फरीदाबाद में एंबुलेंस फ्यूल घोटाला, बिना चली गाड़ियों के नाम पर 50 लाख का गबन, जांच कमेटी गठित
फरीदाबाद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एंबुलेंस के ईंधन में घोटाला का मामला सामने आया है। कर्मचारियों ने बिना ...और पढ़ें
-1793629871150_m.webp)
फरीदाबाद में एंबुलेंस फ्यूल घोटाला। फोटो-जागरण आर्काइव
HighLights
50 लाख का एंबुलेंस फ्यूल घोटाला उजागर।
बिना चली एंबुलेंस के नाम पर ईंधन गबन।
स्वास्थ्य निदेशक ने जांच कमेटी गठित की।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित एंबुलेंस के मामले में बड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है। कई कर्मचारी बिना चलाए ही एंबुलेंस का लगभग 50 लाख रुपये का फ्यूल ही पी गए।
यह मामला मिशन के अधिकारियों के पास तब सामने आया, जब पता कि कई एंबुलेंस सर्विस के लिए गई हुईं थीं और इन्हीं के नाम से बनाए गए फ्यूल कार्ड से डीजल की खरीदारी की गई।
इसके बाद जब मिशन की ओर से पड़ताल शुरू की गई तो स्थिति सामने आई। अभी बारीकी से इस मामले में जांच की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य निदेशक की ओर से चार अधिकारियों की जांच कमेटी बना दी गई है।
हर जिले में चलाया जा रहा 20 एंबुलेंस
बता दें कि प्रत्येक जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रेफरल ट्रांसपोर्ट स्कीम चल रही है। स्कीम के तहत गर्भवती या अन्य मरीजों को अस्पताल तक लाने व जाने के लिए लगभग 20 एंबुलेंस चल रही हैंं। हर एंबुलेंस के नाम से पेट्रो कार्ड भी दिया जाता है, जिसके प्रयोग के लिए मुख्यालय से अनुमति मिलती है।
यह कार्ड एंबुलेंस का चालक इस्तेमाल करता है। इसके अलावा जब कभी एंबुलेंस खराब होती है तो उसकी मरम्मत भी की जाती है।
नहीं चलने वाले एंबुलेंस के नाम पर खेल
मिशन के अधिकारियों के सामने पिछले दिनों ऐसी एंबुलेंस का रिकॉर्ड सामने आया, जो सर्विस के लिए गईं हुई थीं। जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार अधिकांश एंबुलेंस डीजल से चल रही हैं, चार एंबुलेंस अभी नहीं चल रही हैं। इन्हीं एंबुलेंस के नाम पर खेल किया गया है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री ने भी उठाया मुद्दा
पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अपने इटरनेट मीडिया अकाउंट पर भी इस मुद्दे को उठाया है। उनकी ओर से मुद्दा उठाने के बाद ही स्वास्थ्य निदेशालय अधिक सक्रिय हो गया है।
स्वास्थ्य निदेशक की ओर से मामले की जांच करने को एक कमेटी बना दी गई है। इसमें मिशन के उप निदेशक प्रशासन, मुख्य लेखा अधिकारी, स्टेट एनजीओ कार्डिनेटर तथा रोहतक के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी शामिल होंगे।
मामले की जांच करने को मंगलवार को यह टीम मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय आएगी। रेफरल ट्रांसपोर्ट स्कीम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
इस तरह होगी आगे की जांच
-कुल कितनी एंबुलेंस पर कितना फ्यूल खर्च किया गया।
-फ्यूल कार्ड का प्रयोग कितना हुआ और कितने किलोमीटर एंबुलेंस चलाई गई।
-देखा जाएगा कि एंबुलेंस के संचालन में जिम्मेदारों ने कितनी निगरानी की या लापरवाही बरती।
-वित्तीय हानि के लिए कौन अधिकारी गैर जिम्मेदार रहा।
इस मामले की बारीकी से जांच की जााएगी। अधिकारी की दखल हो या किसी कर्मचारी की। किसी को भी बक्शा नहीं जाएगा।एंबुलेंस से जुड़े सारे रिकार्ड की जांच की जाएगी। देखा जाएगा कि कहीं एंबुलेंस की मरम्मत के नाम पर तो कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
-डा. वीरेंद्र यादव, स्वास्थ्य निदेशक, हरियाणा।
यह भी पढ़ें- फरीदाबाद में किन्नर बनकर वसूली कर रही थीं दो महिला, असली से भिड़ीं तो खुली पोल; पुलिस को सौंपा
यह भी पढ़ें- होटल में पति-पत्नी बनकर लिया कमरा, फिर बेड पर मिली लाश; फरीदाबाद में गर्लफ्रेंड की हत्या कर ब्वॉयफ्रेंड फरार