नगर निगम की टैक्स ब्रांच ने नामी कारोबारियों की बना दी 30-32 प्रापर्टी आइडी, जांच में जुटे आयुक्त
नगर निगम की टैक्स ब्रांच ने अपने ही स्तर पर शहर के नामी कारोबारियों की एक ही आइडी की कई प्रापर्टी आइडी बना दी। इसके लिए नियमानुसार अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई। एक ही प्रापर्टी आइडी की 30 से 32 प्रापर्टी आइडी बनाकर सरकार को सीधे तौर पर वित्तीय नुकसान पहुंचाने की भनक जैसे ही निगम आयुक्त को लगी तो उन्होंने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू कर दी है। अब यह देखा जा रहा है कि नियमों की कहीं उल्लंघना हुई है या नहीं? करीब दो माह से यह जांच चल रही है।

उमेश भार्गव, अंबाला
नगर निगम की टैक्स ब्रांच ने अपने ही स्तर पर शहर के नामी कारोबारियों की एक ही आइडी की कई प्रापर्टी आइडी बना दी। इसके लिए नियमानुसार अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई। एक ही प्रापर्टी आइडी की 30 से 32 प्रापर्टी आइडी बनाकर सरकार को सीधे तौर पर वित्तीय नुकसान पहुंचाने की भनक जैसे ही निगम आयुक्त को लगी तो उन्होंने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू कर दी है। अब यह देखा जा रहा है कि नियमों की कहीं उल्लंघना हुई है या नहीं? करीब दो माह से यह जांच चल रही है। हालांकि प्रारंभिक जांच में यह तय हो गया है कि जिन नामी कारोबारियों की यह आइडी बनाई गई हैं उनमें से 3-4 ने पूरे नियम और मानकों का पालन करते हुए नगर निगम के खाते में करीब 17 करोड़ रुपये भी जमा करवाए, लेकिन अभी भी एक बड़े कारोबारी ने क्या तय मानकों के अनुसार कार्य किया, इसकी जांच चल रही है। यह भी जांच का विषय है कि इन सभी की अलग-अलग प्रापर्टी आइडी बनाने के लिए उचित माध्यम का प्रयोग किया गया या नहीं।
------------------ जानिए क्या है माजरा
दरअसल, नगर निगम में अलग-अलग प्रापर्टी के हिसाब से टैक्स रेट अलग-अलग दर पर लिया जाता है। इसमें स्क्वेयर यार्ड के हिसाब से रिहायशी, कामर्शियल, इंडस्ट्रियल और गोदाम व कांप्लेक्स इत्यादि के रेट तय किए गए हैं। आरोप यह है कि शहर के कुछ नामी व्यक्तियों की एक प्रापर्टी आइडी को कई हिस्सों में बांट दिया गया ताकि उन्हें सीधे तौर पर स्लैब का लाभ मिल सके। इतना ही नहीं कामर्शियल को रिहायशी और इंडस्ट्रियल एरिया दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाई गई है। इसी मामले की फिलहाल निगम आयुक्त अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं।
---------------------- छह साल तक ठेकेदार के पास ही रहे यूजर, आइडी और पासवर्ड
बता दें कि नगर निगम ने प्रापर्टी आइडी सर्वे से लेकर प्रापर्टी टैक्स के सभी यूजर-आइडी और पासवर्ड तक ठेकेदार को थमाए रखे। इन्हीं यूजर-आइडी और पासवर्ड के जरिए कर्मचारियों की मिलीभगत से प्रापर्टी आइडी और टैक्स की स्लैब में बदलाव व छेड़छाड़ करने के आरोप हैं। बता दें कि वर्तमान निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा को जब इस बारे में पता चला था तो तुरंत उन्होंने कुछ माह पहले ही ठेकेदार से यूजर-आइडी और पासवर्ड लिए थे, लेकिन करीब छह साल तक यह टैक्स का पूरा बही खाता ठेकेदार के अधीन रहा।
---------------------- क्या है टैक्स लेने का नियम
टैक्स लेने के लिए किसी रजिस्ट्री व नक्शे की जरूरत नहीं होती। जिस स्थिति में भवन बना है उसी स्थिति में टैक्स लेने का प्रावधान है। यानी यदि कोई रिहायशी एरिया में गोदाम बनाएगा तो उससे गोदाम के चार्ज लिए जाएंगे, कामर्शियल गतिविधि कर रहा है तो उसी हिसाब से रेट लिए जाएंगे। इसी तरह यदि कोई फैक्ट्री चल रही है तो रेट अलग होंगे।
--------------------- रिहायशी एरिया के तय किए गए टैक्स रेट:-
- 75 पैसे प्रति गज 300 स्क्वायर यार्ड तक
- 3 रुपये प्रति गज 301 से 500 स्क्वायर यार्ड तक
- 4.50 रुपये 501 से 1000 स्क्वायर यार्ड तक
-5.25 पैसे एक हजार स्क्वायर यार्ड एक से 2 एकड़ तक
- दो एकड़ से ज्यादा साढ़े 7 रुपये प्रति स्क्वायर यार्ड
--------------- कामर्शियल के लिए इस तरह बनाई है स्लैब
18 रुपये 50 गज तक
27 रुपये 51 से 100 स्क्वायर यार्ड तक
36 रुपये 101 से 500 स्क्वायर यार्ड तक
45 रुपये 501 से 1000 स्क्वायर यार्ड तक
---------------- कामर्शियल खाली स्पेस के लिए स्लैब दर
9 रुपये प्रति स्क्वायर यार्ड 1000 तक
इसमें शापिग माल, मल्टीप्लेक्स व पार्किंग कमर्शियल स्पेश शामिल है।
11.25 पैसे 1000 स्क्वायर यार्ड से ज्यादा। यदि कोई जगह रेंट पर है तो 1.25 पैसे अतिरिक्त लिए जाएंगे।
--------------- इंडस्ट्री प्रापर्टी पर यह हैं स्लैब दर
2500 स्क्वायर यार्ड तक 3 रुपये 75 पैसे
2501 से दो एकड़ तक साढ़े 4 रुपये
2 एकड़ से अधिक 50 एकड़ तक डेढ़ रुपये प्रति स्क्वायर यार्ड।
-------------- गोदाम पर स्लैब दर
- 4.50 रुपये प्रति स्क्वेयर यार्ड 2500 स्क्वायर यार्ड तक
- 2500 से अधिक होने पर एक एकड़ तक 6.75 रुपये
- एक एकड़ से अधिक होने पर 7.20 रुपये तक
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हम इस मामले की जांच में जुटे हुए हैं। करीब दो महीने से जांच चल रही है। कोरोना के चलते जांच में थोड़ा विलंब हो गया। यदि किसी भी तरह की कहीं भी खामियां पाई जाती हैं तो निश्चित तौर पर न केवल कार्रवाई की जाएगी बल्कि रिकवरी भी करेंगे। लेकिन बिना जांच पूरी हुए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त।
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