Matargashti Review: 'मटरगश्ती' और टेंशन के बीच पिता-बेटी की केमिस्ट्री निकली मजेदार, पढ़ें रिव्यू
वेब सीरीज 'मटरगश्ती' (Matargashti) पिता-बेटी के रिश्ते और किशोरावस्था की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है। पढ़ें इसका रिव्यू...
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मटरगश्ती सीरीज का रिव्यू। फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया (AI)
HighLights
पिता-बेटी के बॉन्ड को खूबसूरती से दिखाती है 'मटरगश्ती'
तीन महिलाओं ने मिलकर लिखी है 'मटरगश्ती' की कहानी
अद्रिजा सिन्हा और राजेश कुमार का बेहतरीन अभिनय
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। पिता-बेटी के बीच अनबन और टीनएज लड़की की बगावत से जुड़े मुद्दे कई बार दिखाए जा चुके हैं, लेकिन हालिया रिलीज वेब सीरीज 'मटरगश्ती' (Matargashti) उनसे अलग है। यह फिल्म पैट्रियार्की वाली सोच और एडोलसेंस को बहुत हल्के-फुल्के अंदाज में बुनी गई है।
क्या है 'मटरगश्ती' सीरीज की कहानी?
लखनऊ में सेट फिल्म की कहानी एक पिता-बेटी के बॉन्ड के इर्द-गिर्द घूमती है। एक मिडिल क्लास और ओवरप्रोटेक्टिव सिंगल पिता प्रकाश की है जो अपनी बेटी के साथ बॉन्ड तो बनाना चाहता है लेकिन नहीं पता- कैसे? उसकी 19 साल की बेटी 'धरा' (अद्रिजा सिन्हा) पढ़ने में तेज है और कॉलेज में टॉपर है, लेकिन एडोलसेंस (किशोरावस्था) में शारीरिक-मानसिक विकास और पीयर प्रेशर में आकर वह अपनी इंडिपेंडेंस और डेटिंग लाइफ को एक्सप्लोर करना शुरू करती है।

अपनी बेटी को सुशील, सक्षम और संस्कारी मानने वाला उसका पिता तब हैरान हो जाता है, जब वह अपनी बेटी को डेटिंग ऐप पर देखता है। इसके बाद वह उसके डेटिंग प्लान को नाकाम बनाने के मिशन पर जुट जाता है। क्या 'धरा' और 'प्रकाश' अपने-अपने मिशन पर कामयाब हो पाते हैं? कहानी इसी के इर्द-गिर्द है।
कैसी है 'मटरगश्ती सीरीज'?
रोमांस, पीयर पेशन, डेटिंग लाइफ और पिता-बेटी के बॉन्ड पर बनी वेब सीरीज 'मटरगश्ती' एक एंटरटेनिंग सीरीज है। कई सीरीज और फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके सिद्धांत चवन (Siddhant Chavan) ने हर भावनाओं को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाने की अच्छी कोशिश की है।

स्क्रीनराइटिंग कैसी है?
कहानी दिल छूती है। खुशबू बैद, निकिता और स्वाति जैन ने सीरीज की कहानी को ऐसा गढ़ा है कि यह पैट्रियारकी वाली सोच को बड़े हल्के और मजेदार तरीके से पेश करती है। लड़का डेट पर जाए तो सवाल नहीं, लेकिन लड़की जाए तो सवाल क्यों? इस तरह के कुछ सीन्स आपको समाज की असलियत से रूबरू भी कराते हैं, लेकिन मजेदार अंदाज में।
कहां रह गई कमी?
सीरीज ऊबाऊ तो नहीं लगती है, लेकिन डेप्थ की कमी लगती है। सीन्स जल्दी-जल्दी भागते हैं और राजेश कुमार का बेटी को स्पाई करने वाले सीन्स में भी कहीं-कहीं दोहराव लगता है। डायलॉग्स भी ठीक-ठीक हैं। बात करें बैकग्राउंड स्कोर्स की तो वह ज्यादा जुड़ाव महसूस नहीं कराते हैं।

कैसी है परफॉर्मेंस?
धरा की भूमिका में अद्रिजा सिन्हा अच्छी लगी हैं। उनके डायलॉग्स से ज्यादा उनके चेहरे का एक्सप्रेशन काबिल-ए-तारीफ है। बात करें राजेश कुमार की तो वह पिता के रोल में जचे हैं। सह-कलाकार सौम्या उनियाल ने भी अच्छी परफॉर्मेंस दी है।
क्या देखने लायक है 'मटरगश्ती'?
'मटरगश्ती' देखने लायक है। भले ही कुछ कमियां हैं, लेकिन फिर भी यह बिंज वॉच है। पिता-बेटी का बॉन्ड और किशोरावस्था की उलझन को मजेदार ढंग से पेश किया गया है। ऊपर से 25 मिनट से कम के एपिसोड हैं जो आपको बोर नहीं होने देते हैं।
