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    18 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रहीं रिटायर लेबर वेलफेयर कमिश्नर, 40 लाख रुपये अकाउंट में करा लिए ट्रांसफर

    Updated: Sat, 18 Jan 2025 10:50 PM (IST)

    फरीदाबादा की महिला मोनिका ने बताया कि वह केंद्रीय मंत्रालय से कई साल पहले लेबर वेलफेयर कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। बेटी दिल्ली में रहती है। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल अपनी 90 वर्षीय मां के साथ रह रही हैं। 11 नवंबर 2024 को उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। इसके बाद अगले 18 दिनों तक वह बंधक बनी रही।

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    रिटायर लेबर वेलफेयर कमिश्नर से 40 लाख रुपये की ठगी।

    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। हे भगवान, ऐसा किसी के साथ न हो। डिजिटल अरेस्ट के वो 18 दिन कैसे कटे, यह केवल मैं ही जानती हूं। सुबह की नित क्रिया से लेकर रात को सोने तक 432 घंटे कुछ भी प्राइवेसी नहीं थी।

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    18 दिन तक रहा बुरा हाल

    बुजुर्ग मां से बात करने से लेकर घर में हर आहट की जानकारी देनी होती थी। उन दिनों को याद करती हूं तो सिहर उठती हूं। खाना-पीना, सोना सब डर के साए में था। बस ध्यान रहता था कि अब आगे क्या होने वाला है। इन सभी उधेड़बुन में 18 दिन बुरा हाल रहा।

    यह दास्तां है केंद्रीय मंत्रालय से लेबर वेलफेयर कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हुई महिला की। ठगों ने 18 दिन तक लगातार उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर 40 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

    मनी लॉन्ड्रिंग का लगाया था आरोप

    शहर में रहने वाली महिला मोनिका ने बताया कि वह केंद्रीय मंत्रालय से कई साल पहले लेबर वेलफेयर कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। बेटी दिल्ली में रहती है।

    उन्होंने बताया कि वह फिलहाल अपनी 90 वर्षीय मां के साथ रह रही हैं। 11 नवंबर 2024 को उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। इसके बाद अगले 18 दिनों तक वह बंधक बनी रही। कॉल करने वाले ने अपने आपको दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) का प्रतिनिधि बताया।

    खाते से रुपये का भारी लेन देन किया गया 

    उन्होंने कहा कि उसके आधार कार्ड और फोन नंबर का प्रयोग करके मुंबई के कैनरा बैंक में खाता खोला गया है। एक निजी विमानन कंपनी के सीईओ के भी उस खाते से रुपये का भारी लेन देन किया गया है। यह सुनकर उन्होंने कहा कि उन्होंने मुंबई के बैंक में किसी भी तरह का खाता नहीं खोला है।

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    वाट्सएप पर गिरफ्तार का वारंट भी भेजा

    इस पर ट्राई का अधिकारी बनकर बात करने वाले युवक ने किसी दूसरे नंबर पर फोन ट्रांसफर कर दिया। जिस व्यक्ति को फोन ट्रांसफर किया गया उसने अपने आपको मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। साथ ही उन्हें वीडियो कॉल करके बैंक खाते से लेन देने संबंधित कागज दिखाए। वाट्सऐप पर गिरफ्तार का वारंट भी भेजा।

    फोन स्विच ऑफ होने पर देते थे धमकी

    आरोपितों ने जांच में सहयोग का हवाला देते हुए पीड़िता को हाउस अरेस्ट की बात कही। यानी घर में ही रहना है हर समय। दिन-रात वाट्सएप वायस कॉल एक्टिव रहने के लिए कहा गया। आरोपितों को जब कोई और पूछताछ करनी होती तो वह वीडियो कॉल करते थे। यदि एक बार कॉल पिक नहीं की तो लगातार करते रहते थे। गलती से फोन स्विच ऑफ हो जाए तो आन होने पर धमकी देते थे।

    खाते में जमा 40 लाख ट्रांसफर करा लिए

    स्पष्ट कहा था कि इस बारे में किसी को नहीं बताना। वरना गिरफ्तार कर लेंगे। बेटी व अन्य जब कभी फोन करते तो वह वायस कॉल कट कर बात कर लेती थी। आरोपित कहते थे कि बात कर सकते तो लेकिन किसी को कुछ बताना नहीं है। उसके हाव-भाव को बुजुर्ग माता पहचान गई।

    एक-दो बार पूछा भी कि क्या हो गया है। लेकिन डर की वजह से कुछ नहीं बताया। वह घर में जहां भी जाती, जो भी करती, बस मोबाइल की वायस कॉल आन रखनी पड़ती थी। इस दौरान उन्होंने उनके खाते में जमा 40 लाख ट्रांसफर करा लिए थे।

    आरोपितों ने कहा था कि जांच के बाद वापस कर देंगे। 18वे दिन वीडियो काल के दौरान आरोपितों ने उनकी किसी बात का रिस्पांस नहीं दिया। मुंबई पुलिस का लोगो भी वीडियो कॉल में दिखाई नहीं दिया। जब उन्हें सामान्य काल की तो फोन पिक नहीं किया। इस हरकत पर शक हुआ तो समझी की ठगी हो गई है। करीब 15 दिन डर की वजह से किसी को शिकायत नहीं दी।

    नहीं मिला नंबर, पोर्टल में थी दिक्कत

    महिला ने बताया कि जब उन्होंने जनवरी में इस मामले की शिकायत करने के बारे में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल किया तो वह अकसर मिलता नहीं थ। जब मिलता तो काल फारवर्ड कर दी जाती। साइबर पुलिस के पोर्टल साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर कोशिश की तो बार-बार तकनीकी खराबी बता दी जाती। कई दिन लग गए। इस बारे में साइबर थाना पुलिस को बताया। काफी मशक्कत के बाद शिकायत आनलाइन दी जा सकी।

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