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स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग कर हम राष्ट्र को आर्थिक शक्ति बना सकते हैं

जागरण संवाददाता भिवानी हम सब स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग कर राष्ट्र को विश्व की प्रमुख आर्थिक

By JagranEdited By: Published: Wed, 03 Feb 2021 09:10 AM (IST)Updated: Wed, 03 Feb 2021 09:10 AM (IST)
स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग कर हम राष्ट्र को आर्थिक शक्ति बना सकते हैं

जागरण संवाददाता, भिवानी : हम सब स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग कर राष्ट्र को विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्ति बना सकते हैं। वोकल फोर लोकल के सिद्धांत से अब भारत आत्मनिर्भर बनेगा। स्वदेशी जागरण मंच के उत्तर क्षेत्रीय संगठक सतीश कुमार बतौर मुख्य अतिथि हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद एवं चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में हुए कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंगलवार को वैश्य महाविद्यालय में भी आत्मनिर्भर हरियाणा एवं भिवानी-दादरी जिला आत्मनिर्भरता एक चर्चा विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जहां विश्व के विकसित देश गंभीर संकट से जूझ रहे थे। वही हमारे देश में इसे एक चुनौती के रूप में लिया और इस चुनौती को अवसर में बदलने का काम किया। देश में मास्क पीपीई किट सेनिटाइजर वेंटिलेटर का बहुत कम समय में उत्पादन कर हमारे देश में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पास चालीस हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। उन सभी विद्यार्थियों के अभिभावक के नाते यह आह्वान करता हूं कि महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को उधम शील बनाने का काम करें। शिक्षकों का यह कर्तव्य है कि विद्यार्थियों को स्वरोजगार की ओर प्रोत्साहित कर उन्हें सही प्रशिक्षण देने का काम करें। स्वदेशी जागरण मंच के उत्तर क्षेत्रीय संयोजक एवं विशिष्ट अतिथि विजय वत्स ने कहा कि कि हम स्थानीय क्षेत्र के उत्पादों को तैयार करके उनकी मार्केटिग और प्रोत्साहित करने के लिए प्रयासरत रहें। इस मरुस्थलीय क्षेत्र में भी अनेक ऐसे उत्पाद हम बना सकते हैं जो देश ही नहीं विश्व में अपनी पहचान बना सकते हैं और यह सब हम सबको मिलकर करना होगा। यह सब होगा तभी भारत का आत्मनिर्भर का सिद्धांत साकार हो सकेगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आरके मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह प्रयास है कि विद्यार्थी स्वरोजगार को बढ़ावा दें। स्थानीय समस्याओं का हल शिक्षा के माध्यम से निकले। हमारा यह प्रयास रहेगा कि शिक्षा के माध्यम से किस प्रकार ग्रामीण विकास में सहभागिता हो। इसके लिए अनुसंधान के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाने की जरूरत है।

प्रोफेसर विकास गुप्ता ने विभिन्न कालेजों से आए शिक्षकों का परिचय कराया। मंच का संचालन डा. हरिकेश पंघाल ने किया। स्वागत एवं अभिनंदन वैश्य महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर सुधा चौहान ने किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. जितेंद्र कुमार भारद्वाज ने धन्यवाद एवं आभार प्रकट किया।

संवाद कार्यक्रम में विभिन्न कॉलेजों से आए शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्य अतिथियों से सवाल किए और सुझाव दिए। इस अवसर पर प्रो.सविता मित्तल, डीन डा. सुरेश मलिक, डा. सुनीता भरतवाल, नोडल अधिकारी संजय गोयल, प्रो.बाबूराम, डा.रश्मि बजाज, डा. कुलदीप कुमार, डा. रेखा शर्मा, डा. वेदप्रकाश, डा. प्रोमिला सुहाग, डा. उमेद शर्मा, डा.कृतिका, डा.विभा राजगढि़या, मोहित रेवड़ी सहित अनेक शिक्षक उपस्थित थे।


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