गुरुग्राम में बारिश से जलभराव और जाम पर मानवाधिकार आयोग सख्त, नागरिक ढांचे का होगा तकनीकी ऑडिट
मानवाधिकार आयोग ने गुरुग्राम में वर्षा के बाद जलभराव और यातायात जाम का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने जिला ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटड इमेज।
HighLights
मानवाधिकार आयोग ने गुरुग्राम जलभराव का स्वत: संज्ञान लिया।
जिला प्रशासन को नागरिक ढांचे के तकनीकी ऑडिट का निर्देश।
स्कूल बसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था के आदेश।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी में वर्षा होते ही सड़कों का तालाब में तब्दील होना और घंटों यातायात व्यवस्था के चरमराने का मामला अब मानवाधिकार आयोग के दरवाजे तक पहुंच गया है।
बार-बार जलभराव और उससे पैदा होने वाली परेशानियों पर सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने जिला प्रशासन और संबंधित सरकारी एजेंसियों से जवाब मांगने के साथ शहर के नागरिक ढांचे का तकनीकी आडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
आयोग की चिंता केवल सड़क पर जमा पानी और यातायात जाम तक सीमित नहीं है। सुभाष चौक पर जलभराव में स्कूल बस के फंसने और उसमें बच्चों के परेशान होने की घटना ने बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आयोग ने जिला प्रशासन से पूछा है कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या ठोस और स्थायी व्यवस्था की गई है। मानवाधिकार आयोग ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूल बसों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने कहा है कि स्कूल बसों की रियल टाइम ट्रैकिंग की सुविधा होनी चाहिए। किसी बस के जलभराव में फंसने पर स्कूल, अभिभावक, पुलिस और जिला प्रशासन के बीच तत्काल सूचना एवं संचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान कर वहां अत्यधिक वर्षा के दौरान स्कूल बसों की आवाजाही प्रतिबंधित करने को कहा गया है। फंसी बसों के लिए सुरक्षित होल्डिंग प्वाइंट चिह्नित करने और जरूरत पड़ने पर बच्चों को सुरक्षित निकालने की स्पष्ट कार्यप्रणाली तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने बचाव कार्य के लिए यातायात कर्मियों की तैनाती तथा एंबुलेंस, अग्निशमन और पुलिस वाहनों के लिए आपातकालीन कारिडोर चिह्नित कर उन्हें हर स्थिति में चालू रखने की व्यवस्था करने को भी कहा है।
24 अगस्त की वर्षा ने फिर खोल दी थी व्यवस्था की पोल
आयोग ने अगस्त में हुई वर्षा के बाद गुरुग्राम में बने हालात का स्वत: संज्ञान लिया है। 24 अगस्त को करीब 75 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। इसके बाद सुभाष चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, इफको चौक, सोहना रोड, शीतला माता रोड और दिल्ली-जयपुर हाईवे समेत शहर के बड़े हिस्से में जलभराव हो गया था।
प्रमुख सड़कों और चौराहों पर घंटों जाम लगा रहा। स्थिति ऐसी रही कि कई जगह अपेक्षाकृत कम दूरी तय करने में भी लोगों को असामान्य रूप से लंबा समय लगा।
सबसे गंभीर बात यह रही कि जलभराव और जाम के कारण एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होने की सूचना आयोग के सामने आई। यानी समस्या केवल यह नहीं कि लोगों को कार्यालय पहुंचने में देर हुई या वाहन पानी में फंस गए।
सवाल यह है कि यदि किसी गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना हो या किसी स्थान पर तत्काल बचाव अभियान चलाना पड़े तो क्या शहर की मौजूदा व्यवस्था उसके लिए सक्षम है?
वर्षा को दोष देकर नहीं बच पाएंगी एजेंसियां
आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि गुरुग्राम में जलभराव को केवल अत्यधिक वर्षा का परिणाम मानकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। आयोग के अनुसार यह स्थिति शहर के कई हिस्सों में बार-बार सामने आने वाली शहरी बाढ़ और अपर्याप्त नागरिक बुनियादी ढांचे की ओर इशारा करती है।
यही वह बिंदु है जो गुरुग्राम की व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। हर मानसून से पहले नालों की सफाई, पंपों की व्यवस्था, ड्रेनेज सुधार और जलभराव रोकने के दावे किए जाते हैं। अब आयोग ने सरकारी एजेंसियों को केवल बयान देने के बजाय तकनीकी आडिट की दिशा में आगे बढ़ने को कहा है।
इफको चौक पर सड़क धंसने ने भी बढ़ाई चिंता
आयोग ने इफको चौक के पास सर्विस रोड के एक हिस्से के धंसने और भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन से जुड़ी क्षति एवं रिसाव की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे महज सड़क धंसने की घटना नहीं माना, बल्कि इसे शहर के भूमिगत नागरिक ढांचे की स्थिति से जोड़कर देखा है।
आयोग ने कहा है कि गुरुग्राम में वर्षा जल निकासी नालियों, सीवरेज नेटवर्क, जलापूर्ति पाइपलाइन, भूमिगत यूटिलिटी और सड़कों को अलग-अलग देखकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। इनके बीच के संबंधों का एकीकृत तकनीकी आकलन जरूरी है।
15 दिसंबर की अगली सुनवाई में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के जवाब से यह भी साफ होगा कि बार-बार जलभराव झेल रहे गुरुग्राम के लिए इस बार भी केवल आश्वासन मिलेगा या स्थायी समाधान की कोई ठोस कार्ययोजना सामने आएगी।
