फरीदाबाद में आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बेहाल, रिकॉर्ड में 1.10 लाख बच्चे ले रहे पोषाहार; हकीकत में 'सन्नाटा'
फरीदाबाद में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत खराब है। रिकॉर्ड में 1.10 लाख बच्चे पोषाहार ...और पढ़ें

खाली पड़ा है आंगनबाड़ी केंद्र, 15 दिन से नहीं पहुंचे हैं बच्चे। जागरण
HighLights
रिकॉर्ड में 1.10 लाख बच्चे, पर केंद्र बंद मिले।
कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की अनुपस्थिति देखी गई।
पोषाहार वितरण में अनियमितता और सुविधाओं का अभाव।
निभा रजक, फरीदाबाद। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से हर महीने बच्चों के पोषण, उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और गर्भवती महिलाओं तक पोषाहार पहुंचाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
विभाग के रिकाॅर्ड में जिले के 1294 आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रतिदिन 1.10 लाख बच्चे पहुंच रहे हैं और पोषाहार का सेवन कर रहे हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि कई केंद्रों पर ताला लटका है।
दैनिक जागरण ने शुक्रवार को सेक्टर-22, मुजेसर, संजय कालोनी, 60 फुट रोड, एसी नगर और आटोपिन की आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की। अधिकांश बदहाल स्थिति में नजर आई।
केंद्रों के सामने कोई बोर्ड नहीं मिला
इस बीच पाया गया कि कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब एक पखवाड़े से बच्चे नहीं पहुंचे हैं। बच्चों की किलकारी और चहलकदमी से गूंजने वाले केंद्रों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों के सामने कोई बोर्ड नहीं लगा था। यहां कपड़े सूखाते हुए नजर आए।

आंगनबाड़ी से बच्चे गायब
सुबह साढ़े नौ बजे संवाददाता एसी नगर की आंगनबाड़ी में पहुंची। यहां दरवाजा बंद था। कोई हेल्पर भी मौजूद नहीं थी। बहुत छोटे कमरे में चल रहा यह आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल दिखाई दिया। यहां इंचार्ज की बीएलओ ड्यूटी पर लगाए जाने के कारण बच्चों की पढ़ाई और नियमित कामकाज प्रभावित है। इस आंनबाड़ी केंद्र का भवन खराब स्थिति में दिखाई दिया। दीवारों से प्लास्टर गिर रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्र पर कोई बोर्ड नहीं
सुबह 10 बजे एसी नगर की आंगनबाड़ी में हेल्परों ने बताया कि केंद्र किराये के मकान पर चल रहा है। छोटे से कमरे का किराया 3500 रुपये है, बिजली का बिल 300 रुपये आता है। इस केंद्र में पिछले 15 दिनों से मरम्मत कार्य के चलते कक्षाएं नहीं लग रही है। यह भी बेहद खराब स्थिति में मिला। केंद्र के सामने कोई बोर्ड नहीं लगा था। जबकि आस-पास गंदगी का ढेर लगा दिखाई दिया।

जमीन पर पड़ा था पोषाहार
10.30 बजे एसी नगर की दूसरी आंगनबाड़ी बंद मिली। यहां कोई हेल्पर भी नहीं है।एक महिला ने केंद्र का दरवाजा खोला। यहां बच्चों के खिलौनों पर मोटी धूल जमी थी, जबकि राशन जमीन पर पड़ा था। उसे गेहूं के सेवन से गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के बीमार होने का खतरा है।
15 दिनों से नहीं पहुंचा है राशन
सुबह 11 बजे 60 फुट रोड स्थित आंगनबाड़ी की स्थिति भी बेहद खराब देखने को मिली। यहां पता चला कि पिछले 15 दिनों से आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन ही नहीं पहुंचा है। जिससे बच्चों को मेन्यू अनुसार पोषाहार तो दूर की बात चने और मूंगफली ही दी जा रही है। जबकि मेन्यू में खिचड़ी, दलिया, चावल-दाल, राजमा और स्थानीय रूप से उपलब्ध मोटे अनाज शामिल है।
केंद्र से बाहर सूख रहे हैं कपड़े
11.30 बजे आंगनबाड़ी का उद्देश्य केवल बच्चों को एक कमरे में बैठाना नहीं है। यहां बच्चों को खेल-खेल में सीखने, आपस में घुलने-मिलने और उम्र के अनुरूप गतिविधियों में हिस्सा लेने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए सुरक्षित स्थान, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और जरूरी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। लेकिन शहर के आंगनबाड़ी केंद्र इसके विपरीत हैं।
ऑटोपिन की तीसरे आंगनबाड़ी केंद्र के सामने कपड़े सूखते हुए नजर आए। यहां बच्चों की जगह आस-पास की महिलाएं बैठकर बातें कर रही थी। पूछने पर बताया कि 10 दिनों से बच्चों की छुट्टी है। बता दें कि आंगनबाड़ी में बच्चों के पढ़ने का समय सुबह नौ बजे से 12 बजे तक है। लेकिन किसी भी आंगनबाड़ी में कोई बच्चा नहीं मिला।
आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन पहुंचना शुरू हो गया है। जो केंद्र बंद मिले हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। कुछ केंद्र किराये के मकानों में चल रहे हैं, लेकिन बच्चों के लिए स्वच्छता और सुविधाएं विभाग की प्राथमिकता है। जिन केंद्रों पर अव्यवस्था है, उन्हें दूर कराया जाएगा।
-मीनाक्षी चौधरी, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग।
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