एड्स के प्रति जागरूक नहीं हैं औद्योगिक नगरी के लोग
जिले में पिछले चार वर्षों के तुलना में इस बार एचआइवी एड्स के मरीज कम आए हैं।

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : जिले में पिछले चार वर्षों के तुलना में इस बार एचआइवी एड्स के मरीजों की संख्या में काफी कमी है। इस बार 183 नए मरीजों की पहचान हुई है, लेकिन जिलेवासी एचआइवी एड्स के लेकर जागरूक नहीं है। आज भी इस जानलेवा बीमारी पर चर्चा करने से झिझकते हैं। महज चार फीसद मरीज ही स्वेच्छा से जांच कराने के लिए आते हैं, जबकि शेष 95 फीसद लोग कोई तकलीफ, आपरेशन या गर्भवती होने पर ही जांच कराने के लिए आते हैं। ऐसे में इस बीमारी के मरीजों को चिन्हित करना जिला एचआइवी एड्स नियंत्रण विभाग के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण है।
जिले में मजदूर तबके से लेकर उद्यमी-कारोबारी और वाइट कालर जाब के लोग रहते हैं। इन सभी में जागरूकता की भारी कमी है। एचआइवी एड्स नियंत्रण विभाग की ओर स्कूल, कालेज के छात्र एवं गांवों में होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में ग्रामीण ही बड़े उत्साह से हिस्सा लेते हैं, लेकिन एचआइवी एड्स जांच कराने में सभी पीछे हट जाते हैं। विभाग द्वारा कई बार शिक्षण संस्थानों में जांच शिविर लगाए गए हैं, लेकिन कोई भी युवा जांच के लिए आगे नहीं आता है। नशे की वजह से आ रहे हैं चपेट में
जिला एचआइवी एड्स नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 30 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के युवा इस बीमारी की चपेट आते हैं। यह मुख्य कारण नशा है। नशे के लिए कई युवा नशीले इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। कई युवाओं के बीच एक इंजेक्शन होता है और सब उसे लगाकर नशा करते हैं। इससे एचआइवी एड्स होने खतरा रहता है। अन्य बीमारियों की चपेट आ जाते हैं आसानी से
एचआइवी एड्स अन्य बीमारियों के कारण की प्रमुख वजह बन रहा है। इस बीमारी के मरीजों रोग प्रतिरोधक क्षमता कम रहती है। 70 फीसद से मरीजों में अन्य बीमारियां जैसे, मधुमेह, रक्तचाप, टीबी, डायरिया शिकायत पाई जाती है। इसके अलावा टीबी के मरीजों को बुखार आना बहुत ही सामान्य है। एक दशक में एचआइवी के प्रति लोगों को जागरूकता आई है, लेकिन लोगों को अभी और जागरूक होने की आवश्यकता है। विभाग के शिविरों में हिस्सा लेना चाहिए और इस बीमारी से बचाव के चार तरीके है। उनका पालन करना चाहिए।
-डॉ.शीला भगत, जिला टीबी अधिकारी 11 वर्षों का एचआइवी रिकॉर्ड
वर्ष -जांच कराने वालों की संख्या- पुरुष-महिला-गर्भवती-कुल
-2009-7119-95-37-09-141
-2010-7380-142-39-05-186
-2011-12027-119-54-06-179
-2012-16702-120-68-07-195
-2013-19289-144-24-06-174
-2014-20190-158-62-11-231
-2015-24959-102-53-06-161
-2016-41158-182-82-11-275
-2017-47138-165-81-13-259
-2018-67352-248-95-27-370
-2019-65323-253-94-15-344
-2020 - 44883-120-56-7-183
(अभी तक के आंकड़े)
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