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    चेहरे के हाव-भाव दर्शकों पर छोड़ते हैं प्रभाव

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 17 May 2022 05:44 PM (IST)

    कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा के सहयोग से कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

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    चेहरे के हाव-भाव दर्शकों पर छोड़ते हैं प्रभाव

    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा के सहयोग से चल रही नाट्य कार्यशाला में बच्चों को अलग-अलग पहलुओं से रंगमंच की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है। कार्यशाला में प्रतिदिन अभ्यास करने वाले बच्चे समापन पर नाटक का मंचन करेंगे। कार्यशाला में बच्चों ने नाटक की तैयारी के लिए चेहरे के हाव-भाव के बारे में सीखा।

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    उन्होंने जाना कि हमारा चेहरा कई तरह के भावों को प्रकट कर सकता है। अगर सही तरीके के भाव चेहरे पर लाए जाएं, तो उसका दर्शकों पर असर होता है। अगर हंसना है, तो हंसी के भाव और रोना है तो उदासी के भाव चेहरे पर लाए जाने आवश्यक है। संयोजक डा.अंकुश शर्मा ने बताया कि रंगमंच एक ऐसी विधा है, जिसमें बच्चे खेल-खेल में अनुशासन, समय का प्रबंधन, टीम वर्क जैसी बातें आसानी से सीख जाते हैं और आगे चलकर यह बातें उनके जीवन के लिए उपयोगी साबित होती हैं। इसी तरह अलग-अलग भावों को समझाते हुए उन्होंने इन भावों को प्रकट करने की कोशिश कराई।

    कार्यशाला में प्रेम शर्मा, यश शर्मा, एकता तिवारी, जानविका गुप्ता, मान्या, अचल शर्मा, दक्ष, अमित, पिकी, प्रतिज्ञा, रिद्धी ग्रोवर, दीपिका, अभिषेक, कौशल, प्रियंका, हेमंत, कमल तथा आकाश भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला में दीपक पुष्पदीप भी सह-निर्देशक के रूप में बच्चों को नाटक मंचन की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।