Gurugram Pollution: गुरुग्राम दुनिया के प्रदूषित शहरों में शामिल, जहरीली हवा में प्राप्त हुआ 38वां स्थान
Gurugram Pollution स्विटजरलैंड की फर्म आईक्यू एयर की तरफ से वर्ल्ड एयर क्वालिटी की रिपोर्ट में गुरुग्राम दुनिया के प्रदूषित शहरों में शामिल है। इस लिस्ट में गुरुग्राम विश्व में प्रदूषित शहरों की लिस्ट में 38वें स्थान पर है।

गुरुग्राम, जागरण संवाददाता। दुनिया में गुरुग्राम की पहचान केवल उद्योगों तथा मेडिकल हब से ही नहीं है। इसकी एक पहचान प्रदूषित शहर होने के कारण भी है। वैसे वर्षों से दिल्ली एनसीआर शहरों में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनी हुई है और वायु प्रदूषण की समस्या इस कदर है कि दुनिया के प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।
कई रिपोर्ट में गुरुग्राम सबसे प्रदूषित शहर
चुनावों के दौर में प्रदूषण की समस्या चुनावी मुद्दा तक बन जाता है और लोगों को स्वच्छ हवा का सपना दिखाया जाता है। गुरुग्राम में वायु प्रदूषण की समस्या का कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है। दावों में हर रोज स्वच्छ हवा की बात की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर संभव नहीं हो पा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लेकर डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में गुरुग्राम को कई बार देश का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है।
2017 से 2022 में की गई रिसर्च पर आधारित रिपोर्ट
अब हाल में स्विटजरलैंड की फर्म आईक्यू एयर की तरफ से वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट जारी की गई है। इसमें गुरुग्राम समेत एनसीआर के सभी शहर शामिल हैं। हालांकि, एनसीआर में गुरुग्राम बेहतर स्थिति में है, लेकिन दुनिया के प्रदूषित शहरों में शामिल है। स्विटजरलैंड की फर्म की जारी यह रिपोर्ट वर्ष 2017 से 2022 में किए गए रिसर्च के आधार पर है।
जारी रिपोर्ट में दुनिया के 50 शहरों के नाम शामिल है, जिसमें 39 शहर भारत के शामिल है। भारत के 39 शहरों में 14 शहर हरियाणा के शामिल है। इस लिस्ट में गुरुग्राम विश्व में प्रदूषित शहरों की लिस्ट में 38वें स्थान पर है। गुरुग्राम के पडोस में राजस्थान का भिवाड़ी शहर दुनिया का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर है और भारत की राजधानी चौथे स्थान पर है।
डीजल आटो बंद करने के लिए सुझाव
शहर में डीजल आटो वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। एक अनुमान है कि यहां पर तीस हजार से अधिक डीजल आटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। अगर कुछ को छोड़ दें, तो अधिकतर आटो चलते वक्त अपने पीछे काला धुआं छोड़कर पर्यावरण प्रदूषित कर रहे है। वर्ष 2012 में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सरकार को सिफारिश की थी कि शहर में नए डीजल आटो हटाए जाने चाहिए लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ।
पैदल चलने का रास्ता नहीं
सड़क पर रेहड़ी वालों का कब्जा है। कोई चौक नहीं बचा होगा, जिस पर आटो वालों का कब्जा नहीं है और यही जाम का करण है। हालात यह है कि पैदल चलने वाले के लिए रास्ता नहीं है। जबकि प्रदूषण का स्तर कम हो, इसके लिए पैदल चलने वालों और साइकिल से चलने वालों को सबसे अच्छी सुविधा मिलनी चाहिए।
डा. भरत सिंह बिश्नोई, सेवानिवृत निदेशक स्वास्थ्य विभाग हरियाणा ने कहा कि वायु प्रदूषण की धूल कण कैंसर, हृदय रोग, दमा बीमारी का कारण है। शहर की सड़के पेड़-पौधो के बिना सुनी है। गुरुग्राम के पास अरावली पहाड़ी है, जो बड़े हिस्से के साथ लगती है। अब हम वहां पर पीपल-नीम पेड़ों से हर भरा कर दे, तो गुरुग्राम शहर के लोगों को बड़े स्तर पर स्वच्छ हवा मिलेगी और जहरीली हवा से राहत भी मिलेगी।
100 कार का इंजन चालू करके एक स्थान पर दस- पंद्रह मिनट खड़ी होती है तो वहां पर साढ़े 13 किग्रा आक्सीजन खत्म हो जाती है। मैं गुरुग्राम में जब डीजल और पेट्रोल की कार का इंजन चालू कर जांच करता था, तो वायु मंडल में कार्बन मोनोडाईआक्साइड का स्तर बढ़ जाता था। अब आप सोचिए जब एक डीजल आटो, जिसका इंजन चालू हैं और एक स्थान पर सवारियों के इंतजार में खड़ा है, वह धुआं छोड़ता है तो कार्बन मोनोडाइआक्साइड का स्तर कितना बढ़ता होगा।
डा. राजेश गढ़िया,वरिष्ठ वैज्ञानिक (सेवानिवृत) हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि शहर में हजारों डीजल आटो तथा अन्य वाहन जाम में खड़े रहते हैं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि कितनी आक्सीजन नष्ट हो गई और कार्बन मोनोडाइआक्साइड बढ़ गई।
कुलदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि अगर पुरानी रिपोर्टों को देखेंगे, तो गुरुग्राम में प्रदूषण मामले में सुधार हुआ है। पर्यावरण स्वच्छ रखने के लिए हर विभाग की जिम्मेदारी सुनिश्चित की हुई है। सड़कों पर यातायात जाम ना लगे और सड़कों पर साफ सफाई रखने का नियम है। अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों को बंद करना है।
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