गुरुग्राम में जुर्माने के बाद भी नहीं बढ़ी विकास की रफ्तार, जीएमडीए के एफओबी प्रोजेक्ट लटके
गुरुग्राम में जीएमडीए के फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) प्रोजेक्ट तय समय सीमा से काफी पीछे चल रहे हैं। निर्माण एजेंसी ...और पढ़ें

फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) समय सीमा के बावजूद अधूरे पड़े। (फाइल फोटो)
HighLights
निर्माण एजेंसी पर 1.60 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया
गुरुग्राम में एफओबी परियोजनाओं का केवल 20% काम पूरा
विभागीय बदलावों और भूमि विवादों से परियोजनाएं प्रभावित
संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। शहर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) समय सीमा के बावजूद अधूरे पड़े हैं। निर्माण एजेंसी पर करोड़ों का जुर्माना लगाने के बाद भी काम की गति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है, जिससे परियोजना की समयसीमा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जीएमडीए ने दिसंबर 2024 को करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से हिसार की धारीवाल बिल्डटैक लिमिटेड को चार एफओबी बनाने का ठेका दिया था। इन एफओबी का निर्माण ओल्ड दिल्ली रोड पर श्याम गारमेंट्स के पास, गुरुग्राम-सोहना रोड पर ओमेक्स मॉल और रहेजा मॉल के नजदीक तथा शीतला माता रोड पर मंदिर के पास होना था। तय शर्तों के अनुसार कंपनी को 18 महीने में, यानी 21 जून 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करना था।
परियोजना में देरी के पीछे क्या है वजह?
हालांकि अब तक कुल काम का करीब 20 प्रतिशत ही पूरा हो सका है। जमीन उपलब्ध न होने के कारण रहेजा मॉल के पास बनने वाला एक एफओबी रद्द करना पड़ा, जबकि बाकी तीन साइट्स पर भी काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। शीतला माता रोड पर तो निर्माण कार्य अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया है।
निर्माणाधीन एफओबी के कारण ओल्ड दिल्ली रोड और गुरुग्राम-सोहना रोड पर स्थानीय लोगों और दुकानदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक दुकानदार के अनुसार, काम अधूरा छोड़ दिया गया है और यह साफ नहीं है कि इसे कब तक पूरा किया जाएगा।
निर्माण कंपनी पर 1.60 करोड़ रुपये का जुर्माना
परियोजना में देरी के पीछे विभागीय स्तर पर लगातार हो रहे बदलाव को भी एक कारण माना जा रहा है। पिछले दो महीनों में तीन अलग-अलग कार्यकारी अभियंताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। पहले आरसी देशवाल, फिर दीपेंद्र राज और अब अमित गोदारा इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं।
निर्माण में देरी को गंभीरता से लेते हुए जीएमडीए ने 30 जनवरी को निर्माण कंपनी पर 1.60 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। कंपनी पर 378 दिन की देरी का आरोप है और चेतावनी दी गई थी कि यदि काम में तेजी नहीं लाई गई तो अनुबंध रद्द किया जा सकता है। इसके बावजूद मौके पर निर्माण की गति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
