौत होने पर बीमा कंपनी ने रोक दिया था क्लेम
Gurugram News: कार्डियक अरेस्ट से मौत होने पर बीमा कंपनी ने रोक दिया था क्लेम

HighLights

  1. आयोग ने बीमा कंपनी से पूछा- पालिसी समय देते हुए बीमा धारक को दी गई थी जानकारी?
  2. कोरोना की चपेट में आने से हुई थी युवक की मौत

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। काेरोना की चपेट में आने के दौरान कार्डियक अरेस्ट से युवक की मौत होने पर बीमा पालिसी द्वारा 36.53 लाख रुपये को क्लेम रोकने पर उपभोक्ता आयोग ने ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया है।

बीमा कंपनी की तरफ से क्लेम रोकते हुए कहा गया था कि बीमा धारक ने जो बीमा पालिसी ली थी कि उसके तहत वह हार्ट अटैक से मौत होने पर क्लेम दे सकते थे, लेकिन कार्डियक अरेस्ट से मौत होने पर नहीं दे सकते थे।

आयोग ने बीमा पालिसी की कंपनी की दलील को रद करते हुए क्लेम की राशि वापस देने का आदेश दिया है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है। शिकायतकर्ता ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस पालिसी ली हुई थी।

बीमा कंपनी ने दिया था ये तर्क

सेक्टर-53 निवासी अर्चिता श्रीवास्तव ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उनके पति निखिल सक्सेना अप्रैल 2021 में बीमार हो गए थे। इसके बाद उन्होंने निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। 30 अप्रैल को कोरोना के चलते उनकी मौत हो गई थी।

अस्पताल की तरफ से उनकी मौत हो कारण कार्डियक अरेस्ट बताया था। इसके बाद उन्होंने बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया। उनका आवेदन खारिज करते हुए कंपनी ने कहा कि यह बीमारी उनकी द्वारा ली गई बीमा पालिसी के तहत नहीं आती है। इस पालिसी के तहत कंपनी हार्ट अटैक से मृत्यु होने पर क्लेम देती है। कार्डियक अरेस्ट से मौत पर नहीं देती है।

मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी से आयोग ने पूछा की क्या पालिसी देते समय बीमा धारक को यह जानकारी दी गई थी। इस पर कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह नौ प्रतिशत की दर से 36.53 लाख रुपये दें। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को होने वाली परेशानी पर उन्हें पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में क्या है अंतर

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर सिविल अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. नवीन कुमार ने बताया कि हार्ट को ब्लड सप्लाई करने वाली आर्टिरीज के बंद होने पर व्यक्ति हार्ट अटैक का शिकार होता है, जबकि पूरे हार्ट का ही काम करना बंद कर देना कार्डियक अरेस्ट कहलाता है।

यह भी पढ़ें - 

Gurugram News: नौकरी के नाम पर तीन लोगों से 26 लाख रुपये की ठगी, पुलिस ने शुरू की जांच

Haryana Cabinet: दुष्यंत के कार्यालय में बैठेंगे कमल गुप्ता, सीमा त्रिखा को मिला अनिल विज का कमरा