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गुरुग्राम की 15 सड़कों पर लागू होगा 'पुणे मॉडल', गूगल मैप्स के डेटा से कैसे खत्म होगा ट्रैफिक जाम?

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:43 PM (IST)

गुरुग्राम में यातायात जाम की समस्या के समाधान के लिए जीएमडीए पुणे के ट्रैफिक मॉनिटरिंग मॉडल को अपनाने पर विचार ...और पढ़ें

गुरुग्राम को जाम से निजात दिलाएगा पुणे मॉडल। फोटो: आर्काइव

गुरुग्राम को जाम से निजात दिलाएगा पुणे मॉडल। फोटो: आर्काइव

आदित्य राज, गुरुग्राम। साइबर सिटी में यातायात जाम की समस्या का समाधान अब केवल चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनात करने तक सीमित नहीं रहेगा।

शहर की सड़कों पर वाहनों की आवाजाही और उनकी रफ्तार के आंकड़ों का विश्लेषण कर जाम के वास्तविक कारणों की पहचान की जाएगी।

इसके लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) पुणे में लागू यातायात निगरानी मॉडल को अपनाने की संभावनाएं तलाश रहा है। खास बात यह है कि इस व्यवस्था के लिए सड़कों पर नए कैमरे, सेंसर लगाने या निर्माण कार्य कराने की जरूरत नहीं होगी।

गूगल मैप्स से मिलने वाले वाहनों की गति के सामूहिक आंकड़ों के आधार पर ही यातायात की स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा।

पहले चरण में 10 से 15 प्वॉइंट चुने जाएंगे

पहले चरण में गुरुग्राम के 10 से 15 सबसे व्यस्त और नियमित रूप से जाम से प्रभावित रहने वाले चौराहों तथा मार्गों का चयन किया जाएगा। जीएमडीए और यातायात पुलिस मिलकर इन स्थानों का विश्लेषण करेंगे।

इसके बाद जाम के कारणों की पहचान कर तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित समस्या के समाधान की जिम्मेदारी किस विभाग की है।

इस प्रणाली की खासियत यह है कि यह केवल जाम की लोकेशन नहीं बताती, बल्कि उसके पीछे के कारणों को भी सामने लाती है। लगातार 20 से 30 दिनों के आंकड़ों का अध्ययन कर पता लगाया जा सकता है कि जाम अस्थायी है या किसी स्थायी खामी के कारण लग रहा है।

कहीं बस स्टैंड पर बसों के रुकने से यातायात प्रभावित हो रहा है तो कहीं अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, निर्माण कार्य अथवा जलभराव वाहनों की रफ्तार रोक रहा है। इससे सुधार के लिए सही स्थान और प्राथमिकता तय करना आसान होगा।

यातायात प्रबंधन से व्यवस्था में होगा सुधार

पूर्व सड़क सुरक्षा अधिकारी व वरिष्ठ अधिवक्ता आरएल शर्मा का कहना है कि पुणे मॉडल की तरह आंकड़ों के आधार पर यातायात प्रबंधन करने से व्यवस्था में सुधार होगा।

इससे केवल जाम खुलवाने के बजाय उसकी वजह दूर करने पर काम किया जा सकेगा। यातायात पुलिस और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से स्थायी समाधान की दिशा में काम करना संभव होगा।

आवश्यकता है कि ईमानदारी से योजना के ऊपर काम करने की। साथ ही किसी भी योजना के ऊपर तत्काल प्रभाव से गुरुग्राम में काम करने की आवश्यकता है।

उपायुक्त ने ही दिया पुणे मॉडल का सुझाव

यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए उपायुक्त उत्तम सिंह ने जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा को पत्र लिखकर पुणे मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है।

पुणे में ट्रैफिक्योर नाम से संचालित इस प्रणाली के माध्यम से जनवरी 2026 से 964 प्रमुख सड़कों की निगरानी की जा रही है। इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही का ब्योरा प्रत्येक दो मिनट में अपडेट होता है।

इससे यातायात की स्थिति का व्यापक आकलन संभव हुआ है। गुरुग्राम में भी इस तरह की व्यवस्था लागू होने से जाम की समस्या का समाधान आंकड़ों के आधार पर किया जा सकेगा।

पुणे मॉडल की पांच प्रमुख खासियतें

  • नए कैमरों की जरूरत नहीं : गूगल मैप्स से मिलने वाले वाहनों की गति के सामूहिक आंकड़ों का विश्लेषण।
  • हर दो मिनट में अपडेट : सड़कों पर वाहनों की आवाजाही और रफ्तार का ताजा ब्योरा।
  • जाम के मूल कारणों की पहचान : 20 से 30 दिनों के आंकड़ों से स्थायी और अस्थायी जाम में अंतर।
  • हॉटस्पॉट पर फोकस : पुणे में पाया गया कि लगभग पांच प्रतिशत सड़कें ही आधे से अधिक जाम के लिए जिम्मेदार थीं।
  • चौराहों के विश्लेषण और सुधार के बाद औसत वाहन गति 20 से बढ़कर 26.8 किलोमीटर प्रति घंटा हुई।

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