अदालत के आदेश से छेड़छाड़ कर जमीन करा ली अपने नाम, जज साहब खुद बने शिकायतकर्ता; पुलिस आयुक्त को भी लगाई लताड़
पटौदी के प्रदीप चौहान पर अदालत के आदेशों से छेड़छाड़ कर अपने पिता की जमीन का पूरा हिस्सा अपने नाम करने का आरोप है। यह आरोप किसी आम व्यक्ति ने नहीं बल्कि अदालत का फैसला सुनाने वाले जज साहब ने खुद लगाया है।

महावीर यादव, बादशाहपुर (गुरुगाम)। पटौदी के प्रदीप चौहान पर अदालत के आदेशों से छेड़छाड़ कर अपने पिता की जमीन का पूरा हिस्सा अपने नाम करने का आरोप है। यह आरोप किसी आम व्यक्ति ने नहीं बल्कि अदालत का फैसला सुनाने वाले जज साहब ने खुद लगाया है।
पटौदी के अतिरिक्त सिविल जज ने अदालत से छेड़छाड़ करने के मामले में पटौदी थाना में प्रदीप चौहान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई थी। अब इस मामले में गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को अदालत के सामने दोहरा मापदंड रखने पर फटकार लगाई। आरोपित को सात महीने बाद जमानत दी है।
जमीन विवाद में 2013 में सुनाया था फैसला
अप्रैल 2013 में पटौदी अदालत के अतिरिक्त सिविल जज तरुण सिंघल (अब गुरुग्राम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश) की अदालत ने जमीन के विवाद के मामले में फैसला सुनाया था।
फैसले में प्रदीप और उसके भाई संदीप को बराबर का हिस्सेदार बनाया गया था। आरोप है कि प्रदीप चौहान ने इस मामले में अदालत के आदेश में छेड़छाड़ कर पूरी जमीन अपने नाम करा ली।
जज ने खुद की मामले की जांच
पीड़ित पक्ष के अदालत में पहुंचने पर सिविल जज तरुण सिंघल की अदालत ने इस मामले में संज्ञान लिया। उन्होंने खुद मामले की जांच की और शिकायतकर्ता बनकर पटौदी पुलिस थाना में इसकी शिकायत दी।
सिविल जज तरुण सिंघल की शिकायत पर चार जून 2016 को पटौदी पुलिस थाना ने आरोपित प्रदीप चौहान के विरुद्ध धोखाधड़ी की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
प्रदीप चौहान की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। उसके बाद प्रदीप चौहान ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्चतम न्यायालय ने तीन जून 2018 को अंतरिम जमानत देने के साथ ही प्रदीप चौहान को जांच में शामिल होने के निर्देश दिए।
23 अप्रैल को प्रदीप हुआ था गिरफ्तार
प्रदीप चौहान के पुलिस जांच में शामिल न होने की शिकायत पर उनकी अग्रिम जमानत खारिज कर दी गई। 23 फरवरी 2023 को प्रदीप चौहान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
प्रदीप चौहान के अधिवक्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर अदालत में दलील दी कि प्रदीप चौहान पुलिस जांच में लगातार शामिल हो रहे हैं। पुलिस ने उनके अंगूठे के निशान भी लिए हैं।
अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस इस मामले में अलग-अलग बयान दे रही है। इस पर अदालत ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को अक्तूबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के आदेश दिए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद 19 अक्टूबर को आरोपित प्रदीप चौहान को जमानत याचिका स्वीकार कर ली। हाई कोर्ट के आदेश आने के बाद पटौदी की अतिरिक्त सिविल जज तरन्नुम खान की अदालत में जमानत के आदेश जारी कर दिए।
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