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    Cyber Crime के 'तिलिस्‍म' को तोड़ने की तैयारी, दुनिया को सालाना 10.5 ट्रिलियन डॉलर के नुकसान का 'डर'

    Updated: Wed, 09 Jul 2025 03:44 PM (IST)

    गुरुग्राम में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें साइबर अपराधों से बचाव पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे तकनीक के जानकार लोग भी धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। नागरिकों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है। वर्ष 2025 तक साइबर अपराध से भारी नुकसान होने का अनुमान है।

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    बढ़ते साइबर अपराध पर जताई चिंता और बचाव के लिए किया जागरूक।

    जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। बढ़ते डिजिटल खतरों से निपटने के लिए प्रभावी पहल के तहत गुरुग्राम पुलिस, नगारो, नैसकाम और जीएसीएस संगठन की ओर से साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला सत्र का नेतृत्व पुलिस आयुक्त विकास कुमार अरोड़ा ने किया। इसमें सौ से अधिक विशेषज्ञ व आइटी पेशेवर एक साथ आए। इसमें बताया गया कि बताया गया कि वर्ष 2025 के अंत तक साइबर अपराध से दुनिया को सालाना 10.5 ट्रिलियन डाॅलर का नुकसान होने का अनुमान है, जो इसे अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देगा।

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    साइबर खतरों से किया सतर्क

    इन्होंने प्रतिभागियों को साइबर अपराध को रोकने के लिए व्यावहारिक समझ के साथ शिक्षित करने, उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के साइबर खतरों से खुद को और अपने परिचितों को बचाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों पर ध्यान केंद्रित किया।

    बताया गया कि वर्ष 2025 के अंत तक साइबर अपराध से दुनिया को सालाना 10.5 ट्रिलियन डालर का नुकसान होने की उम्मीद है, जो इसे अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देगा। जागरूकता और समय पर कार्यवाही की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

    पांच तरीके से की जाती है धोखाधड़ी

    शोध से पता चलता है कि तकनीक के जानकार व्यक्ति भी अक्सर सुनियोजित धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। इस सत्र में नागरिकों और उद्यमों को परेशान करने वाली धोखाधड़ी के पांच प्रमुख प्रकारों पर गहन चर्चा की गई।

    इनमें निवेश, डिजिटल अरेस्ट, जानकार बनकर, ऑनलाइन नंबर तलाश कर और नकली ग्राहक सेवा के आधार पर ठगी शामिल है।

    ...तो उतनी रहेगी नुकसान रोकने की संभावना

    पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने कहा कि साइबर अपराध सिर्फ एक तरह के व्यक्ति को निशाना नहीं बनाता। फोन या इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाला कोई भी व्यक्ति इसका शिकार हो सकता है। धोखाधड़ी होने पर जल्दी से जल्दी रिपोर्ट करना क्यों जरूरी है। हम जितनी तेजी से कार्यवाही करेंगे, नुकसान को रोकने की संभावना उतनी ही बेहतर होगी।

    लुभावने ऑफर्स को परखने की सलाह

    लोग जितना ज्यादा जागरूक होंगे, उतने ही घोटाले कम होंगे। प्रतिभागियों को मुख्य सावधानियों के बारे में भी शिक्षित किया गया। उन्हें नकली विज्ञापनों से सावधान रहने, अज्ञात लिंक पर क्लिक न करने, आनलाइन संदिग्ध व्यक्तियों से जुड़ने से बचने और असामान्य रूप से उच्च रिटर्न या आसान पैसे का वादा करने वाले ऑफर के प्रति संशयी रहने का आग्रह किया गया।

    यह रहे उपस्थित

    इस मौके पर नगारो संस्था के सह-संस्थापक मानस ह्यूमन, डीसीपी हेडक्वार्टर डाॅ. अर्पित जैन, डीसीपी ईस्ट गौरव, डीसीपी ट्रैफिक डाॅ. राजेश मोहन, एसीपी साइबर क्राइम प्रियांशु दीवान समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।