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करोड़ों के टेंडर के बावजूद गुरुग्राम में कूड़े का अंबार, सफाई व्यवस्था बदहाल

Published: Fri, 20 Mar 2026 05:19 PM (IST)

गुरुग्राम में सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर कूड़े के ढेर से घिरा है। नगर निगम ...और पढ़ें

सदर बाजार में कूड़े का ढेर। जागरण

सदर बाजार में कूड़े का ढेर। जागरण


जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। साइबर सिटी गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था कागजों में करोड़ों रुपये के टेंडरों से चमकती दिखाई दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। नगर निगम पिछले एक वर्ष में केवल अस्थायी सफाई टेंडरों पर ही करीब 250 से 300 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, इसके बावजूद शहर के कई सेक्टरों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हैं।

दूसरी ओर घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी टेंडर प्रक्रिया में उलझी हुई है, जिससे सफाई व्यवस्था और प्रभावित हो रही है। नगर निगम द्वारा बार-बार अस्थायी टेंडर जारी कर सफाई कार्य करवाने का दावा किया जा रहा है। कभी रोड स्वीपिंग के नाम पर, कभी जीवीपी प्वाइंट (कचरा डंपिंग स्थल) की सफाई के लिए और कभी घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए एजेंसियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।

इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में हफ्तों तक झाड़ू नहीं लगती और कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां भी समय पर नहीं पहुंचतीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टेंडर की शर्तों के अनुसार न तो पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए जाते हैं और न ही मशीनरी का उपयोग होता है।

इन क्षेत्राें में सड़कों पर फैला कूड़ा

सफाई व्यवस्था का सबसे खराब असर शहर के कई सेक्टरों और कालोनियों में देखने को मिल रहा है। सेक्टर- 21, 22, 23, 45, 46, 55, 56, 22, 21, झाड़सा, जलवायु विहार, डूंडाहेड़ा, सीही, खेड़कीदौला, न्यू कालोनी और सेक्टर-5 जैसे इलाकों में सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई जगहों पर न तो झाड़ू लगाने वाले कर्मचारी दिखाई देते हैं और न ही कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से पहुंच रही हैं।

अस्थायी टेंडरों पर उठ रहे सवाल

स्थायी समाधान की बजाय बार-बार अस्थायी टेंडर जारी किए जाने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। हर महीने लाखों-करोड़ों रुपये के बिल पास हो रहे हैं, लेकिन निगरानी के अभाव में एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं निभा रही हैं। कई बार उन्हीं पुरानी एजेंसियों को काम मिलने से भी संदेह की स्थिति बन रही है।

घर-घर कूड़ा उठान का टेंडर फिर लटका

इधर शहर में घर-घर से कूड़ा उठाने की नई व्यवस्था भी टेंडर प्रक्रिया में अटक गई है। नगर निगम ने शहर को दो क्लस्टर में बांटकर टेंडर जारी किए थे, लेकिन दोनों क्लस्टरों में केवल एक-एक एजेंसी ने ही आवेदन किया। नियमों के अनुसार टेंडर खोलने के लिए कम से कम तीन प्रतिस्पर्धी कंपनियों का होना जरूरी है।

ऐसे में निगम ने आवेदन की अंतिम तिथि 13 मार्च से बढ़ाकर 20 मार्च कर दी है। यह टेंडर प्रक्रिया फरवरी से ही लगातार खिंच रही है। पहले नियम और शर्तों में बदलाव के कारण इसकी अवधि 23 फरवरी से बढ़ाकर 13 मार्च की गई थी, लेकिन पर्याप्त आवेदन न मिलने के कारण अब इसे फिर आगे बढ़ाना पड़ा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि कड़े नियमों और पारदर्शिता की शर्तों के कारण एजेंसियां कम संख्या में आवेदन कर रही हैं।

घरों से कूड़ा उठाने के लिए एजेंसियों को काम सौंपा गया हैं। लापरवाही मिली तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।दोनों क्लस्टर में एक-एक एजेंसी आने के कारण टेंडर की समय सीमा 20 मार्च तक बढ़ाई गई है।

-सुंदर श्योराण, एक्सईएन नगर निगम, गुरुग्राम

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