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    Bulldozer Action: अरावली वन क्षेत्र में अवैध निर्माण ध्वस्त, आठ फार्म हाउस और बैंक्वेट हॉल को मिट्टी में मिलाया

    By Jagran NewsEdited By: Monu Kumar Jha
    Updated: Tue, 17 Jun 2025 10:21 PM (IST)

    फरीदाबाद में अरावली वन क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ वन विभाग और नगर निगम ने संयुक्त कार्रवाई की। आठ फार्म हाउस और बैंक्वेट हाल तोड़े गए जिनमें श्री मंगलमय गार्डेन और ईडन गार्डन शामिल हैं। अब तक 51 अवैध निर्माण तोड़े जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही इस कार्रवाई के खिलाफ ग्रामीणों ने केंद्रीय राज्यमंत्री और डीसी से गुहार लगाई पर कोई राहत नहीं मिली।

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    अरावली वन क्षेत्र में बने मंगलमय गार्डेन तोड़ते हुए जेसीबी। जागरण

    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ मंगलवार को भी कार्रवाई जारी रही। वन विभाग और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में सुबह से शाम सात बजे तक आठ अवैध रूप से बने फार्म हाउस और बैंक्वेट हाल तोड़े गए।

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    इनमें श्री मंगलमय गार्डेन, ईडन गार्डन और आनंद फार्म प्रमुख हैं। इनके तीन अन्यों को पूरी तरह से ध्वस्त किया गया जबकि दो फार्म हाउस को आधा तोड़ा गया है। इनमें एक दिल्ली के उद्योगपति का भी है।

    विभाग ने उनका नाम नहीं बताया। इस तरह अब तक 51 अवैध निर्माण पर कार्रवाई हो चुकी है। बुधवार को भी सूरजकुंड रोड पर अरावली वन क्षेत्र में बने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    बता दें कि अरावली वन क्षेत्र से 6793 से अधिक छोटे-बड़े अवैध निर्माण को हटाया जाना है। इसमें करीब एक हजार फार्म हाउस और बैंक्विट हाल बताए जा रहे हैं।

    अरावली से कब्जों को हटाकर जुलाई में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में वन विभाग को रिपोर्ट सौंपनी है। अगस्त में मामले पर फिर सुनवाई हो होगी। इसको लेकर अधिकारी पिछले करीब एक सप्ताह से अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

    सुप्रीम कोर्ट में लगाओ गुहार, हमारे हाथ कुछ नहीं

    अनंगपुर गांव के लोग तोड़फोड़ की कार्रवाई रुकवाने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के पास सोमवार को गए थे। यहां ने लोगों को आश्वासन दिया था कि अनंगपुर गांव में तोड़फोड़ नहीं होगी।

    लेकिन वन क्षेत्र में जो व्यवसायिक गतिविधियां कर रहे हैं, उन्हें नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने जिला उपायुक्त विक्रम सिंह को लोगों के साथ बैठक कर कोई हल निकलवाने को कहा था। इसी दिशा में ग्रामीणों की मंगलवार को डीसी के साथ करीब एक घंटे बैठक हुई, पर उन्हें फौरी राहत कोई नहीं मिली।

    उपायुक्त ने की ओर से कहा गया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही है। जिला प्रशासन आदेशों का पालन करा रहा है। नियमों के खिलाफ जो निर्माण हुए हैं, उनको तोड़ा जा रहा है। अनावश्यक किसी को नहीं छेड़ा जाएगा। बाकी लोग सुप्रीम कोर्ट से मदद की गुहार लगा सकते हैं।