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    संयुक्त मोर्चा ट्रैक्टर परेड में शामिल होगी किसान सभा, सीटू व खेत मजदूर यूनियन; इन मांगों को लेकर किया जाएगा प्रदर्शन

    Updated: Mon, 20 Jan 2025 03:42 PM (IST)

    26 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी। इसमें किसान सभा सीटू और खेत-मजदूर यूनियन भी शामिल होंगे। किसान नेताओं ने केंद्र सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य कर्ज माफी और बिजली बिल वापस लेने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं इन सभी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा।

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    26 जनवरी को निकाली जाएगी ट्रैक्टर रैली।

    जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 जनवरी को देशभर में जिला व तहसील स्तर पर ट्रैक्टर परेड करने का फैसला लिया गया है। इसी के मद्देनजर जिले के सभी तहसीलों में ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल परेड की जाएगी। किसान सभा, सीटू व खेत-मजदूर यूनियन की संयुक्त मीटिंग में यह फैसला किया गया कि एसकेएम की इस परेड में पूरे जोर शोर से शिरकत की जाएगी।

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    संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जगतार सिंह ने बताया कि पूरे जिले भर के तमाम किसान मजदूर संगठन, ट्रेड यूनियनें 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाली इस परेड में अपने ट्रैक्टरों, मोटरसाइकिलों, गाड़ी, स्कूटी, आदि वाहनों के साथ शामिल होंगे।

    यह ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल परेड जिले की सभी तहसीलों रतिया, भट्टू, भूना, जाखल, कुलां, टोहाना, फतेहाबाद में किसानों मजदूरों के द्वारा निकाली जाएगी। मीटिंग में मास्टर राजेंद्र सिंह बाटू, मुंशीराम नाढोडी, जोगिंदर सिंह भ्याना, दलबीर सिंह आजाद आदि किसान, मजदूर नेता शामिल रहे।

    ये हैं किसान संगठनों की मांगे

    पिछले 50 दिनों से भी अधिक समय से आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से केंद्र सरकार बातचीत करे।

    जगजीत सिंह डल्लेवाल की जान बचाई जाए।

    केंद्र सरकार किसानों की सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की खरीद को कानूनी गारंटी दे।

    नया बिजली विधेयक वापस लिया जाए और स्मार्ट मीटर लगाने की योजना रद्द की जाए।

    केंद्र सरकार जो नया कृषि मंडी करण ड्राफ्ट लेकर आई है उसको तुरंत वापस लिया जाए।

    ये बोले किसान नेता

    किसान नेता विष्णुदत्त ने कहा कि 4 साल पहले दिल्ली के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के समय केंद्र सरकार ने सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, किसानों मजदूरों का कर्ज माफी सुमित सभी मुद्दों पर बातचीत करते हुए आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया था। परंतु बाद में केंद्र सरकार अपने इस वायदे से मुकर गई।

    खेत मजदूर यूनियन के राज्य के नेता रामकुमार बहबलपुरिया ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के द्वारा गरीब लोगों को मिलने वाला सस्ता अनाज राशन डिपो के माध्यम से तभी मुहैया हो पता है जब सरकारी गोदामों में भंडारण व्यवस्था है। यदि सरकार सभी सरकारी मंदिरों का निजीकरण कर देती है तो देश का सारा अनाज प्राइवेट मंडियों के माध्यम से प्राइवेट कंपनियों के गोदाम में जाएगा।

    सीटू के जिला प्रधान ओमप्रकाश अनेजा ने कहा कि देश भर की ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त मोर्चे की 26 जनवरी की परेड को समर्थन दिया है। मजदूरों के लिए 12 घंटे के काम का कानून पहले बनाया जा चुका है। देश के तमाम स्कीम वर्कर्स को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है। अपने रोजी-रोटी के संघर्ष के लिए वे लगातार संघर्षरत रहते हैं।

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