धरातल पर मेट्रो, फाइलों में बंद बस अड्डा प्रोजेक्ट; 11 साल से टीन शेड में चल रहा गुरुग्राम का स्टैंड
गुरुग्राम में मेट्रो विस्तार का काम शुरू हो गया है, लेकिन 11 साल से बस अड्डा परियोजना अधर में है। ...और पढ़ें

गुरुग्राम में मेट्रो प्रोजेक्ट के बाद बस अड्डा बनने का कर रहे इंतजार। (AI Generated Image)
HighLights
गुरुग्राम बस अड्डा परियोजना 11 साल से लंबित है।
मेट्रो विस्तार के बावजूद सार्वजनिक परिवहन की कमी।
40 लाख यात्री बसों की कमी से परेशान हैं।
संदीप रतन, गुुरुग्राम। साइबर सिटी में मेट्रो विस्तार प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है, लेकिन 11 साल बीतने के बाद भी शहर के 40 लाख लोग बस अड्डा बनने का इंतजार कर रहे हैं। कई बार डेडलाइन तय की गई, लेकिन बार-बार निर्धारित स्थान बदलने के कारण प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा।
अंत में द्वारका एक्सप्रेस वे किनारे गांव सीही की जमीन पर प्रोजेक्ट के लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। वर्ष 2015 में पीडब्ल्यूडी ने शहर के रोडवेज बस अड्डा को जर्जर घोषित किया था।
बस अड्डे की जर्जर बिल्डिंग को तोड़ा जा चुका है। टीन शेड के नीचे पुराना बस अड्डा चल रहा है और प्रचंड गर्मी व सर्दी तथा वर्षा के दिनों में यात्रियों को परेशानी होती है।
बसों का भी भारी किल्लत
सिर्फ बस अड्डा ही नहीं बसों की कमी के कारण भी यात्री आटो रिक्शा, ई रिक्शा, कैब और प्राइवेट बसों या अपनी कारों में सफर करने का मजबूर हैं। गुरुग्राम से मानेसर या शहर से उद्योग विहार, साइबर हब, बस अड्डा क्षेत्र में बसें नहीं मिलने के कारण यात्री परेशान हैं।
समय पर बस नहीं मिलने के कारण यात्रियों को मजबूरन कैब, आटो रिक्शा या फिर अपनी कार से सफर करना पड़ रहा है। सभी मेट्रो स्टेशनों से सिटी बसों की कनेक्टिविटी भी नहीं होने के कारण यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कारिडोर, बस स्टैंड निर्माण, रोडवेज और सिटी बसों के रूटों की संख्या बढ़ाने सहित कई ऐसी योजनाए हैं, जिन पर काम ही नहीं हुआ। सीही में प्रस्तावित बस अड्डा प्रोजेक्ट को लेकर रोडवेज जीएम गायत्री अहलावत को फाेन किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।
शहर परिवहन विश्लेषण रिपोर्ट
- 40 लाख शहर की कुल आबादी
- 150 लो फ्लोर सिटी बसें (सक्रिय)
- 4.5 लाख+ कैब और निजी कारें
- 32,000 ऑटो रिक्शा
- 2.5 लाख दैनिक यात्री (City Bus/Roadways)
- 220 रोडवेज बसें (आवागमन)
- 200 आगामी इलेक्ट्रिक बसें (प्रस्तावित)
मेट्राे का काम शुरू, सुविधा के लिए इंतजार
मेट्रो की येलो लाइन के जरिए गुरुग्राम दिल्ली से कनेक्ट है। प्रतिदिन हजाराें नौकरीपेशा लोग नाेएडा, गाजियाबाद, दिल्ली से गुरुग्राम तक सफर करते हैं। गुरुग्राम में मिलेनियम सिटी सेंटर इसका अंतिम स्टेशन है। पुराने शहर में मेट्रो रूट निर्धारित हो गया है। मेट्रो लाइन का निर्माण कार्य तो शुरू हो गया है, लेकिन सुविधा के लिए अभी इंतजार करना होगा।
150 बसें नाकाफी
शहर में गुरुग्राम मेट्रोपालिटन सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) की 150 सिटी बसें चल रही हैं और इनमें प्रतिदिन लगभग 50 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। फिलहाल जीएमसीबीएल की लो फ्लोर सीएनजी आधारित बसें चलाई जा रही है।
गुरुग्राम शहर के अलावा सिटी बसाें का संचालन सोहना और मानेसर सहित आसपास के कस्बों तक किया जा रहा है। साइबर सिटी में 100 इलेक्ट्रिक बसें भी 32 रूटों पर चलाने की योजना है। लेकिन पिछले डेढ वर्ष से इन बसों का इंतजार हो रहा है।
नए रूटों का नहीं हुआ सर्वे
शहर की आबादी तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में नए रूटों का सर्वे कर बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। जीएमसीबीएल 25 मार्गों पर सिटी बसें चलाई जा रही हैं। पीक आवर्स के दौरान ज्यादा बसें चलाने की आवश्यकता है। शहर में 500 से ज्यादा बस क्यू शेल्टर हैं।
2031 तक 1025 बसों की होगी जरूरत
जीएमडीए की मोबिलिटी डिवीजन के एक सर्वे के अनुसार बढ़ती जनसंख्या को पर्याप्त बस सेवा प्रदान करने के लिए वर्ष 2031 तक गुरुग्राम में 1025 बसों की आवश्यकता होगी।
भविष्य में बस सेवाओं की निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए, बस डिपो और टर्मिनल जैसे पर्याप्त बुनियादी ढांचे की स्थापना भी की जानी है। सेक्टर 103, सेक्टर 65 और सेक्टर 48 में सिटी बस डिपो बनेंगे।
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गुरुग्राम में आइटी, उद्योग, रियल एस्टेट और रोजगार के अवसरों ने यहां आबादी और वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा किया है। इसका सीधा असर सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव, वायु प्रदूषण और नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ऐसे में समय की सबसे बड़ी जरूरत है कि शहर में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को मजबूती दी जाए। यदि सरकारी और सिटी बसों की संख्या बढ़ाई जाए, उनके रूट को विस्तार दिया जाए और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित किया जाए, तो बड़ी आबादी को निजी वाहनों से हटाकर सार्वजनिक परिवहन की ओर मोड़ा जा सकता है। इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को प्राथमिकता देकर न केवल ईंधन खर्च घटाया जा सकता है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाई जा सकती है। इससे शहर का एक्यूआइ सुधारने में मदद मिलेगी।
