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    ओवरी फेल होने पर भी बन सकती हैं मा

    By Edited By:
    Updated: Wed, 18 Feb 2015 07:50 PM (IST)

    जागरण संवाददाता, गुड़गांव : बदलती जीवन शैली और जेनेटिक कारणों से भी अब प्रीमेच्योर ओवरी फेल (पीओएफ) ह

    जागरण संवाददाता, गुड़गांव : बदलती जीवन शैली और जेनेटिक कारणों से भी अब प्रीमेच्योर ओवरी फेल (पीओएफ) होने की समस्या आ रही है। इसमें एस्ट्रोजेन हारमोन और अंडे बनने बंद हो जाते हैं। इस दौरान दूसरी तरह की बीमारिया भी हो सकती हैं।

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    इन विट्रो फर्टिलिटी (आइवीएफ ) विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरी फेल होने पर कोई महिला मा नहीं बन सकती है, लेकिन अब विशेषज्ञों ने इसका इलाज भी खोज लिया है। बोर्न हॉल क्लीनिक की सीनियर आइवीएफ विशेषज्ञ डा. मोनिका सचदेव का कहना है कि पीओएफ यानी ओवरी फेल होने की समस्या अब कम उम्र की लड़कियों में भी देखी जा रही है। बदलती जीवनशैली की वजह से शरीर में कई बदलाव आ रहे हैं। इसलिए उम्र से पहले ओवरीज फेल होने के कई मामले देखने को मिल रहे हैं। इसके शुरुआती स्टेज का पता चलने पर ही अगर इलाज शुरू कर दिया जाए तो मा बन सकती हैं। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा एस्ट्रोजेन हारमोन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इस कंडीशन में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों में परेशानी) से बचाने के लिए विटामिन-डी और कैल्शियम के सप्लिमेंट भी दिए जाते हैं।

    डा. मोनिका सचदेव का कहना है कि कुछ स्थिति में पीओएफ से पीड़ित महिलाओं के लिए आइवीएफ तकनीक भी लाभदायक हो सकती है। इस तकनीक में महिला में कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है। किसी महिला के अंडाशय से अंडे को अलग कर उसे द्रव माध्यम में शुक्राणुओं से निषेचित किया जाता है। इसके बाद निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में रखा जाता है।

    विशेषजों का कहना है कि 18 से 20 साल की लड़किया भी इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं। करियर के कारण जो महिलाएं 30 की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी के बारे में सोचती हैं, उन्हें यह समस्या हो सकती है। कई बार उम्र से पहले ओवरी के फेल होने को मीनोपॉज से जोड़ दिया जाता है, लेकिन ये दोनों कंडीशन एक दूसरे से अलग हैं। किसी महिला की ओवरी फेल होती है, तो उसे अनियमित माहवारी हो सकती है और वह गर्भधारण भी कर सकती है। वहीं उम्र से पहले मीनोपॉज का अर्थ है कि माहवारी का स्थायी तौर पर रुक जाना और इसके बाद गर्भवती होना मुमकिन नहीं हो पाता।

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    शराब और धूमपान से दूर रहें

    हमारी बदल रही लाइफ स्टाइल इस परेशानी के पीछे बड़ी वजह है। इसके अलावा थायरॉयड व ऑटो इम्यून बीमारिया, रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी होना भी इसके मुख्य कारण हैं। कई बार यह अनुवाशिक भी होता है। जरूरी है कि लाइफ स्टाइल को कंट्रोल किया जाए। स्मोकिंग और शराब पीने से दूर रहें। अपने वजन को कंट्रोल करें। रेग्युलर एक्सरसाइज करें। अगर कोई बीमारी हो तो सही समय पर उपचार कराएं। अनियमित माहवारी, बहुत ज्यादा गरमी लगना व पसीना आने की शिकायत हो तो तुरंत जाच कराएं।