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Digital Arrest: फरीदाबाद में बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 12 लाख रुपये ठगे, आप ना करें ऐसी गलती

धोखाधड़ी के मामले में फंसाने की धमकी देकर एक बुजुर्ग को ठगों ने कई घंटे तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। उससे 12 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। आरोपित अपने आपको मुंबई साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी बता रहे थे। पीड़ित ने इसकी शिकायत साइबर थाने में दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस धोखाधड़ी की बाबत एक मुकदमा मुंबई में दर्ज कराया गया है।

By Parveen Kaushik Edited By: Abhishek Tiwari Published: Sun, 09 Jun 2024 04:11 PM (IST)Updated: Sun, 09 Jun 2024 04:11 PM (IST)
Digital Arrest: फरीदाबाद में बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 12 लाख रुपये ठगे

प्रवीन कौशिक, फरीदाबाद। धोखाधड़ी के मामले में फंसाने की धमकी देकर एक बुजुर्ग को ठगों ने कई घंटे तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। उससे 12 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

आरोपित अपने आपको मुंबई साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी बता रहे थे। पीड़ित ने इसकी शिकायत साइबर थाने में दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

धोखाधड़ी के केस में फंसाने की दी धमकी

साइबर थाना एनआइटी में चार्मवुड विलेज में रहने वाले बुजुर्ग ने दी शिकायत में बताया कि 13 मई की दोपहर को उसके पास एक मैसेज आया। इसमें पूछा गया कि आपके क्रेडिट कार्ड से 43 हजार 565 रुपये खर्च किए गए हैं।

क्या यह पैसे आपने खर्च किए हैं। उसने मैसेज में नही लिखकर भेज दिया। इसके बाद उनके पास एक व्यक्ति ने कॉल की। उसने अपना नाम रमेश यादव बताया और कहा कि वह एचडीएफसी बैंक क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट मुंबई से बोल रहा हूं।

उसने बताया कि बैंक की ओर से अजमेर के अजय नागर के नाम क्रेडिट कार्ड जारी किया गया है, लेकिन इस कार्ड से किसी ने चेन्नई में खरीदारी की गई है। उसने बुजुर्ग को बताया कि क्रेडिट कार्ड की जांच की तो इसमें आधार और मोबाइल नंबर उसका मिला।

मुंबई साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर किया फोन

इस धोखाधड़ी की बाबत एक मुकदमा मुंबई में दर्ज कराया गया है। इसके बाद बैंककर्मी के रूप में फोन कर रहे रमेश यादव ने उसकी कॉल को साइबर क्राइम ब्रांच ग्रेटर मुंबई में डायवर्ट कर दिया गया।

वहां कोई अजय कुमार उनसे बात करने लगा। इसके बाद उसकी बात किसी प्रताप सिंह से कराई गई जिसने अपने आपको डीसीपी साइबर क्राइम बताया। आरोपित फोन पर लगातार उससे पांच घंटे तक बात करते रहे। इस दौरान उससे उसके बैंक खातों सहित अन्य जरूरी जानकारी ली। वह उसे लगातार धमकी देते रहे।

उसने इस मुकदमे की एवज में उससे 12 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा। इसके लिए उसे अकाउंट नंबर भी बताया गया। आरोपित उससे अगले दिन भी इसी मामले को लेकर सुबह आठ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक फिर बात करते रहे। इसके बाद उसने बैंक जाकर आरटीजीएस के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कर दिए।

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?

आजकल इस तरह का फ्राड काफी बढ़ रहा है। इसे साइबर ठग बहुत अधिक अपनाने लगे हैं। इसका सीधा मतलब होता है ब्लैकमेलिंग से यानी इसके जरिये ठग अपने टारगेट को ब्लैकमेल करता है। डिजिटल अरेस्ट में कोई आपको वीडियो कॉलिंग के जरिये या वाइस कॉल के जरिये बंधक बना लेता है। वह आप पर हर वक्त नजर रख रहा होता है।

ऐसे मामलों में ठग कोई सरकारी एजेंसी के अफसर या पुलिस अफसर बनाकर आपको कॉल करते हैं। तरह-तरह की धमकी देकर फंसाने के लिए कहा जाता है। इतना ही नहीं गिरफ्तारी का डर दिखाकर आपको आपके घर में ही कैद कर देते हैं।

वीडियो कॉल के बैकग्राउंड को किसी पुलिस स्टेशन की तरह बना लेते हैं जिसे देखने वाला व्यक्ति डर जाता है और उनकी बातों में आ जाता है। जिले में डिजिटल अरेस्ट के इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।

बरतें सावधानी

  • आमतौर पर इस तरह धमकी भरे कॉल कोई भी एजेंसी नहीं करेगी।
  • इसके लिए कानूनी प्रक्रिया होती है और उसी के तहत उसे पूरा किया जाता है।
  • यदि आपके पास इस तरह की कॉल आए तो सबसे पहले अपने परिचित या पुलिस को सूचित करें।
  • यदि आपको शक दूर करना है कि फोन करने वाले जिस एजेंसी से बताएं, वहां फोन कर सच्चाई पता कर सकते हैं।
  • सबसे जरूरी यह है कि किसी को भी पैसे ट्रांसफर कतई न करें और अपनी निजी जानकारी भी साझा न करें।

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