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गुरुग्राम में दमघोंटू हुई हवा, ग्रेप-2 के बावजूद खुलेआम उड़ रही नियमों की धज्जियां; 364 पहुंचा AQI

Published: Fri, 06 Nov 2026 01:10 PM (IST)

गुरुग्राम और मानेसर की हवा 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई है, गुरुग्राम का एक्यूआइ 364 दर्ज किया गया। ग्रेप-2 ...और पढ़ें

गुरुग्राम में उड़ती धूल और हवा में घुला पीएम-2.5।

गुरुग्राम में उड़ती धूल और हवा में घुला पीएम-2.5।

HighLights

  1. गुरुग्राम का एक्यूआइ 364, मानेसर का 320 दर्ज।

  2. ग्रेप-2 के बावजूद निर्माण कार्यों में लापरवाही जारी।

  3. तंदूर, वाहन, कूड़ा जलाने से प्रदूषण में वृद्धि।

संदीप रतन, गुरुग्राम। शहर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है, लेकिन प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की लापरवाही लोगों की सांसों पर भारी पड़ रही है। ग्रेप-2 लागू होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

शुक्रवार सुबह आठ बजे गुरुग्राम का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 364 और मानेसर का 320 दर्ज किया गया। दोनों शहरों की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। सुबह और शाम के समय प्रदूषण का असर ज्यादा महसूस हो रहा है।

लोगों को हो रही सांस लेने में परेशानी

लोगों को आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो रही है। ग्रेप-2 के तहत धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय अनिवार्य हैं। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में निर्माण कार्य जारी हैं।

सड़कों और अन्य स्थानों पर इंटरनेट केबल बिछाने के लिए खोदाई की जा रही है। निर्माण सामग्री खुले में पड़ी है। वहीं,टूटी और उखड़ी सड़कों की समस्या बढ़ गई है। सड़कों की मैकेनिकल सफाई के लिए लगाई गई मशीनें खराब पड़ी हैं। कुल 22 मशीनों में से सिर्फ सात मशीनें ही सड़कों की सफाई कर रही हैं।

तंदूर और वाहनों का धुआं भी जिम्मेदार

  • ढाबों और रेस्टोरेंट के तंदूर में अब भी कोयले का इस्तेमाल।
  • सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या और धुआं भी प्रदूषण बढ़ा रहा।
  • खुले में कूड़ा जलाने और निर्माण मलबे के उचित निस्तारण नहीं होने से स्थिति बिगड़ रही।

क्या हैं पीएम-2.5 और पीएम-10

पीएम-2.5 हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर या इससे छोटे कण होते हैं। ये सांस के जरिये फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। वहीं, पीएम-10 आकार में 10 माइक्रोमीटर या इससे छोटे कण होते हैं। ये नाक और श्वसन तंत्र में जमा होकर सांस संबंधी परेशानियां बढ़ा सकते हैं।

एक्यूआइ का स्तर और स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • | एक्यूआई | श्रेणी | स्वास्थ्य पर प्रभाव |
  • | 0-50 | अच्छा | स्वास्थ्य पर न्यूनतम प्रभाव |
  • | 51-100 | संतोषजनक | संवेदनशील लोगों को हल्की परेशानी |
  • | 101-200 | मध्यम | फेफड़ों और अस्थमा के मरीजों को परेशानी |
  • | 201-300 | खराब | सांस और हृदय रोगियों को परेशानी |
  • | 301-400 | बेहद खराब | लंबे समय तक रहने पर सांस संबंधी बीमारियों का खतरा |
  • | 401-500 | गंभीर | स्वस्थ लोगों पर भी गंभीर असर |

दीवाली का मौका, सड़कों पर मलबा और कूड़ा

दीवाली के त्योहार के बाद शहर की कई सड़कों और खाली प्लाटों में कूड़ा और निर्माण मलबा पड़ा हुआ है। कई जगह कूड़े में आग लगाई जा रही है, जिससे जहरीला धुआं वातावरण में फैल रहा है। वहीं, खुले में पड़े मलबे से वाहनों के गुजरने पर धूल उड़ती है।

'प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ग्रेप के नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।'

-प्रवीण कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, गुरुग्राम दक्षिण

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