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एनजीटी ने नजफगढ़ झील के संरक्षण और सीमांकन पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मांगा स्पष्टीकरण

Published: Thu, 29 Jan 2026 05:26 AM (IST)

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नजफगढ़ झील के संरक्षण और सीमांकन पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है। मंत्रालय ...और पढ़ें

एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा।

एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा।

HighLights

  1. एनजीटी ने नजफगढ़ झील के वेटलैंड दर्जे पर स्पष्टीकरण मांगा।

  2. अंतरिम रिपोर्टों का राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र कर रहा सत्यापन।

  3. मार्च तक अंतिम रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी लेगा निर्णय।

महावीर यादव, बादशाहपुर। नजफगढ़ झील के संरक्षण और सीमांकन से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है। रिपोर्ट के बाद ही एनजीटी तय करेगा नजफगढ़ झील का कितना क्षेत्र वेटलैंड है या नहीं।

एनजीटी की प्रधान पीठ में हुई सुनवाई में मंत्रालय ने बताया कि नजफगढ़ झील को लेकर डब्ल्यूआईएसए और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा तैयार अंतरिम रिपोर्टों को पुनः सत्यापन (री-वैलिडेशन) की आवश्यकता है। जिसके लिए राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरी रिपोर्ट मार्च तक ही आ पाएगी। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ सदस्य डा. ए. सेंथिल वेल की पीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने पक्ष रखा।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 26 नवंबर को दायर अतिरिक्त हलफनामे में बताया कि राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र की दो सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने 19 और 20 नवंबर को नजफगढ़ झील का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया। इस टीम में वैज्ञानिक डा. सुब्बारेड्डी बोनथु और डा. हरिहरन जी. शामिल थे। उनके साथ दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग तथा गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के तकनीकी अधिकारी भी मौजूद थे।

दो दिवसीय फील्ड सर्वे के दौरान झील की हाइड्रोलाजिक्ल और पारिस्थितिक सीमाओं का आकलन किया गया। इसमें जीपीएस मैपिंग, स्थल निरीक्षण, भूमि उपयोग का अध्ययन और जैव विविधता का गुणात्मक मूल्यांकन शामिल था। इस सर्वे के आधार पर एक प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलन रिपोर्ट तैयार की गई है। जिसे रिकार्ड पर रखा गया है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिवक्ता ने एनजीटी के समक्ष यह स्पष्ट करने के लिए समय मांगा कि रिकार्ड पर रखी गई रिपोर्ट केवल फील्ड विजिट के दौरान तैयार की गई अवलोकनात्मक रिपोर्ट है या इसे राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र की आधिकारिक प्रारंभिक रिपोर्ट माना जाए। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र द्वारा नजफगढ़ झील पर अंतिम रिपोर्ट मार्च तक तैयार की जाएगी।

एनजीटी ने मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह यह स्पष्ट करे कि प्रस्तुत रिपोर्ट का स्वरूप क्या है। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई आपत्ति न हो तो डब्ल्यूआईएसए और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा तैयार वे रिपोर्टें भी रिकार्ड पर रखी जाएं। जिनका पुनः सत्यापन राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र द्वारा किया जा रहा है।

हरियाणा वेटलैंड प्राधिकरण की रिपोर्ट

हरियाणा वेटलैंड प्राधिकरण ने 29 जुलाई 2024 को दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अनुमानित रूप से 75 एकड़ क्षेत्र (60 मीटर चौड़ाई × 5000 मीटर लंबाई) नजफगढ़ ड्रेन के किनारे चिन्हित किया गया है। जिसे वेटलैंड घोषित किया जा सकता है। हालांकि इसका दायरा जल प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बढ़ाया भी जा सकता है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह क्षेत्र 2000 से 5000 एकड़ तक है। उपग्रह चित्रों (साल 2014–2021) के अनुसार जल भराव का क्षेत्र 200 एकड़ से लेकर 2048 एकड़ तक रहा है। 1882 के भूमि राजस्व अभिलेखों में भी 1772 एकड़ क्षेत्र पांच गांवों को जलमग्न दिखाया गया है। 2009 से 2024 के बीच झील का जलमग्न क्षेत्र 1500 एकड़ से लेकर 5349 एकड़ तक दर्ज किया गया है। औसतन यह क्षेत्र लगभग 3800 एकड़ (1520 हेक्टेयर) बताया गया।

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