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डीएपी खाद के लिए दर-दर भटक रहे किसान, फरुखनगर में दुकानदारों की मनमानी; खाद के साथ थमा रहे जबरन दूसरा सामान

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:40 PM (IST)

फरुखनगर में रबी फसलों की बुवाई के दौरान डीएपी खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। दुकानदार खाद के साथ अन्य कृषि सामग्री खरीदने की शर्त रख रहे हैं।

डीएपी की किल्लत से किसानों की बढ़ी परेशानी।

डीएपी की किल्लत से किसानों की बढ़ी परेशानी।

HighLights

  1. फरुखनगर में रबी बुवाई के लिए डीएपी खाद की कमी।

  2. दुकानदार खाद के साथ अन्य सामग्री खरीदने को कर रहे मजबूर।

  3. किसानों ने पर्याप्त आपूर्ति और दुकानदारों पर कार्रवाई की मांग की।

संवाद सहयोगी, फरुखनगर। रबी फसलों की बुवाई के सीजन में डीएपी खाद की किल्लत किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। फरुखनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होने से किसान दुकानों के चक्कर काट रहे हैं।

किसानों का आरोप है कि कुछ दुकानदार डीएपी के साथ अन्य कृषि सामग्री खरीदने की शर्त रख रहे हैं। हरकेश यादव, सुरेंद्र कुमार, सतपाल और विक्की के मुताबिक, अतिरिक्त सामग्री लिए बिना दुकानदार खाद देने से मना कर रहे हैं।

किसानों को गेहूं और सरसों की बुवाई के लिए डीएपी की जरूरत है, लेकिन समय पर खाद नहीं मिलने से खेती का काम प्रभावित होने की आशंका है। खाद लेने दुकानों पर पहुंचने वाले कई किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

अनावश्यक बोझ पड़ रहा है

किसानों का कहना है कि खाद के साथ दूसरी सामग्री खरीदने की शर्त से उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों ने खाद की उपलब्धता और दुकानदारों की कथित मनमानी को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

किसानों ने डीएपी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और दुकानों की निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खाद के साथ अन्य सामग्री खरीदने की शर्त की जांच कर दोषी दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। समय पर खाद नहीं मिली तो बुवाई के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

खाद लेने दुकानों पर जाने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। दुकानदार डीएपी के साथ अन्य सामग्री लेने की शर्त रख रहे हैं, जिससे मजबूरी में अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
-हरकेश यादव

खेती पहले ही महंगी हो चुकी है। खाद, बीज, डीजल और सिंचाई पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। खाद के साथ जबरन अन्य सामान खरीदना किसानों के साथ अन्याय है। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
-महेंद्र शर्मा

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