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गुरुग्राम के रिहायशी इलाकों में अवैध PG का जाल, मालिकों पर होगी कानूनी कार्रवाई; 1625 हैं पंजीकृत

Published: Thu, 08 Oct 2026 10:18 AM (IST)

गुरुग्राम नगर निगम ने रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से संचालित पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों पर शिकंजा कसने की तैयारी ...और पढ़ें

अब नगर निगम ने संबंधित विभागों को ऐसे पीजी की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जो बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। एआई इमेज

अब नगर निगम ने संबंधित विभागों को ऐसे पीजी की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जो बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। एआई इमेज

HighLights

  1. नगर निगम अवैध पीजी पर कार्रवाई की तैयारी में।

  2. बिना अनुमति, पंजीकरण वाले पीजी मालिकों पर होगी कार्रवाई।

  3. सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं के उल्लंघन पर ध्यान केंद्रित।

गौरव सिंगला, नया गुरुग्राम। गुरुग्राम के रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों पर अब नगर निगम ने शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।

लंबे समय से रिहायशी मकानों में बिना जरूरी अनुमति, पंजीकरण और सुरक्षा मानकों के पीजी संचालन की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के बाद अब नगर निगम ने संबंधित विभागों को ऐसे पीजी की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

सम्पत्ति मालिकों पर होगी सख्त कार्रवाई

नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त यश जलुका ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी), नगर निगम, जिला नगर योजनाकार एन्फोर्समेंट (डीटीपीई) और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (एचएसआइआइडीसी) के अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें अवैध रूप से संचालित पीजी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संपत्ति मालिकों की पहचान कर उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई करने को कहा गया है।

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निगम के पास नहीं है स्पष्ट आंकड़ा 

नगर निगम के संपत्ति कर संबंधी रिकाॅर्ड के अनुसार शहर में 1625 संपत्तियां पीजी श्रेणी में दर्ज हैं। इनमें एचएसवीपी सेक्टरों में 276, लाइसेंस प्राप्त कालोनियों में 492, नगर निगम क्षेत्र में 856 और एचएसआईआईडीसी क्षेत्र में एक पीजी शामिल है।

हालांकि, यह संख्या केवल उन संपत्तियों की है, जिन्होंने पीजी के रूप में अपना पंजीकरण कराया है और संपत्ति कर रिकाॅर्ड में दर्ज हैं। शहर में बिना पंजीकरण और बिना अनुमति चल रहे पीजी की वास्तविक संख्या का कोई स्पष्ट आंकड़ा निगम के पास नहीं है।

रिहायशी मकानों में क्षमता से कई गुना लोग

नगर निगम को क्षेत्रीय कर्मचारियों से मिली जानकारी में सामने आया है कि कई रिहायशी संपत्तियों में जरूरी अनुमति, लाइसेंस, पंजीकरण, फायर एनओसी और अन्य स्वीकृतियों के बिना पीजी चलाए जा रहे हैं।

कई मकान परिवार के रहने के हिसाब से बनाए गए हैं, लेकिन उनमें क्षमता से कहीं अधिक लोगों को ठहराया जा रहा है। ऐसे मामलों में एक ही मकान में बड़ी संख्या में लोगों के रहने से आग लगने की स्थिति में निकासी की व्यवस्था, बिजली के लोड, भवन की मजबूती और अग्निशमन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

इसके अलावा पार्किंग, सड़क पर वाहनों का दबाव, कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। निगम ने भी माना है कि नियमों के विपरीत संचालित पीजी भवन नियमों, क्षेत्र उपयोग और नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं।

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वर्षों से चल रहे पीजी पर अब जागा प्रशासन

रिहायशी इलाकों में पीजी का संचालन गुरुग्राम में कोई नई समस्या नहीं है। नए गुरुग्राम से लेकर पुराने शहर और एचएसवीपी सेक्टरों तक बड़ी संख्या में मकानों में किराये पर कमरे और पीजी संचालित किए जा रहे हैं।

इनमें से कई संपत्तियों में नियमों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी नियमित जांच को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभागों को बिना अनुमति और नियमों के विपरीत चल रहे पीजी की जानकारी मिल रही थी तो अब तक इनकी जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

संपत्ति कर रिकाॅर्ड में 1625 पीजी दर्ज होने के बावजूद बिना पंजीकरण संचालित पीजी की संख्या का कोई ठोस आंकड़ा नहीं होना भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब निगम ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन कार्रवाई जमीन पर कितनी प्रभावी होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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एचएसवीपी, डीटीपीई और एचएसआईआईडीसी को भी निर्देश

अतिरिक्त आयुक्त यश जलुका की ओर से एचएसवीपी के संपदा अधिकारी-1 और 2, नगर निगम के सभी संयुक्त आयुक्तों, डीटीपीई और एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।

संबंधित अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र में नियमों के विपरीत चल रहे पीजी की पहचान कर संपत्ति मालिकों और संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।

इसके साथ ही नगर निगम ने अवैध अथवा अत्यधिक भीड़ वाले पीजी के संबंध में नागरिकों से शिकायत प्राप्त करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की बात भी कही है। इससे ऐसे पीजी की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जो अभी तक निगम के रिकाॅर्ड में दर्ज नहीं हैं।

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