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    प्रॉपर्टी का डाटा अपलोड करने में दिल्ली-NCR का ये शहर निकला आगे, बाकी छूटे पीछे

    Updated: Thu, 10 Jul 2025 03:13 PM (IST)

    हरियाणा में नगर निकायों की सरकारी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। गुरुग्राम नगर निगम पोर्टल पर सबसे ज्यादा संपत्तियां अपलोड करके पहले स्थान पर है जहां 262 संपत्तियां दर्ज की गई हैं। इस डिजिटल अभियान का उद्देश्य पारदर्शिता और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। सड़कों को भी यूनिक आईडी से पहचाना जाएगा जिससे यूटिलिटी सेवाओं का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।

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    सेक्टर 34 स्थित गुरुग्राम नगर निगम कार्यालय। जागरण आर्काइव

    संदीप रतन, गुरुग्राम। प्रदेश में निकायों की सरकारी संपत्तियों (खाली सरकारी भूमि, बिल्डिंग आदि) का डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इसके लिए म्युनिसिपल एसेट्स मैनेजमेंट पोर्टल तैयार किया गया है। निकाय क्षेत्र की संपत्तियों का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करने में गुरुग्राम नगर निगम अव्वल है।

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    यहां पर अभी तक 262 सरकारी संपत्तियों की एंट्री की गई हैं, जोकि प्रदेश में सबसे ज्यादा है। 8 जुलाई तक प्रदेशभर की निकायों द्वारा कुल 971 एंट्री की जा चुकी हैं। वहीं, गुरुग्राम के ही मानेसर नगर निगम क्षेत्र में 139 एंट्री को जीआइएस पर चिह्नित नहीं किया, जोकि प्रदेश में सबसे अधिक है।

    इसी तरह फरीदाबाद, पानीपत, बहादुरगढ़ जैसे बड़े शहरों में अभी तक पोर्टल पर सकारी संपत्तियों की जीरो या बहुत कम एंट्री हुई हैं। नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका ने 51 और पुन्हाना ने 47 नगरपालिकाओं ने उल्लेखनीय एंट्री की हैं। रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा ने 24, जबकि जींद ने 10 संपत्तियों को पोर्टल पर अपलाेड किया है।

    हालांकि फिलहाल अब तक अपलोड की गई 971 एंंट्री में से किसी को भी आयुक्त या डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर द्वारा स्वीकृति नहीं दी गई। अधिकारियों का कहना है कि अगले चरण में अब यह स्वीकृति देने का काम शुरू होगा। बता दें कि इस डिजिटल अभियान का उद्देश्य नगर निकाय संपत्तियों की सटीकता, पारदर्शिता और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

    सड़कों की भी होगी यूनिक आईडी

    सड़कों को भी यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर से चिह्नित करेगा। इसके साथ ही भूमिगत सीवर, पेयजल और अन्य यूटिलिटी नेटवर्क का भी सर्वे ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक से किया जाएगा। गुरुग्राम निगम सहित प्रदेश के अन्य शहरों की सड़कों और उनसे जुड़ी यूटिलिटी लाइनों का डिजिटल रिकार्ड नहीं है। इसका खामियाजा निगम की इंजीनियरिंग विंग को भुगतना पड़ता है। नई सड़कें बनाने या पुरानी की मरम्मत के दौरान अक्सर पानी, सीवर या ड्रेनेज लाइनों को नुकसान पहुंचता है, जिससे दोबारा खुदाई और मरम्मत जैसे कार्यों पर बेवजह बजट खर्च होता है। अब जीपीआर सर्वे के माध्यम से हर सड़क और उससे जुड़े नेटवर्क का डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा।

    डिजिटल रिकॉर्ड से यह फायदा होगा

    अधिकारियों का कहना है कि बिल्डिंग, सड़कों तथा अन्य संपत्तियों को यूनिक आइडी मिलने से अलग डाटा बेस तैयार होगा, जिसमें उनिर्माण तिथि, मरम्मत इतिहास, और उससे जुड़े यूटिलिटी नेटवर्क की जानकारी होगी। इससे भविष्य में किसी भी निर्माण या मरम्मत कार्य से पहले सभी विभाग समन्वय बना सकेंगे।

     प्रदेश में म्युनिसिपल एसेट्स मैनेजमेंट पोर्टल पर संपत्तियाें का सबसे ज्यादा डाटा गुरुग्राम का अपलोड किया गया है। सभी संपत्तियों की डिटेल अब पोर्टल पर उपलब्ध है।

    संजीव मान, चीफ टाउन प्लानर नगर निगम गुरुग्राम