10 साल में दक्षिण हरियाणा में 2600 से अधिक अवैध कॉलोनियां, फरीदाबाद में सबसे ज्यादा 1017; HC को रिपोर्ट सौंपेगी ACB
दक्षिण हरियाणा में पिछले 10 सालों में 2600 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित हुई हैं, जिनमें फरीदाबाद में सर्वाधिक 1017 ...और पढ़ें

सोनीपत में 300 से अधिक से अधिक, गुरुग्राम में 900, रेवाड़ी में 80, नूंह में 200, महेंद्रगढ़ में 25, पलवल में 100 अवैध काॅलोनी विकसित हुई हैं।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। प्रदेश में 10 साल के अंदर अवैध काॅलोनियां तेजी से विकसित हुई हैं। सरकार की बेशकीमती जमी पर कब्जा होता रहा, पर जिम्मेदार अधिकारी सोते रहे। अब उनके ऊपर गाज गिर सकती है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने विभिन्न जिलों में 10 साल के अंदर विकसित हुई अवैध काॅलोनियों का डाटा तैयार किया है।
दक्षिण हरियाणा की ही बात करें सोनीपत सहित छह अन्य जिलों में 2600 से अधिक अवैध कालोनियां विकसित हुई हैं, इनमें सबसे अधिक औद्याेगिक जिला फरीदाबाद के अंदर सबसे ज्यादा 1017 अवैध काॅलोनी हैं। सोनीपत में 300 से अधिक से अधिक, गुरुग्राम में 900, रेवाड़ी में 80, नूंह में 200, महेंद्रगढ़ में 25, पलवल में 100 अवैध काॅलोनी विकसित हुई हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों की सूची भी हो रही तैयार
एंटी करप्शन ब्यूरो ने संबंधित विभागों से 10 साल के दौरान तैनात रहे उन अधिकारियों की सूची भी मांगी है, जिनकी अवैध काॅलोनी विकसित होने से रोकने की ड्यूटी थी। यह अवैध काॅलोनियों के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की सूची भी हाई कोर्ट को सौंपी जाएगी। हाई कोर्ट ने यह रिपोर्ट अवैध कालोनियों को लेकर दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मांगी है।
यह याचिका गुरुग्राम निवासी अशोक मुंजाल ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध कालोनियां बस रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।
एंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी अनिल यादव ने बताया कि अवैध कालोनियों का डाटा तैयार कर लिया है, मगर दो बार रिमाइंडर देने के बाद भी संबंधित विभागों ने अब तक एंटी करप्शन ब्यूरो को जिम्मेदार अधिकारियों की सूची नहीं सौंपी है।
सबसे ज्यादा ग्रेटर फरीदाबाद में विकसित हुईं अवैध काॅलोनियां
एंटी करप्शन ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा 500 कालोनियां ग्रेटर फरीदाबाद में विकसित हुई हैं। इसके अलावा पृथला, आइएमटी, बसंतपुर, पल्ला, सेहतपुर, अगवानपुर, ददसिया, टिकावली, वजीरपुर क्षेत्रों भी बड़ी संख्या में अवैध कालोनियां विकसित हुई हैं। इन क्षेत्रों में 300 से अधिक कालोनियां विकसित हुई हैं।
सोनीपत दूसरे नंबर पर
सोनीपत तेजी से बढ़ता औद्योगिक क्षेत्र के रूप में सामने आ रहा है। इसलिए इस जिला में भी अवैध कालोनियाें का जाल फैल रहा है। यहां 300 से अधिक कालोनियां शहरी क्षेत्र सहित कुंडली, राई, खरखौदा व गन्नौर में अवैध रूप से विकसित हुई हैं। इसी तरह से नूंह में फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना में, पलवल के शहरी क्षेत्र में, पीतल नगरी रेवाड़ी के शहरी क्षेत्र में, बावल, धारूहेड़ा, कुंड क्षेत्र में अवैध कालोनियां विकसित हुई हैं।
यह अधिकारी होते हैं जिम्मेदार
ग्रामीण क्षेत्र व एचएसवीपी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में अवैध काॅलोनी विकसित होने से रोकने की जिम्मेदारी जिला नगर योजनाकार (इनफोर्समेंट) की होती है। वहीं नगर निगम क्षेत्र में नगर निगम तोड़फोड़ विभाग का एसडीओ इसके लिए जिम्मेदार होता है। इन्हें न केवल अवैध कालोनियों में तोड़फोड़ की शक्ति होती है, बल्कि ये अवैध काॅलोनी विकसित करने वालों पर मुकदमे भी दर्ज करा सकते हैं।
हाई कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो से सात प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी देने को कहा...
- पिछले 10 वर्षों के दौरान बसाई गई अवैध कालोनियों की संख्या
- उस समय जिले में तैनात रहे जिम्मेदार अधिकारी
- इन कालोनियों के कारण सरकार को हुए राजस्व नुकसान का आकलन
- अवैध कालोनियों को रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदम
- अवैध काॅलोनी बसाने वालों पर दर्ज कराए मुकदमों की संख्या
- अवैध काॅलोनी बसाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में हुई देरी के कारण
- दर्ज मामलों की वर्तमान स्थिति और उनका अंतिम परिणाम
"हाई कोर्ट के निर्देश पर अवैध काॅलोनियों का डाटा हमने तैयार कर लिया है। अब प्रशासन से बाकी बिंदुओं पर जवाब मिलने का इंतजार है। जवाब मिलते ही यह सारी जानकारी हाई कोर्ट को सौंप दी जाएगी।"
-अनिल यादव, एसपी, एंटी करप्शन ब्यूरो फरीदाबाद।
यह भी पढ़ें- फरीदाबाद में खुलेआम उड़ रही ट्रैफिक नियमों की धज्जिया, दर्शक बनकर रह जाती है पुलिस
यह भी पढ़ें- फरीदाबाद में 30 गांवों की स्ट्रीट लाइट लाइटों की जांच करेगा पंचायत विभाग, बिल और कामकाज की होगी समीक्षा
