भारत के रंग 'TVS Radeon के संग', एक कलाकार की नजर से जयपुर शहर को जानें

जयपुर अपने नायाब पत्थर और सांगानेरी हैंड प्रिंट के लिए काफी प्रसिद्ध है,
Publish Date:Wed, 29 Sep 2021 09:55 AM (IST)Author: Author: Bhavana

नई दिल्ली, ब्रांड डेस्क। ऐतिहासिक इमारतें और शानदार वास्तुशिल्प राजस्थान की पहचान हैं और जयपुर शहर इस राज्य की शान है। पिंक सिटी के नाम से मशहूर यह शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी समृद्ध है, जिसके बारे में जानकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। ठीक वैसे ही जैसे TVS बाइक चलाकर हम गौरवान्वित महसूस करते हैं। सैकड़ों साल पहले डिजाइन की गई इस शहर की विस्तृत संरचनाएं, यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है।

भारत के इतिहास के बारे में जानना है तो यहां के शहरों की यात्रा करनी चाहिए। इन दिनों Jagran Hitech यही कर रही है। अपने कार्यक्रम ‘भारत के रंग TVS Radeon के संग’ के साथ। पिछले दिनों टीम जयपुर के सफर पर थी। अगर आपको भी भारत की खूबसूरती, उसकी संस्कृति के बारे में जानना है तो इस कार्यक्रम के साथ बने रहें।

‘भारत के रंग TVS Radeon के संग’- जयपुर, देखें सीरीज

 

एक चित्रकार की नजर से जयपुर

एक अनजान व्यक्ति जब किसी नए शहर में जाता है, तो वह शहर उसके लिए एक नई किताब की तरह होती है, जहां वह रहकर उसके बारे में जानता है, पढ़ता है और अनुभव लेता है। एक शहर को एक कलाकार से बेहतर कोई नहीं जान सकता है। श्रीकांत रंगा की चित्रकारी जयपुर में काफी फेमस है। यह रंगों से ऐसे खेलते हैं, मानो हर जगह अपनी छाप, अपनी पहचान छोड़ना चाहते हैं, वो धाकड़पन जो किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते, पर अपने से ज्यादा अपनों की चिंता करते हैं, बिलकुल TVS Radeon की तरह।

TVS Radeon के साथ श्रीकांत रंगा ने जागरण टीम को जयपुर की पुरानी गलियों से लेकर वहां की भव्य इमारतों और ऐतिहासिक स्मारकों का दर्शन कराया है। शहर में घूमने के लिए कई सारी जगहे हैं, जैसे सिटी पैलेस, हवा महल, आमेर का किला, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय, जल महल आदि। विश्व प्रसिद्ध आमेर के किले को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया है।

लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का बना आमेर का किला

आमेर, मूल रूप से, जयपुर से पहले राज्य की राजधानी थी। यह एक पुराना किला है, जिसे राजा मान सिंह ने 1592 में बनवाया था। इस किले को आमेर पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। आमेर किला लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर में बनाया गया था और मोठा झील पूरे किले में एक आकर्षण का केंद्र है। इसकी संरचना में चार अलग-अलग भाग हैं, प्रत्येक में एक अलग प्रवेश द्वार है। किले में मुख्य प्रवेश 'सूरज पोल' या सूर्य द्वार के माध्यम से होता है जो मुख्य प्रांगण में खुलता है। यह पूर्वमुखी द्वार भी महल का मुख्य प्रवेश द्वार है और उगते सूरज के संबंध में इसका नाम रखा गया है।

जयपुर की पहचान सांगानेरी हैंड प्रिंट

जयपुर अपने नायाब पत्थर और सांगानेरी हैंड प्रिंट के लिए काफी प्रसिद्ध है, जहां पीढ़ियों से कारीगर सांगानेरी ब्लॉक प्रिंटिंग का काम कर रहे हैं। ब्लॉक प्रिंटिंग बेहद बारीक कारीगिरी का काम है और पिछले 500 सालों से यह जयपुर की पहचान बनी हुई है। इसे मुख्य रूप से 16वीं और 17वीं शताब्दी के बीच विकसित किया गया था| उस समय ये प्रिंटेड फैब्रिक ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए निर्यात की प्रमुख वस्तु थी। सांगानेरी प्रिंटिंग तकनीक भारत के अमीर व्यापारियों द्वारा विकसित की गई थी, जो भारत की संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते थे।

जयपुर दर्शन करते समय लजीज व्यंजन की बात न हो यह कैसे हो सकता है। श्रीकांत रंगा के अनुसार इस शहर में कचौड़ी, लस्सी और घेवर काफी पसंद किए जाते हैं।जयपुर की समृद्ध विरासत देश-विदेश के पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है। भव्य इमारतें, खान पान और वेशभूषा इस शहर के बारे में बहुत कुछ कहते हैं। जागरण टीम ने श्रीकांत रंगा की नजर से इस शहर के बारे में जाना, तो वहीं श्रीकांत रंगा ने TVS Radeon बाइक की सवारी करके उसके बारे में जाना। श्रीकांत रंगा को यह बाइक क्यों पसंद आई, इसके लिए वीडियो जरूर देखें।

नोट - यह आर्टिकल ब्रांड डेस्‍क द्वारा लिखा गया है।

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