पौराणिक कथाओं का अनोखा रंग देती है पट्टचित्र कला
हमारा देश बहुरंगी, बहुआयामी विविध पारंपरिक कलाओं से हमेशा से ही समृद्ध रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर गुवाहाटी तक हमको भारतीय संस्कृति और लोक कलाओं के अनेकों रंग देखने को मिल जाएंगे। जीवन की आपाधापी में हम सब अपनी लोक संस्कृति या कहें पुरानी विरासत को भूलते जा रहे हैं।
सुधांशु त्रिपाठी, फरीदाबाद : हमारा देश बहुरंगी, बहुआयामी विविध पारंपरिक कलाओं से हमेशा से ही समृद्ध रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर गुवाहाटी तक हमको भारतीय संस्कृति और लोक कलाओं के अनेकों रंग देखने को मिल जाएंगे। जीवन की आपाधापी में हम सब अपनी लोक संस्कृति या कहें पुरानी विरासत को भूलते जा रहे हैं। मगर लोक कलाओं को बचाने, सहेजने और संवारने के लिए हस्तशिल्पियों ने मन में ठान रखी है। ऐसे ही नेशनल अवार्ड विजेता कलाकार हैं बनमाली महापात्रा, जो फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में ओडिशा से अपनी टीम के साथ आए हुए हैं। मेले के स्टॉल नंबर-1007 पर आकर्षक पट्टचित्र कला की पे¨टग्स और अन्य हस्तशिल्पी कलाकृतियां यहां आए सैलानियों को बरबस लुभा रही हैं।
कलाकार बनमाली महापात्रा बताते हैं कि पट्टचित्र कला के माध्यम से हम नई पीढ़ी को पुरानी लोक संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं की जानकारी देते हैं। वह कहते हैं कि पट्टचित्र पर बनी पौराणिक कथाएं बच्चों को बेहद पसंद आती हैं। भगवान राम, श्रीकृष्ण, और मां दुर्गा की कथाएं असत्य पर सत्य की जीत, अ¨हसा और परोपकार जैसे मानवीय मूल्यों, संस्कारों का पालन करना सिखाती हैं। बस जरूरत है कि हम इसे आने वाली पीढ़ी को साफगोई और बेहद संजीदगी से समझाएं।
क्या है पट्टचित्र कला
पट्टचित्र ओडिशा की पारंपरिक चित्रकला है। इन चित्रों में हिन्दू देवी-देवताओं से जुड़ी पौराणिक कथाओं को विभिन्न रंगों के माध्यम से दर्शाया जाता है। पट्ट यानी कपड़े पर बनाई गई आकर्षक चित्रकारी को पट्टचित्र कला कहा जाता है। क्या है इनकी कीमत
मेले में आए कलाकार बनमाली महापात्रा बताते हैं कि उनके स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े पट्टचित्र और अन्य रंग-बिरंगे आकर्षक हस्तशिल्प 200 रुपये से लेकर 15000 रुपये की कीमत में उपलब्ध हैं। कब-कब मिला है सम्मान
ओडिशा के पट्टचित्र कलाकार बनमाली महापात्रा और उनकी टीम को वर्ष-1981 में राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। इसके इलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों से वर्ष-2014 में शिल्प गुरु अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।