Haryana Politics: हरियाणा का कौन होगा अगला मुख्यमंत्री? भूपेंद्र हुड्डा ने कर दिया साफ, बीरेंद्र सिंह ने दिए क्या सुझाव
Haryana Politics हरियाणा में सरकार बनाने को लेकर आशान्वित कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा के विरुद्ध हरियाणा मांगे हिसाब नाम से राज्यस्तरीय अभियान आरंभ किया है। इस अभियान के तहत कांग्रेस ने 15 आरोपों के साथ भाजपा सरकार के विरुद्ध एक चार्जशीट जारी की। कांग्रेस नेता यह चार्जशीट लेकर पूरे प्रदेश में लोगों के घर-घर जाएंगे और उन्हें भाजपा सरकार के 10 साल के कार्यकाल की विफलताओं की जानकारी देंगे।
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के बीच बृहस्पतिवार को जबरदस्त जुगलबंदी नजर आई। भूपेंद्र हुड्डा और बीरेंद्र सिंह रिश्ते में भाई लगते हैं। दोनों राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। हुड्डा ने बीरेंद्र सिंह को जहां बड़ा भाई कहकर सम्मान दिया, वहीं बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस को सत्ता में लाने के कई सुझाव दे डाले। हुड्डा ने बीरेंद्र का कोई सुझाव नजरअंदाज नहीं किया।
बीरेंद्र सिंह बोलते चले जा रहे थे और हुड्डा अपलक सुनते जा रहे थे। बात-बात पर दोनों के बीच हंसी-ठिठोली भी हुई। बीरेंद्र सिंह ने अपने चिर-पिरिचित अंदाज में यह संदेश भी दे दिया, मुझे सिर्फ मार्गदर्शक मंडल का सदस्य ना समझा जाए। मेरे पास कांग्रेस में 42 और भाजपा में 10 साल का अनुभव है। कुछ मेरे हिसाब से भी चलोगे तो हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बननी तय है।
मुख्यमंत्री को लेकर क्या बोले हुड्डा
हरियाणा कांग्रेस की इस बड़ी प्रेस कान्फ्रेंस में आखिरी सवाल मुख्यमंत्री के पद से जुड़ा था। हुड्डा से किसी ने सवाल पूछा कि यदि आपकी अपेक्षा के अनुरूप कांग्रेस की सरकार आती है तो मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा होंगे या फिर दीपेंद्र सिंह हुड्डा को सीएम बनाया जाएगा।
हुड्डा ने तपाक से इस सवाल का जवाब दिया। बोले कि वैसे तो यह हाइपोथेटिकल सवाल है, लेकिन कांग्रेस में वही सीएम बनता है, जिसे विधायक चाहते हैं और जिसे कांग्रेस हाईकमान चाहता है। आप हमारी सरकार बनवाओ। हम विधायकों से बात कर सीएम का फैसला खुद कर लेंगे।
हरियाणा मांगे हिसाब अभियान लॉन्च
मौका था कांग्रेस के हरियाणा मांगे हिसाब अभियान की लांचिंग का। चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में अधिकतर विधायक और प्रमुख नेता इस कार्यक्रम का हिस्सा बने। कुछ विधायकों व पूर्व मंत्रियों के बाद चौधरी बीरेंद्र सिंह कार्यक्रम में पहुंचे।
पार्टी नेताओं से हाल-चाल जानने के बाद वे मंच पर सबसे पीछे की पंक्ति में जाकर बैठ गए। थोड़ी देर बाद हुड्डा, उदयभान, अशोक अरोड़ा और दीपेंद्र सिंह आए। साथ में आफताब अहमद, गीता भुक्कल, वरुण मुलाना, सतपाल ब्रह्मचारी और शमशेर गोगी भी थे।
बीरेंद्र सिंह ने बीजेपी के साथ जेजेपी की खिंचाई की
दीपेंद्र हुड्डा ने बीरेंद्र सिंह को अंकल कहकर नमस्ते किया। हुड्डा के बगल में एक कुर्सी खाली थी। बीरेंद्र को उन्होंने अपनी बगल में बैठने का इशारा किया। फिर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला। बीरेंद्र सिंह को पहले बोलने का मौका मिला। उन्होंने भाजपा के साथ-साथ जजपा की भी खूब खिंचाई की।
बोले, राजनीतिक रूप से भाजपा लोगों के भरोसे पर खरी नहीं उतर पाई। भाजपा का सबसे बड़ा राजनीतिक करप्शन जजपा के साथ गठबंधन का था। जजपा ने आर्थिक करप्शन किया तो भाजपा ने आंखें बंद कर ली। एक के बाद एक एसआइटी और कमेटियां बनाकर इस भ्रष्टाचार को ढंकने की कोशिश की गई।
'न तो मनभेद है और ना ही मतभेद'
बीरेंद्र सिंह ने इशारों ही इशारों में कुमारी सैलजा द्वारा समानांतर किए जाने वाले कार्यक्रमों को भी स्वीकृति दी, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए जो लंबी छलांग लगा सके, लगानी चाहिए। अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बारी थी।
उन्होंने अपने पुराने अंदाज में बढ़िया सवालों का खुलकर जवाब दिया और लाइन से हटे सवालों को चुप रहकर नजर अंदाज कर दिया। बीरेंद्र सिंह व सैलजा के साथ गुटबाजी से जुड़े सवाल पर हुड्डा ने स्पष्ट कहा, हमारे यहां न तो मनभेद है और ना ही मतभेद है।
सबका मकसद कांग्रेस को सत्ता में लाने का है। हुड्डा ने मीडिया वालों से पूछा, आप ही बताओ, क्या हमारे में से किसी ने कभी किसी के विरुद्ध नाम लेकर कुछ बोला है। बीरेंद्र सिंह ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए सांसदों की तरफ इशारा किया। बोले कि भाइयों, मैं माफी चाहता हूं, हो सकता है कि केंद्र की सरकार न जाने कब गिर जाए।
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