जागरण संवाददाता, फरीदाबाद :

गर्मी के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए वैसे तो हर आयु वर्ग के इंसान को एहतियात बरतने की जरूरत है। इन दिनों डायरिया, उल्टी-दस्त, आंत्रशोध, पीलिया तथा डी-हाईड्रेशन के मामले आते हैं। इनमें बेचैनी, घबराहट, चक्कर आने की भी शिकायतें आती हैं। गर्भवती महिलाएं अधिक संख्या में इन परेशानियों से प्रभावित होती हैं। महिला रोग विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी के चलते और गर्भावस्था के कारण महिला की सोच पर भी असर होता है।

पेट में शिशु के पलने के कारण महिला पल-पल फिक्रमंद रहती हैं। इसका महिला के मन-मस्तिष्क पर भी प्रभाव पड़ता है। वैसे तो सरकार की ओर से सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतर माहौल में जच्चा-बच्चा को हर तरह की निशुल्क सेवाएं देने के आदेश हैं। फिर भी बादशाह खान अस्पताल में कई बार घुटन भरे माहौल में महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वातावरण, रहन-सहन तथा खान-पान में लापरवाही इसका बड़ा कारण है।

चिड़चिड़ापन व तनाव की स्थिति

महिलाओं में नमक की कमी के कारण आमतौर पर चिड़चिड़ापन और तनाव की स्थिति सामने आती है। पानी के कम सेवन करने से चक्कर भी आते हैं। दूषित पानी तथा बासी खाद्य पदार्थो के सेवन से कई बार वायरल संक्रमण हो जाता है, जो बाद में उल्टी-दस्त का भी कारण बनता है। धूल, मिट्टी की एलर्जी भी कई बार परेशानी की वजह बन जाती है। इसलिए महिलाएं गर्भावस्था में तनावमुक्त रहने का प्रयास करें। दूध, दही, पेय पदार्थो तथा फलों का सेवन करें।

बीमारियों से बचाव के उपाय

- गर्भवती महिलाएं आठ घंटे तक नींद जरूर लें।

- उल्टे हाथ के कंधे की तरफ लेटकर सोएं।

- समुचित पोषाहार लें।

- गर्भावस्था के आखिरी तीन महीने के दौरान पर्याप्त आराम करें।

- गर्भावस्था की संपूर्ण अवधि के दौरान

चिकित्सक की सलाह क बाद लौह तत्व व फोलिक युक्त गोलियां लें।

- साबुत चना, दाल, अंकुरित दाल, पत्तेदार सब्जियां व गुड़ ऐसे पदार्थ लें, जिनमें प्रचुर मात्रा में लौह तत्व हो।

- अपने दैनिक आहार में शुरू से ही हरी पत्तीदार सब्जियां शामिल करें।

-एक मौसमी फल जरूर खायें।

-दूध, दही, छाछ, अंडा, मांस व मछली का उपयोग करें।

-आयोडीन नमक का उपयोग करें। गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त आयोडीन नमक की जरूरत होती है।

- पानी खूब पीयें।

-भोजन थोड़ा-थोड़ा और कई बार लें।

विश्राम पर भी दें ध्यान

- पूरी गभार्वस्था के दौरान भारी काम न करें।

- अंतिम तीन महीने के दौरान विश्राम करना आवश्यक है, ताकि बच्चे को माता से पर्याप्त पोषाहार मिल सके।

- गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन दस से बारह किलोग्राम तक बढ़ना चाहिए।

- डॉ. अर्चना गोयल, महिला रोग विशेषज्ञ एवं सदस्य इंडियन मेडिकल एसोसिएशन।

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