गुरुग्राम [संदीप रतन]। प्रदेश का सबसे धनी गुरुग्राम नगर निगम कंगाली की राह पर है। प्रदेश की अन्य निकायों और विभागों का बोझ उठाने के फेर में नगर निगम का खजाना साफ हो गया है। पिछले चार वर्ष में 989.8 करोड़ (लगभग एक हजार करोड़ रुपये) का भुगतान निगम के खजाने से हुआ है। नगर निगम के खातों में सिर्फ 650 करोड़ रुपये ही शेष बचे हैं और इतने बजट में निगम की सरकार छह महीने ही चल सकती है। नगर निगम का सालाना खर्च 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

कर्मचारी-अधिकारियों को वेतन देने का भी संकट

निगम की आय लगातार घटती जा रही है। बता दें कि वर्ष 2019 में नगर निगम की 1077 करोड़ रुपये की एफडी (फिक्सड डिपाजिट) थी, जिसमें से अब 650 करोड़ रुपये ही बचे हैं। विज्ञापनों, प्रापर्टी टैक्स आदि से विज्ञापनों की आय घटने के कारण एफडी ताेड़कर शहर में विकास कार्यों, सफाई एजेंसियों और मलबा उठाने वाली एजेंसी को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। अगर यही हालात रहे तो कर्मचारी-अधिकारियों को वेतन देने का भी संकट हो जाएगा। इस संबंध में गुरुग्राम निगमायुक्त मुकेश आहुजा को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

खजाने में ऐसे लग रही सेंध

फरीदाबाद को दिए 150 करोड़, 50 करोड़ ब्याज हो गया-2010 में गुरुग्राम नगर निगम से फरीदाबाद नगर निगम ने 150 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, 12 साल में इसका ब्याज 50 करोड़ रुपये हो गया है। कुल 200 करोड़ रुपये का कर्ज फरीदाबाद निगम पर है। कर्ज लौटाने को लेकर कई बार पत्राचार किया गया लेकिन फरीदाबाद निगम ने असमर्थता जता दी।

एनजीटी ने प्रदेश सरकार पर 100 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया

2017 में गुरुग्राम मेट्रोपालिटन डेवलपमेंट अथारिटी (जीएमडीए) का गठन हुआ और विकास कार्यों के नाम पर 500 करोड़ रुपये निगम से लिए गए थे, अभी तक नहीं लौटाए। बंधवाड़ी में कूड़े का निपटान नहीं होने पर एनजीटी ने प्रदेश सरकार पर 100 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया। मामला गुरुग्राम निगम से संबंधित होने के कारण निगम को ही वहन करना पड़ा। कूड़े का निपटान नहीं होने के कारण इससे पहले 2.80 करोड़ रुपये जुर्माना लग चुका है।

फरीदाबाद का कूड़ा गुरुग्राम निगम उठवा रहाअक्टूबर 2022 तक 69 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान फरीदाबाद शहर का कूड़ा उठान के नाम पर गुरुग्राम नगर निगम कर चुका है। हर महीने फरीदाबाद का कूड़ा उठाने के एवज में लगभग ढाई करोड़ रुपये गुरुग्राम निगम के खजाने से दिए जा रहे हैं।

लेने थे निकायों से, गुरुग्राम में कर दिए एडजस्ट

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) का प्रदेशभर के निकायों पर बिलों के रूप में 113 करोड़ रुपये बकाया था, लेकिन निकायों ने इस राशि का भुगतान करने में असमर्थता जता दी। गुरुग्राम नगर निगम को डीएचबीवीएन से बिजली सेस के रूप में 113 करोड़ रुपये लेने थे, लेकिन मुख्यालय के आदेश के बाद पांच कराेड़ रुपये और इसमें जोड़ते हुए प्रदेश के निकायों के बकाया में इसे एडजस्ट (समायोजित) कर दिया।

ये है आमदनी का गणित (31 अक्टूबर तक)

  • निगम ने कमाए 391 करोड़,
  • खर्च हो गए 730 करोड़
  • विज्ञापनों से आय - 15 करोड़
  • प्रापर्टी टैक्स - 115 करोड़
  • स्टांप ड्यूटी - 209 करोड़ (30 जून तक)
  • सीवर-पानी बिल- 42 करोड़
  • विकास शुल्क, बिल्डिंग प्लान फीस आदि- 10 करोड़
  • कुल आय- 391 करोड़

(विकास कार्यों जैसे सड़क निर्माण, सीवर, मरम्मत तथा रखरखाव और सफाई आदि कार्यों पर 31 अक्टूबर तक 730 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।)

Edited By: Pradeep Kumar Chauhan

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