अंबाला छावनी में बैंक स्क्वायर के निर्माण में 19.67 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। कम बोली वाली कंपनी को छोड़कर अधिक बोली वाली कंपनी को टेंडर दिया गया। एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है जिसमें अधिकारियों पर एएस इंटरप्राइजेज को फायदा पहुंचाने का आरोप है। जांच में भ्रष्टाचार के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
दीपक बहल, अंबाला। अंबाला छावनी के बैंक स्क्वायर के निर्माण शुरू होने से पहले ही 19.67 करोड़ रुपये के खेल का पर्दाफाश हुआ है।
जो कंपनी 87.12 करोड़ रुपये में निर्माण करने की दौड़ में थी, उसकी जगह 106.79 करोड़ रुपये की बिड देने वाली फर्म को टेंडर की मंजूरी दे दी गई। यानी कि अभी निर्माण भी नहीं हुआ कि इससे पहले ही राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का फटका लगने जा रहा था।
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राज्य सरकार ने जब एंटी करप्शन ब्यूरो को एफआइआर दर्ज करने के लिए मंजूरी दी, उसमें फर्म का नाम भी शामिल था, जबकि एफआइआर में आरोपितों की सूची में सिर्फ अधिकारी ही शामिल हैं। अब एसीबी जांच में पता लगा रही है कि एसडीएम सहित नौ अधिकारी एएस इंटरप्राइजेज पर क्यों मेहरबानी करना चाहते थे।
अधिकारियों ने टेक्निकल बिड को आधार बनाते हुए गोरा लाल बिल्डर्स को रेस से बाहर क्यों कर दिया और एएस इंटरप्राइजेज को क्यों योग्य मान लिया था। कुल चार कंपनियां रेस में थीं, जिनमें से दो को पहले बाहर किया जा चुका था। अब जांच के दौरान खुलासा हो पाएगा कि एएस इंटरप्राइजेज पर अफसरशाही क्यों मेहरबान थी।
एसीबी ने इस पूरे मामले से संबंधित रिकार्ड कब्जे में ले लिया और नामजद अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। एसीबी ने मामले में भ्रष्टाचार होने का अंदेशा जताते हुए रिटायर्ड एसडीएम सुभाष सिहाग, रिटायर्ड एसई रमेश मदान, ईओ विनोद नेहरा, एक्सईएन पंकज सैनी, एमई हरीश कुमार, एमई मनेश्वर भारद्वाज, जेई हरीश शर्मा और जेई कपिल कंबोज को आरोपित बनाया है।
एफआइआर में एएस इंटरप्राइजेज से लेकर टेंडर की रेस में शामिल सभी कंपनियों को चिह्नित किया गया है।
यह है मामला
बैंक स्कवायर को बनाने के लिए एंटरप्राइजेज, गोरालाल बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी और नानूराम गोपाल एंड कंपनी टेंडर की रेस में थे। अधिकारियों की समिति ने दस्तावेजों की जांच कर एएस एंटरप्राइजेज बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कपंनी को योग्य माना था जबकि गोरा लाल बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स व मैसर्ज नानूराम गोपाल एंड कंपनी को अयोग्य घोषित कर दिया था।
इनमें एक कंपनी 106 करोड़ 79 लाख तथा दूसरी कंपनी 114 करोड़ 80 लाख रुपये में रेस में थी, जबकि सबसे कम गोपाल बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स 87.12 करोड़ रुपये थे, जो कि एएस एंटरप्राइजेज की दरों से 19.67 करोड़ रुपये कम थी।
जब मामले की जांच हुई तो टेंडर फिर से जिस कंपनी को अलाट किया गया था उसे रद कर गोरालाल कंपनी को दे दिया। यह कंपनी हरियाणा हाईकोर्ट में भी दस्तावेजों को लेकर गई थी।
एसीबी ने फाइल पर नोटिंग तक कब्जे में ली
एसीबी ने इस प्रकरण में किस अधिकारी की क्या भूमिका रही है, इसका पूरा उल्लेख किया है। एसीबी ने रिपोर्ट में लिखा कि रिकार्ड को चेक करने पर पाया कि डीपीआर तैयार करते समय वस्तुओं की मात्रा की सही तरीके से गणना नहीं की और बैंक स्कवायर भवन के लिए कार्य के उचित दायरे को ध्यान में रखा गया।
चार कंपनियां टेंडर लेने की दौड़ में थीं। इसके लिए जेई, एमई, एक्सईएन, ईओ, नगर प्रशासक, नगर निगम समिति की टीम ने दस्तावेज चेक किए। 12 सितंबर 2019 को समिति द्वारा टेक्निकल बिड खोली गई। जिसके बाद एएस इंटरप्राइजेज के पक्ष में स्वीकृति दे दी गई।
13 सितंबर 2019 को एक्सईएन नगर निगम द्वारा एएस इंटरप्राइजेज को औपचारिक रूप से आवंटन पत्र जारी किया। इसके बाद मैसर्ज गोरा लाल बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के संचालक हरीश गोयल ने सरकार को शिकायत दे दी और हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
बाद में दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद 87.12 करोड़ की बिड देने वाले गोरा लाल कंपनी को टेंडर अलाट कर दिया। 19.67 करोड़ रुपये का खेल पाया गया। एसीबी जांच कर रही है कि अधिक राशि वाले को मेहरबानी के पीछे भ्रष्टाचार कारण है और कौन लिप्त पाए गए हैं।
जांच की जा रही है: एसीबी
एसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान चेक किया जाएगा कि अधिकारियों ने एएस इंटरप्राइजेज पर मेहरबानी क्यों की थी इसको लेकर जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि एफआइआर में कंपनी का जिक्र है, लेकिन कंपनी का कोई बिल पास नहीं हुआ था और न ही उसको कोई लाभ मिला है।
किंतु जांच में यह चीज अहम है कि 19.67 करोड़ रुपये वाले को टेंडर क्यों दिया गया और टेक्निकल बिड के आधार पर गोरालाल कंपनी को क्यों बाहर किया गया।
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