ब्राजील में फिर चकहने लगे विलुप्त तोते 'स्पिक्स मैकॉ', अनंत अंबानी के वंतारा और ACTP ने मिलकर चलाई थी मुहिम
अनंत अंबानी के ड्रीम प्रोजेक्ट वंतारा और ACTP की साझेदारी से विलुप्त घोषित स्पिक्स मैकॉ तोते ब्राजील के जंगलों में फिर से लौट आए। 41 तोतों को ACTP और वंतारा के ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर ने बहिया क्षेत्र में पुनर्वासित किया। स्पिक्स मैकॉ प्रजाति 2000 में विलुप्त घोषित कर दी गई थी। यह प्रयास वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
डिजिटल डेस्क, जामनगर। बिजनेसमैन मुकेश अंबानी व नीता अंबानी के बेटे और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक अनंत अंबानी की वंतारा प्रोजेक्ट के जरिये 'वन्य जीवों को बचाने और उनका पुनर्वास कराने' की मुहिम रंग ला रही है। अब ब्राजील के जंगलों में स्पिक्स मैकॉ यानी सायनोप्सिटा स्पिक्सी फिर से चहकते, फुदकते, डालों पर झूलते और फंखफड़फड़ाते नजर आएंगे।
स्पिक्स मैकॉ (Spix's Macaw), जिसका वैज्ञानिक नाम सायनोप्सिटा स्पिक्सी (Cyanopsitta spixii) है। यह एक नीले-ग्रे रंग का तोता है। यह तोता ब्राजील के बाहिया राज्य में पाया जाता था, लेकिन साल 2000 में इस ब्राजीलियन प्राजाति के तोते स्पिक्स मैकॉ को विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
हाल ही में वंतारा और एसोसिएशन फॉर द कंजर्वेशन ऑफ थ्रेटेंड पैरट्स (ACTP) ने मिलकर 41 स्पिक्स मैकॉ (Spix’s Macaws or Cyanopsitta spixii) तोतों को ब्राजील के बहिया क्षेत्र में उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वास कराया है। वंतारा के ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC) ने इस कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई है।
स्पिक्स मैकॉ का पुनर्वास कैसे हुआ?
बर्लिन स्थित एसोसिएशन फॉर द कंजर्वेशन ऑफ थ्रेटेंड पैरट्स (ACTP) के प्रजनन केंद्र से 29 जनवरी को 41 स्पिक्स मैकॉ को ब्राजील के बहिया क्षेत्र में सफलतापूर्वक पहुंंचाया गया। ब्राजील भेजे जाने वाले 41 स्पिक्स मैकॉ का चयन उनकी वंशावली और स्वास्थ्य के आधार पर किया गया।
इनमें 23 मादाएं, 15 नर और 3 चूजे शामिल थे। 41 में से कुछ पक्षी इस साल जंगल में छोड़ने के लिए तैयार स्पिक्स मैकॉ तोते के समूह में शामिल होंगे, जबकि अन्य को दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों के लिए प्रजनन कार्यक्रम में शामिल किया गया।
सावधानियां बरती गईं ताकि जंगल में न फैले कोई बीमारी
स्पिक्स मैकॉ को फिर से बसाने की इस परियोजना के तहत इन विलुप्त घोषित गए तोतों को ब्राजील भेजने से पहले बर्लिन के प्रजनन केंद्र में 28 दिनों से अधिक समय तक क्वारंटीन में रखा गया।
क्वारंटीन के दौरान यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक परीक्षण किए गए कि इन तोतों मे ब्राजील के पर्यावरण को प्रभावित करने वाली कोई बीमारी तो नहीं है।
इसके बाद 28 जनवरी 2025 को स्पिक्स मैकॉ को बर्लिन से पेट्रोलिना एयरपोर्ट से चार्टर्ड फ्लाइट से ब्राजील लाया गया। यहां फिर क्वारंटीन सेंटर लाया गया, जहां ACTP के दो पशु चिकित्सक और देखभालकर्ता और वंतारा के GZRRC की विशेषज्ञ टीम ने जांच कीं। इस पुनर्स्थापना परियोजना में वंतारा ने ACTP को एक्सपर्ट गाइडेंस, वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
ACTP के संस्थापक मार्टिन गुथ ने वंतारा और अनंत अंबानी का आभार जताते हुए कहा कि उनकी विशेषज्ञता और समर्पण ने इस विलुप्त प्रजाति को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि स्पिक्स मैकॉ को फिर बसाने की यह पहल वंतारा के वैश्विक संरक्षण प्रयासों और जैव विविधता को संरक्षित करने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह कदम अन्य विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह परियोजना न केवल विलुप्त प्रजातियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक संरक्षण के प्रति समर्पण का एक उदाहरण भी है।
बता दें कि साल 2019 में स्पिक्स मैकॉ को ब्राजील में स्थापित एक समर्पित रिलीज सेंटर में तैयार किया गया था। 2022 में 20 पक्षियों को जंगल में छोड़ा गया, जिसमें 7 जंगली चूजों का जन्म हुआ। वंतारा भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए भी सक्रिय है। यह कैद में पाले गए गैंडों, एशियाई शेरों और चीतों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करने के प्रयास कर रहा है।
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