अवतार चहल, अंबाला शहर

मंगलवार को गांव बलाना में एक शादी ऐसी भी हुई, जिसमें दंपति ने संविधान को साक्षी मानकर एक दूसरे को अपना जीवन साथी मान लिया। यमुनानगर के ककड़ोली से आई बारात में मात्र 11 बाराती ही आए और दुल्हन को साथ लेकर चले गए। ग्रामीणों ने भी दंपति को गृहस्थ जीवन की शुरुआत करने के लिए सामान भी गिफ्ट किया।

अंबाला में शायद यह पहला मौका है, जब शादी की रस्में संविधान को साक्षी मानकर पूरी की गई हैं। इस शादी की चर्चा जहां आसपास कि गांवों में है, वहीं साधारण तरीके से हुए इस विवाह ने एक मिसाल भी कायम की है। विवाह में फिजूलखर्ची से किनारा किया गया।

गांव बलाना की रहने वाली युवती रितु की पारिवारिक पृष्ठभूमि काफी गरीब है। युवती के पिता की मौत पहले ही हो चुकी है, जबकि उसकी मां लापता है। रितु के साथ उसका छोटा भाई रहता है। ग्रामीणों के सहयेाग से ही परिवार का गुजर बसर हो पा रहा था। इसी दौरान ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही लड़की की शादी का जिम्मा उठाया।

यमुनानगर के गांव ककड़ोली में एक परिवार से बातचीत हुई। यहां पर युवक अमरजीत को देखा और ग्रामीणों ने यह रिश्ता पक्का कर दिया। मंगलवार को अमरजीत बारात लेकर गांव बलाना पहुंचा। गांव में स्थित रविदास मंदिर में सभी एकत्रित हुए। यहां पर गुरु रविदास कमेटी, डा. भीमराव आंबेडकर कमेटी के पदाधिकारी व सदस्यों सहित ग्रामीण मौजूद रहे। कमेटी के सदस्य रामकरण ने बताया कि गांव के मंदिर में ही अमरजीत और रितु का विवाह कराया गया। दंपति ने संविधान को साक्षी मानकर विवाह को संपन्न किया। ग्रामीणों ने यह दिया गया सामान

शादी के बाद दंपति को गृहस्थी की शुरुआत करने के लिए गांव बलाना के लोगों ने सामान भी दिया। इन में अलमारी, पेटी, डबल बैड, गद्दे जोड़ी, कुर्सियां, मेज, कुकर, गैस चूल्हा, सिलेंडर, छत पंखा, प्रेस, दीवार घड़ी, लड़के की घड़ी, पिता की घड़ी, बिचौले की घड़ी, ड्रेसिग टेबल, बर्तन, डिनरसेट, बिस्तर, लड़की के पांच जोड़े, लड़के के जोड़े, नानके-दादके के जोड़े, मासी-बुआ के जोड़े, गर्म कंबल, चांदी की चुटकियां, चांदी की चेन, सोने का कोका, सोने की बालियां शामिल हैं।

Edited By: Jagran