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    'अपनी ड्यूटी करते तो टल जाता गोधरा कांड', गुजरात हाईकोर्ट ने GRP पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी को सही ठहराया

    By Agency Edited By: Jeet Kumar
    Updated: Sat, 03 May 2025 07:30 AM (IST)

    गुजरात हाई कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में नौ जीआरपी कर्मियों की सेवा समाप्ति को बरकरार रखते हुए कहा है कि गोधरा कांड को टाला जा सकता था। अगर ये जीआरपी जवान उन्हें सौंपी गई साबरमती एक्सप्रेस में सवार होते और अहमदाबाद वापस आने के लिए दूसरी ट्रेन ना लेते तो 27 फरवरी 2002 की सुबह गोधरा स्टेशन पर हुई घटना नहीं होती।

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    गुजरात हाईकोर्ट ने कहा जीआरपी जवान अपनी ड्यूटी करते तो टल सकता था गोधरा कांड (सांकेतिक तस्वीर)

    पीटीआई, अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में नौ जीआरपी कर्मियों की सेवा समाप्ति को बरकरार रखते हुए कहा है कि गोधरा कांड को टाला जा सकता था। अगर ये जीआरपी जवान उन्हें सौंपी गई साबरमती एक्सप्रेस में सवार होते और अहमदाबाद वापस आने के लिए दूसरी ट्रेन ना लेते तो 27 फरवरी 2002 की सुबह गोधरा स्टेशन पर हुई घटना नहीं होती।

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    जीआरपी कर्मियों ने अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही और असावधानी दिखाई

    जस्टिस वैभवी नानावती ने जीआरपी कर्मियों की बहाली की याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा, ''याचिकाकर्ताओं ने रजिस्टर में फर्जी प्रविष्टियां कीं और शांति एक्सप्रेस से अहमदाबाद वापस लौट गए। अगर ये सभी साबरमती एक्सप्रेस से लौटते, तो गोधरा में हुई घटना को टाला जा सकता था। इन्होंने अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही और असावधानी दिखाई।

    रिकॉर्ड बताते हैं कि साबरमती एक्सप्रेस ए श्रेणी की ट्रेन है। ए श्रेणी की ट्रेनों में चेन खींचने और झगड़े जैसी घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस श्रेणी की हर ट्रेन में राइफल और कारतूस के साथ तीन सशस्त्र और बाकी लाठी और रस्सी के साथ जीआरपी जवान जरूर होने चाहिए।''

    अधिकारियों के तर्क किसी भी हस्तक्षेप की मांग नहीं करते हैं

    आदेश में कहा गया, ''इन्हें इतनी महत्वपू्ण ड्यूटी सौंपी गई थी, लेकिन उन्होंने लापरवाही दिखाते हुए शांति एक्सप्रेस से सफर किया। अधिकारियों के तर्क किसी भी हस्तक्षेप की मांग नहीं करते हैं। अदालत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत असाधारण अधिकार क्षेत्र का प्रयोग ना करना उचित समझती है और दोनों याचिकाएं खारिज की जाती हैं।''

    गौरतलब है कि इन नौ जीआरपी कर्मियों को उस दिन पता चला कि साबरमती एक्सप्रेस अनिश्चितकाल की देरी से आएगी, इसलिए ये सभी रजिस्टर में फर्जी प्रविष्टि करके शांति एक्सप्रेस से चले गए।

    सुबह करीब 7.40 बजे गोधरा स्टेशन के पास एस-6 कोच में भीड़ ने आग लगा दी, जिससे इसमें सफर कर रहे 59 यात्रियों की मौत हो गई। ज्यादातर मरने वाले कारसेवक थे जो अयोध्या, उत्तर प्रदेश से लौट रहे थे। जांच के बाद इन सभी को गुजरात सरकार ने निलंबित करने के बाद सेवामुक्त कर दिया।

    अनिश्चितकाल की देरी पर जीआरपी कर्मियों का ट्रेन बदलना आम बात

    हाई कोर्ट में इस सजा को चुनौती दी गई और याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि अनिश्चितकाल की देरी पर जीआरपी कर्मियों का ट्रेन बदलना आम बात है। इस पर सरकार ने कहा कि इन्होंने निर्धारित ट्रेन में न चढ़ने के अलावा दाहोद स्टेशन चौकी पर गलत प्रविष्टि भी की कि वे साबरमती एक्सप्रेस से जा रहे हैं। इससे नियंत्रण कक्ष को यह गलत संकेत मिला कि ट्रेन सुरक्षित है।