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    अनंगपुर गांव में तोड़फोड़ के विरोध में आज पंचायत, 12 गांव के 84 खाप के ग्रामीण कहेंगे 'मन की बात'

    By Jagran NewsEdited By: Neeraj Tiwari
    Updated: Sun, 06 Jul 2025 08:38 AM (IST)

    फरीदाबाद के अनंगपुर गांव में तोड़फोड़ के खिलाफ आज पंचायत होगी जिसमें कई राज्यों के गुर्जर समाज के लोग समर्थन देने पहुंचेंगे। पंचायत में आगे की रणनीति तय की जाएगी। भारतीय किसान यूनियन और विधायक अतुल प्रधान ने भी समर्थन दिया है। अरावली वन क्षेत्र में 6497 अवैध निर्माणों की पहचान हुई है जिसके खिलाफ कार्रवाई चल रही है। ग्रामीणों में आक्रोश है। वे सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

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    नोएडा, राजस्थान, सहारनपुर, बागपत, और मुजफ्फरनगर सहित अन्य राज्यों के गुर्जर समाज के लोग ग्रामीणों के समर्थन को पहुंचे।

    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। अनंगपुर गांव में तोड़फोड़ के विरोध में रविवार को पंचायत होगी। शनिवार को नोएडा, राजस्थान, सहारनपुर, बागपत, और मुजफ्फरनगर सहित अन्य राज्यों के गुर्जर समाज के लोग ग्रामीणों का समर्थन करने के लिए पहुंचे। पंचायत में आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। वहीं, भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी और उत्तर प्रदेश के मेरठ की सरधना विधानसभा क्षेत्र के विधायक अतुल प्रधान ने लोगों का समर्थन किया। उन्‍होंने कहा कि लोगों की हक की लड़ाई के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा।

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    6497 अवैध निर्माणों को चिन्हित किया गया

    दरअसल, अरावली वन क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पर कार्रवाई हो रही है। अरावली वन क्षेत्र और आस-पास के हिस्सों से 6497 अवैध निर्माणों को चिन्हित किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक अवैध निर्माण अनंगपुर, अनखीर, मेवला महाराजपुर, लक्कड़पुर सहित अरावली वन क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में बने हैं।

    जून में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की गई लेकिन जब बुलडोजर अनंगपुर पहुंचा तो विरोध शुरू हो गया। बीते मंगलवार को अनंगपुर गांव मेें एक मकान को ढहा दिया गया। इससे लोगों में रोष व्याप्त है। ग्रामीण गांव में धरना दे रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विजय प्रताप ने बताया कि रविवार को होने वाली पंचायत में 12 गांवों के ग्रामीण शामिल होंगे।

    शनिवार को विधायक अतुल प्रधान ने कहा...

    "मैं गांव के लोगों के साथ हूं। सरकार और अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में तथ्य ठीक प्रकार से पेश नहीं किए। इस वजह से इस तरह का फैसला आया है। यह जमीन गांव के लोगों की हैं। उनके पूर्वज वर्षों से रह रहे हैं, फिर वन विभाग की जमीन कैसे हो सकती है। हम चाहते हैं कि महापंचायत में सरकार के लोग भी पहुंचे और अपना पक्ष रखें कि अनंगपुर के लोगों के घर बचाने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने अनंगपुर के लोगों का समर्थन किया।"