लंगूर रखने पर एफआइआर का मामला गर्माया
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : सेक्टर-15 व 15ए में लंगूर रखने के आरोप में आरडब्ल्यूए व मंदिर समिति के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने का मामला गरमा गया है। शहर में विभिन्न आरडब्ल्यूए ने इसका विरोध किया है। आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों का कहना है कि बंदरों को भगाने के लिए लंगूर रखने का प्रावधान होना चाहिए।
लंगूर रखने पर मिले छूट
सूरजकुंड मेले के दौरान प्रशासन बंदरों को भगाने के लिए लंगूर का इस्तेमाल करता है। इसी तरह अन्य जगहों पर भी मेलों के दौरान लंगूरों का इस्तेमाल करने की खबरों आती हैं। शहर में कई जगहों पर बंदरों की संख्या बहुत अधिक है। ये घरों में टंकियों के ढक्कन तोड़ जाते हैं। घरों में घुसकर लोगों का सामान उठा ले जाते हैं या तोड़ते हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि बंदर सेक्टरों में लोगों को काटते हैं। इनके काटने से रेबीज का खतरा होता है। प्रशासन बंदरों को लेकर कोई उपाय नहीं कर रहा है इसलिए आरडब्ल्यूए को बंदरों को भगाने के लिए लंगूर रखने पर छूट मिलनी चाहिए।
- सुबोध नागपाल, महासचिव आरडब्ल्यूए, सेक्टर 29
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बंदर भगाने को लाते हैं लंगूर
शहर में बड़ी संख्या में बंदर हैं। लोग लंगूरों का इस्तेमाल बंदरों को भगाने के लिए करते हैं। प्रशासन या तो बंदरों का कोई उपाय करे या आरडब्ल्यूए को बंदर रखने की छूट दे। लंगूर रखने के लिए लाइसेंस जारी किए जाएं। आरडब्ल्यूए से पहले ही लिखित में ले लिया जाए कि वह लंगूरों को पर्याप्त भोजन पानी उपलब्ध करवाएगी। लंगूरों के लिए स्थाई लाइसेंस देने की बजाय कुछ दिनों के लिए लाइसेंस दिए जाएं।
- एएस गुलाटी, सचिव कंफेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए
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सरकार नहीं करती बंदर भगाने का उपाय
सरकार बंदरों को लेकर कोई उपाय नहीं कर रही है। लोग अगर अपने स्तर पर कोई उपाय करते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाता है। यह वही स्थिति हो गई है कि न तो खुद कुछ करना है और न किसी को करने देना है। लोग बंदरों से इतने परेशान हैं कि उनके पास लंगूर रखने के अलावा कोई चारा नहीं है। इस पर भी प्रतिबंध है। इसका अर्थ यही है कि लोग चुपचाप बंदरों का शिकार बनते रहें।
- मदन पुजारा, प्रधान, फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए नॉर्थ
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सरकारी पक्ष
लंगूरों को पकड़ना, बांधकर रखना व पालना वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत अपराध है। पहली बार यह अपराध करने पर तीन साल तक की सजा व 40 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। लोग बंदरों को भगाने के लिए भी लंगूर का इस्तेमाल नहीं कर सकते। हम जंगलों को काटकर अपने घर बना रहे हैं। जंगल बंदरों के घर हैं। जब हम उनके घर में घुस रहे हैं तो वे भी हमारे घरों में घुसेंगे। इसके लिए हमें इतना हो हल्ला नहीं मचाना चाहिए।
- अमृतिका फूल, सदस्य, एनिमल वेलफेयर बोर्ड वन एवं पर्यावरण मंत्रालय।
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