चिंटेल्स पैराडिसो का टावर-जे तीन महीने में होगा ध्वस्त, नगर निगम ने दी अनुमति
गुरुग्राम नगर निगम ने चिंटेल्स पैराडिसो सोसायटी के टावर-जे को ध्वस्त करने की अनुमति दे दी है। बिल्डर को अपने ...और पढ़ें

चिंटेल्स पैराडिसो का टावर-जे तीन महीने में होगा ध्वस्त ( फोटो स्रोत : जागरण )
HighLights
नगर निगम ने टावर-जे गिराने की अनुमति दी।
बिल्डर को तीन माह में ध्वस्त करना होगा।
सुरक्षा और मलबा प्रबंधन अनिवार्य होगा।
संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडिसो ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के टावर-जे को गिराने की नगर निगम गुरुग्राम ने अनुमति दे दी है।
नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने 30 अक्टूबर को आदेश जारी कर बिल्डर कंपनी चिंटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पूरी इमारत ध्वस्त करने के निर्देश दिए।
पहले ही खाली हो चुका है टॉवर
बिल्डर को अपने खर्च, जोखिम और जिम्मेदारी पर तकनीकी रूप से योग्य एजेंसी के जरिए यह काम कराना होगा। टॉवर को बिल्डर प्रबंधन पहले ही खाली करा चुका है।
आदेश के अनुसार, इमारत को कानूनी रूप से खाली कराने और ध्वस्तीकरण से जुड़ी सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद तीन महीने के भीतर इसे गिराना होगा।
टॉवरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
10 फरवरी 2022 को इसी सोसायटी के टॉवर-डी में छठी मंजिल के एक फ्लैट का ड्राइंग रूम भरभराकर नीचे गिर गया था, जिसमें लोगों की जान गई थी। इसके बाद परियोजना के अन्य टॉवरों की सुरक्षा पर भी सवाल उठे।
आइआइटी दिल्ली की ओर से कराए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में सोसायटी के सभी टावरों को रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित किया गया था।
आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 3 सितंबर 2026 के निर्देशों का भी उल्लेख है। कोर्ट ने असुरक्षित टावरों को खाली कराने और परियोजना के पुनर्विकास की प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ाने को कहा था। असुरक्षित घोषित टावरों को 1 जनवरी 2027 तक खाली कराने और पुनर्विकास का काम 31 मार्च 2027 तक या उससे पहले शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।ॉ
पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन जरूरी
नगर निगम ने ध्वस्तीकरण से पहले बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था करने और आसपास की इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। मलबा प्रबंधन की मंजूरी, पंजीकरण और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन भी जरूरी होगा।
आदेश का पालन न होने पर नगर निगम खुद कार्रवाई कर सकता है और उसका खर्च बिल्डर से वसूल सकता है। परियोजना के टावर-डी, ई, एफ, जी और एच असुरक्षित घोषित होने के बाद पहले ही गिराए जा चुके हैं। टावर-ए, बी और सी अभी बाकी हैं।
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