विरोध के बीच गुरुग्राम के बाबा बालकनाथ मंदिर पर चला बुलडोजर, पांच मंदिर-गोशाला और समाधि ध्वस्त
गुरुग्राम के आदमपुर झाड़सा स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर परिसर में प्रशासन ने भारी विरोध के बीच तोड़फोड़ की कार्रवाई की। ...और पढ़ें
HighLights
आदमपुर झाड़सा के बाबा बालकनाथ मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की कार्रवाई हुई।
पांच मंदिर, गोशाला और समाधि सहित कई निर्माण ध्वस्त किए गए।
ग्रामीणों, साधु-संतों और विधायक ने कार्रवाई का कड़ा विरोध किया।
संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। गांव आदमपुर झाड़सा (सेक्टर-50) स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर परिसर में शुक्रवार को प्रशासन की तोड़फोड़ कार्रवाई का ग्रामीणों और साधु-संतों ने विरोध किया।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब 16 घंटे तक चली कार्रवाई में शिव मंदिर को छोड़कर परिसर में बने पांच अन्य मंदिर, गोशाला और समाधि समेत कई निर्माण ध्वस्त कर दिए गए। मंदिर में स्थापित मूर्तियों को दूसरे मंदिरों में भेज दिया गया, जबकि गोशाला में रखी करीब 35 गाय और बछड़ों को कार्टरपुरी स्थित गोशाला में भेजा गया।
कार्रवाई के विरोध में राजस्थान के तिजारा से विधायक महंत बालकनाथ योगी भी मौके पर पहुंचे।
प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मंदिर तक पहुंचने वाले सभी रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया था। विरोध की आशंका को देखते हुए कई थानों की पुलिस तैनात की गई थी।
कार्रवाई पूरी होने के बाद खाली कराए गए हिस्से की चारदीवारी का काम भी शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, गुरुवार देर शाम गुरुग्राम पुलिस के करीब 25 जवान सिविल ड्रेस में मंदिर परिसर पहुंचे। पुलिस ने मंदिर के महंत विजयनाथ महाराज समेत करीब 10 लोगों को हिरासत में ले लिया।
इसके बाद रात में एचएसवीपी, नगर निगम और नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अधिकारी करीब 15 बुलडोजर लेकर मंदिर परिसर पहुंचे। तोड़फोड़ दस्ते की अगुवाई एचएसवीपी की संपदा अधिकारी अनुपमा मलिक कर रही थीं। मौके पर सहायक पुलिस आयुक्त अमित कुमार और विष्णु प्रसाद भी मौजूद रहे।
पुलिस ने मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोक दी। देर रात करीब तीन बजे तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू हुई। जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे और मंदिर परिसर में जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
साधु-संतों ने बैरिकेड के सामने दिया धरना
कार्रवाई से नाराज साधु-संतों ने पुलिस बैरिकेड के सामने बैठकर धरना दिया। उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की कार्रवाई को गलत बताते हुए इसका विरोध किया। उनका कहना था कि मंदिर परिसर में कार्रवाई कर प्रशासन ने धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाया है। कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद तिजारा विधायक महंत बालकनाथ योगी भी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग भी मौके पर जुटे रहे।
27 जुलाई को भी कार्रवाई का प्रयास हुआ था
ग्रामीणों ने बताया कि 27 जुलाई को भी एचएसवीपी के अधिकारी मंदिर परिसर में तोड़फोड़ करने पहुंचे थे। उस समय ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इसके बाद 31 अगस्त को एचएसवीपी की संपदा अधिकारी ने अधिग्रहित जमीन पर भूमाफिया द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत पुलिस उपायुक्त, पूर्व को दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
रविवार को पंचायत में तय होगी आगे की रणनीति
तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद 11 सदस्यीय समिति गठित की गई, जिसने मंदिर स्थल का दौरा किया। समिति में 360 गांवों के चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान, वजीराबाद के पूर्व सरपंच सूबे सिंह बोहरा, प्रदीप जेलदार, संदीप ठाकरान, सुरेंद्र ठाकरान, भगत ठाकरान, सोनू ठाकरान और नवीन समेत अन्य लोग शामिल हैं।
चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान ने कहा कि प्रशासन ने ग्रामीणों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह 10 बजे मंदिर स्थल पर पंचायत बुलाई गई है। पंचायत में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति तय होगी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मीडिया कर्मियों को भी बैरिकेडिंग के पास रोक दिया।
दो मीडियाकर्मी किसी तरह मंदिर परिसर के अंदर पहुंचे। आरोप है कि वहां एचएसवीपी और नगर निगम के अधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी द्वारा मीडिया कर्मियों का मोबाइल फोन छीनने और उन्हें बाहर जाने से रोकने का भी आरोप लगाया गया। मामले में संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
