पूर्व सीएम भजनलाल का पैतृक गांव था खजूरी
संवाद सूत्र, गोरखपुर : फतेहाबाद मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव खजूरी जांटी किसी परिचय क
संवाद सूत्र, गोरखपुर : फतेहाबाद मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव खजूरी जांटी किसी परिचय का मोहताज नहीं है। दूध के कारोबार के लिए यह मशहूर गांव है। आसपास के क्षेत्रों में माना जाता है कि इस गांव में सबसे अधिक दूध उत्पादन होता है। वहीं चारों तरफ नहरों का जाल बिछा होने के कारण यहां पर फसलें भी अन्य गांवों की अपेक्षा अधिक होती है। यह वही गांव है जहां स्वर्गीय भजनलाल के परिवार को पाकिस्तान से आने पर पनाह मिली थी। जब भजन लाल के परिवार पाकिस्तान को छोड़कर आये तो सबसे पहले इसी गांव में बसे थे। इसी गांव के लोगों ने भजनलाल के परिवार को अपनी रोजी रोटी चलाने के लिए 15 एकड़ जमीन दान में दी थी। गांव मोहम्मदपुर रोही पास होने के कारण उन्होंने अपनी रिहायस भी इसी गांव में बना ली।
ऐसे पड़ा नाम खजूरी जांटी
ग्रामीण महेंद्र ढाका बताते हैं कि गांव खजूरी सबसे ऊंचा गांव होता था। इसी ऊंचे टीले पर जाट समुदाय के दो परिवार आकर बसे थे। उस समय यहां पर जांटी पेड़ हुआ करते थे। तभी से इस गांव का नाम खजूरी जांटी पड़ गया।
बिश्नोई जाति के परिवार अधिक
इस गांव में बिश्नोई समाज के लोगों की संख्या अधिक है। गांव में 650 घर है। इसमें 450 घर बिश्रोई समाज के लोगों के है। इसके अलावा अन्य अन्य जातियों के परिवार भी निवास करते हैं, लेकिन उन लोगों की संख्या कम है। गांव की कुल जनसंख्या 4500 के करीब है। गांव में 2350 वोटर है। इसमें 1600 पुरुष व 850 महिला वोटर है।
यह है इतिहास
स्थानीय लोग बताते हैं कि बिश्नोई जाति के लोग राजस्थान से आकर खजूरीजांटी में बसे थे। बताया जाता है कि बिश्नोई जाति में मांझू गोत्र के परिवार राजस्थान के हिम्मटसर से आकर बसे, ढ़ाका बिश्नोई लोहट से आकर बसे थे। कालीरांवण गोत्र व सहारण बिश्नोई भोजा राजस्थान से आकर यहा बसे हैं। गांव करीब 300 वर्ष पहले बसा था। गांव में गुरु जम्मेश्वर मंदिर, गोगा मंदिर, रामदेह मंदिर व हनुमान मंदिर इसकी सुंदरता को चार चांद लगाते हैं। इसके अलावा सुविधाअेां की बात करें तो चार आंगनबाड़ी केंद्र, एक मिडिल स्कूल, आयुर्वेदिक अस्पताल, उपस्वास्थय केन्द्र, पशु अस्पताल व पंचायतघर हैं।
दूध का कारोबार अधिक
इस गांव में दूध का कारोबार अधिक है। गांव में करीब दस से अधिक दूध डेरी है। वहीं हर घर में तीन से चार भैंस है। यह लोग दूध डेरी में बेचते है। इन ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय पशु पालन ही है। गांव में 15 सरकारी कर्मचारी है। एक बीएसएफ में, गिरधारी लाल टैक्सेशन में इंस्पेक्टर और राम¨सह ईटीओ एक्साईज इंस्पेक्टर है।
भजनलाल राज में गांव में हुए सबसे अधिक विकास कार्य
ग्रामीणों की माने तो भजन लाल का राज था, तब गांव में विकास की लहर दौड़ गई थी। उनकी सरकार में यहां खूब काम हुए। यहां के लोगों के निजी कार्य भी खूब होते थे, लेकिन जब से उनका राज गया तो गांव की उपेक्षा भी होने लगी। इस गांव की खुशहाली की वजह है कि यहां पानी की कमी नहीं है। गांव खजूरी के चारों तरफ नहरें गुजरती हैं। इस कारण गांव में पानी की कोई कमी नहीं है। इस गांव में सबसे अधिक गेहूं व कपास की फसल अधिक होती है। वहीं कुछ किसान धान की भी खेती करते हैं।
ये बने गांव में सरपंच
गांव में सबसे पहले बीरबल मांझू के सिर सरपंच का ताज सजा था। फिर रूपचंद मांझू, प्रताप सहारण, खेरू मांझू, दलीप मांझू, रामकुमार मांझू, रिछपाल मांझू, पृथ्वी ¨सह माझू, गिरधारी मांझू, इंद्राज व पिछले प्लान में अनिता मांझू सरंपच बनकर गांव के विकास में कार्यरत थी।
ये हैं इस गांव की प्रमुख समस्याएं
गांव में तीन जोहड़ हैं लेकिन लोगों ने इस जगह पर अवैध कब्जे करने शुरू कर दिए हैं। पिछले सरपंच ने जोहड़ की जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के प्रयास भी किये लेकिन वो पूरी तरह सफल नहीं हो सके। इसके अलावा गांव की शमशान घाट की जगह भी पूरी तरह ग्रामीणों को नहीं मिल पाई है। किसी भी सरपंच ने इस जगह को निकलवाने की जहमत तक नहीं उठाई। इसके अलावा गांव में एक ही जलघर होने के कारण लोगों को पीने के पानी की समस्या भी अधिक आ रही है।
बस स्टैंड की हो व्यवस्था
गांव में बस स्टैंड की कमी महसूस हो रही है। एक ऐसा बस स्टैंड हो, जहां पीने के पानी व छायां की व्यवस्था हो।
- अजीत ¨सह, ग्रामीण।
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स्कूल बने बारहवीं तक
गांव में केवल आठवीं तक ही स्कूल है। इस कारण लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने में दिक्कत आ रही है। अगर गांव में बारहवीं तक स्कूल बन जाये तो गांव में साक्षरता दर भी बढ़ जाएगी।
- चंद्र कालीरावण, ग्रामीण।
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युवाओं को गांव में मिले रोजगार
युवा पढ़ाई तो कर लेते है। लेकिन उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। इस कारण आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही है। अगर गांव में कोई उद्योग लग जाये तो युवाओं को रोजगार मिलेगा।
- गिरधारी लाल, पूर्व सरपंच।
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एक जलघर का हो निर्माण
गांव में केवल एक ही जलघर है। इस कारण पानी सप्लाई में दिक्कत आ रही है। अगर गांव में एक ओर जलघर बन जाये तो पानी की समस्या भी दूर हो जाएगी।
- हनुमान सूरा, ग्रामीण।
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सार्वजनिक स्थान पर बने शौचालय
ग्रामीणों की मांग कई सालों से रही कि सार्वजनिक स्थान पर शौचालय बने। बस अड्डे पर शौचालय न होने के कारण लोगों को बहुत दिक्कत हो रही है।
- ओमप्रकाश बिश्नोई, ग्रामीण।
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रोडवेज बस नहीं आती
गांव में केवल रोडवेज बस की सेवा एक या दो ही है। इस कारण स्कूल में पढऩे वाले विद्यार्थियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर बस की सेवा अधिक की जाये तो विद्यार्थियों को अधिक फायदा होगा।
- सचिन, छात्र।
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अधिक से अधिक विकास करवाया
गांव में संभव हुआ उससे अधिक विकास कार्य करवाया। पांच सालों तक लोगों ने साथ दिया इसके लिए धन्यवाद। जिस भी ग्रामीण ने सहायता मांगी उसकी सहायत की गई।
- भूतपूर्व सरपंच अनिता बिश्नोई।
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