सरोद और तबले की जुगलबंदी ने किया अभिभूत
भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़े वाद्ययंत्रों में वाकई ऐसी जादुई शक्ति है।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़े वाद्ययंत्रों में वाकई ऐसी जादुई शक्ति है, जिसे पारंगत कलाकार बजाते हैं, तो फिर हर कोई संगीत की धुनों में खो जाता है। कुछ ऐसा ही मंगलवार को नजर आया डीएवी पब्लिक स्कूल सेक्टर-14 के महात्मा हंसराज सभागार में, जहां स्पिक मैके की श्रृंखला के तहत आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध सरोद वादक डा. राजीब चक्रवती ने प्राचीन वाद्ययंत्र सरोद की तारों से झंकृत किया। उनका बखूबी साथ दिया तबला वादक पंडित मिथिलेश झा ने।
डीएवी एंग्लो वैदिक के संस्थापक महात्मा हंसराज के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र की मधुर ध्वनि के बीच विद्यालय की सुपरवाइजर रजनी रल्हन, सुमन अरोड़ा, प्रेम लता जुनेजा, संगीत विभागाध्यक्ष डा.अंजू मुंजाल ने कलाकारों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सरोद वादक डा.राजीब चक्रवर्ती ने शुरू में प्रात:कालीन राग जौनपुरी से किया। उन्होंने इसके तहत सबसे पहले आलाप, फिर तीन ताल मध्य लय में गत बजा कर रस माधुरी प्रस्तुत की। गत में विभिन्न प्रकार के तोड़े और फिर झाला बजा कर अपनी प्रतिभा का बखूबी परिचय दिया। तबले पर मिथिलेश झा ने संगत कर वाहवाही लूटी। डा.राजीब चक्रवर्ती के अनुसार जिस प्रकार दो इंसान आपस में बातचीत द्वारा एक दूसरे से संबंध बनाते हैं, उसी तरह दो वाद्य यंत्र भी एक-दूसरे से संपर्क बनाते हुए गाथा कहते हैं। स्पिक मैके की दिल्ली-एनसीआर की समन्वयक सुमिता दत्ता ने शास्त्रीय संगीत के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-21सी, डीएवी बल्लभगढ़, पुलिस लाइन, माडर्न स्कूल के संगीत अध्यापकों व संगीत से जुड़े बच्चों ने भी उपस्थित होकर संगीत का आनंद लिया।
प्रधानाचार्य अनीता गौतम के मार्गदर्शन में कार्यक्रम के सफल आयोजन में देवेंद्र कुमार, बैजनाथ श्रीधर, बबीता, ममता, मोनिका, प्रीति सेठी, पवन खन्ना ने भी सहयोग किया।
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