संवाद सहयोगी, बहल : पूर्व सांसद श्रुति चौधरी ने कहा कि तीन महीने से ज्यादा समय हो चुका है किसान आंदोलन कर रहे हैं। 250 से ज्यादा किसानों ने आंदोलन के दौरान अपनी शहादत दी है पर सरकार किसानों की मांग मानने की बजाए जिद्द पकड़े बैठी है। तीनों कृषि कानून न केवल किसान बल्कि आमजनता के लिए बेहद खतरनाक हैं ओर सरकार को चाहिए कि किसानों की मांगों को मानते हुए तीनों कानूनों को रद्द करना चाहिए। श्रुति चौधरी सोमवार को ओबरा व बुढेड़ा में चल रहे किसानों के धरनास्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया व आर्थिक मदद भी प्रदान की। श्रुति चौधरी ने सोरडा कदीम के 6 लोगों की एक्सीडेंट में हुई मृत्यु पर सोरडा कदीम गांव में पहुचकर शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधवाया व बिधनोई, सिरसी, चैहड़ कलां, आदि गांवों में शोक सभाओं में शिरकत की। इस दौरान उनके साथ •ालिा समन्वयक शीशराम मेचू, अमरसिंह हलुवासिया, हरिसिंह सांगवान, कृष्ण लेघा, शीशराम चैयरमेन, सुशील कासनी सुरेश गोठडा, पवन गोकलपुरा, बलवीर रणवा, प्रधान प्रताब ओबरा, मा. महाबीर सिंह बैराण, कृष्ण सुरपुरा, जयचन्द चैहड़, जगबीर सिरसी, दलीप सिरसी, मनीष जागलान, बिजेनदर सुरपुरा, राजकुमार भालोठिया, रामनिवास पुनिया आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।

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