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    अपनी पहचान बनानी है, कुछ अलग करो..

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 14 Jun 2022 04:43 PM (IST)

    साहित्यिक सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था आगमन की ओर से काव्य उत्सव का आयोजन किया गया।

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    अपनी पहचान बनानी है, कुछ अलग करो..

    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था आगमन की ओर से काव्य उत्सव का आयोजन किया गया। फरीदाबाद माडल पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न शहरों से आए कवियों ने विविध विषयों की कविताएं प्रस्तुत की। गीतकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। गजलकार देवेंद्र मांझी विशिष्ट अतिथि थे। काव्य उत्सव की अध्यक्षता साहित्यकार डा. महेंद्र शर्मा मधुकर ने की।

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    लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने बेहतरीन प्रस्तुति दी-यदि भीड़ भरी इस दुनिया में अपनी पहचान बनानी है, कुछ अलग करो, कुछ नया करो। भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करते हुए गजलकार देवेंद्र मांझी ने कहा-हो तो जाते हैं काम ले दे के, ठीक है ये निजाम ले दे के। दोहे में ममता किरण ने टूटते परिवारों पर चिता प्रकट की-बच्चों को पर क्या मिले, छोड़ गए वे साथ, दीवारें ही बच गई, जिनसे कर लो बात। डा.महेंद्र शर्मा मधुकर की गजल भी सराही गई-शहर की आबोहवा इस जिदगी को खा गई, एक गलतफहमी हमारी दोस्ती को खा गई। संस्था के प्रदेशाध्यक्ष राजपाल यादव ने अपना परिचय कुछ इस अंदाज में दिया-देशप्रेम की लौ लिए, देता जो आवाज, आज उसी को सब कहें, राजपाल कविराज।

    विशिष्ट अतिथि एचएस मलिक, आलोक यादव, डा.ज्योत्सना सिंह, अशोक गुप्ता, डा.नीलम वर्मा, प्रतोष मिश्रा ने कविताओं के साथ अपने विचार भी प्रकट किए। इनके अलावा अजय अक्स, अनुराधा पांडेय, विनोद पाराशर, निशिका, अजय अज्ञात, अवधेश कन्नौजिया, विनोद कुमार वर्मा, कुमारी आकांक्षा, आलोक यादव, सुनीता बंसल, बबीता गर्ग, भूपेंद्र कौर, संतोष श्रीवास्तव, देवेंद्र दीप, शशि रंजना, सूक्ष्म लता महाजन, इंदुराज निगम, सुंदर सिंह, डा.कविता मल्होत्रा, कविता पाल, मनीषा जोशी, मीनाक्षी, रचना भाटिया, निर्मल, डा.मीनाक्षी शर्मा, कुमारी पलक, मीरा कुमार, रितु अस्थाना, निर्मला शर्मा, मोनिका आनंद तथा डा. नीलम वर्मा ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन डा. स्वीटी एंजल तथा मनीषा जोशी ने संचालन किया। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन जैन ने कवियों का स्वागत किया।