भगोड़ा घोषित कराने से पहले मामले में अपराधी की प्रॉपर्टी अटैच करेगी पुलिस
-कानून का खौफ बढ़ाने व व्यवस्था कायम रखने के प्रयास -जमानत की गारंटी राशि बढ़ाने पर विचा
-कानून का खौफ बढ़ाने व व्यवस्था कायम रखने के प्रयास
-जमानत की गारंटी राशि बढ़ाने पर विचार, जिले 1778 पीओ, पैरोल जंपर, मोस्ट वांटेड व रि-अरेस्ट फरार
राजीव ऋषि, अंबाला शहर
किसी भी मामले में कोर्ट से भगोड़ा घोषित कराने से पहले पुलिस अपराधी की संपत्ति केस में अटैच करेगी। उसके बावजूद यदि वह पेश नहीं होता, सरेंडर नहीं करता तो उसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कोर्ट से भगोड़ा करार दिलाकर उसके खिलाफ आइपीसी की धारा 174-ए के तहत केस दर्ज कराया। इस केस का ट्रायल अलग से चलेगा। सजा के मामले में अपराधियों के मन में कानून के कम होते खौफ को कायम रखवाया जाएगा। इस मामले प्रदेश स्तर के आला पुलिस अधिकारियों में विचार-विमर्श हो चुका है।
इस बारे मौखिक तौर पर प्रत्येक जिले के पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। ऐसे अपराधियों की जमानत के लिए गारंटी राशि बढ़वाने पर राय-विमर्श किया जा रहा है ताकि कोई किसी अपने या अंजान की जमानत लेने बारे कई बार सोचे, छोटी-मोटी राशि भरकर अपराधी फरार न हो सके। जिले में फिलहाल ऐसे 1778 अपराधियों में से 1710 बेल जंपर, 29 पैरोल अफेंडर, 28 मोस्ट वांटेड तथा 11 ऐसे संगीन अपराधी गिरफ्त से बाहर हैं जोकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत लेकर जेल से गए लेकिन आज तक वापस नहीं लौटे। इनकी धरपकड़ के लिए तमाम क्राइम टीमों के सहयोग के अलावा अलग से पीओ स्टाफ गठित किया गया है।
कानून की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराने व अपराधियों में दिल में कानून व सजा का डर बरकरार रखने के लिए पुलिस अधिकारियों विचार-विमर्श किया है। डिसाइड किया गया है कि पुलिस किसी भी मामले में गिरफ्त से बाहर चल रहे अपराधी को कोर्ट से जल्द पीओ (प्रोक्लेमड अफेंडर) करार नहीं दिलाएगी। कोर्ट से वारंट जारी कराने के बाद सबसे पहले उसकी संपत्ति मामले में अटैच कराएगी ताकि उसपर दबाव बने, वह पुलिस की जांच में शामिल हो या कोर्ट में सरेंडर करे।
कानून के लचीलेपन का यूं फायदा उठाते हैं अपराधी
सूत्रों के अनुसार अपराध जमानती गारंटी की कम राशि का गलत फायदा उठाते रहे हैं। किसी अंजान से 5 से 15 हजार तक की गारंटी पर जमानत भरवा देते हैं। उसके बाद पेशी से वापस नहीं लौटते, क्योंकि राशि कम होती है, इसलिए गारंटर पैसे भर किनारे हो जाता है और अपराधी रफूचक्कर। अंबाला में भी कुछ ऐसे मामले सामने गए थे जिसमें कुछ लालची किस्म चिन्हित किए गए जिन्होंने थोड़े से पैसों के लिए खूंखार बदमाशों की जमानत गारंटी भर ली थी। ऐसे अपराधियों को दोबारा पकड़ने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ ने तो फरारी के दौरान संगीन अपराधों को भी अंजाम दिया था।
ऐसे घोषित होते हैं पीओ
निर्धारित समय तक फरार अपराधी का कोर्ट से अरेस्ट वारंट जारी कराया जाता है। घर के बाहर नोटिस लगाने के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर चस्पाए जाते हैं। अपराधी को 30 दिन के भीतर पुलिस के सामने पेश होने या कोर्ट में सरेंडर करने के लिए समय दिया जाता है। न आने पर कोर्ट उसे भगौड़ा करार देकर थाने में उसके खिलाफ धारा 174-ए का केस दर्ज कराती है।
कानून की पालना सुनिश्चित करने का प्रयास : एसपी जोरवाल
एसपी अभिषेक जोरवाल के अनुसार कानून की पालना सुनिश्चत कराने के लिए प्रयास किया गया है कि अपराधी को पीओ घोषित करने से पहले उसे पकड़ने के प्रयास किए जाएं। ऐसे में पीओ घोषित कराने से पूर्व कोर्ट का आदेश लेकर उसकी प्रापर्टी केस में अटैच कर ली जाए तो इससे अपराधी व उसके परिवार पर दबाव बनेगा, कार्रवाई में आसानी होगी।
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